पत्थलगांव राजस्व विभाग में बड़ा खेल : एसडीएम का ड्राइवर बना ‘बाबू’, रसूख इतना कि पूरा राजस्व तंत्र बना मुट्ठी में!-  भ्रष्टाचार, मनमानी और मिलीभगत का खुला खेल, सवालों के घेरे में पूरा तंत्र

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पत्थलगांव। मुख्यमंत्री के गृह जिले में भ्रष्टाचार की ऐसी मिसाल शायद ही कहीं और मिले, जहां एसडीएम का ड्राइवर ही राजस्व विभाग का बाबू बनकर फाइलें निपटा रहा है! जी हां, यह कोई अफवाह नहीं, बल्कि पत्थलगांव राजस्व विभाग की जमीनी हकीकत है। अधिकारी की कुर्सी के पीछे बैठा ड्राइवर लम्बोदर यादव अब खुद आदेश देता नजर आता है – जमीन डायवर्सन से लेकर पेशी तक और अवैध वसूली के तमाम मामलों में उसका दबदबा चर्चा का विषय बना हुआ है।

सूत्रों के मुताबिक, एसडीएम रितुराज सिंह बिसेन के ड्राइवर लम्बोदर यादव पर लगातार गंभीर आरोप लग रहे हैं – कभी जमीन डायवर्सन के नाम पर पैसा मांगने का, तो कभी फाइल आगे बढ़ाने के नाम पर ‘सेवा शुल्क’ लेने का। कई लोगों ने इस बाबू बने ड्राइवर के खिलाफ शिकायतें भी दर्ज कराईं, लेकिन विभागीय कार्रवाई आज तक शून्य रही। यही कारण है कि अब यह सवाल पूरे इलाके में गूंज रहा है –

> “क्या पत्थलगांव का राजस्व विभाग ड्राइवर के इशारे पर चल रहा है?”

सवाल जो शासन-प्रशासन को झकझोर रहे हैं:

आखिर कौन है यह ‘निडर ड्राइवर’ जो एसडीएम के नाम पर राजस्व कार्यालय में हुकूमत चला रहा है?
किस अफसर का संरक्षण है कि तमाम शिकायतों के बावजूद उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई?
कब तक आंखों पर पट्टी बांधे बैठे रहेंगे राजस्व विभाग के जिम्मेदार अधिकारी?
और सबसे बड़ा सवाल — मुख्यमंत्री के गृह जिले में यह बेलगाम भ्रष्टाचार कब तक यूं ही चलता रहेगा?

🎙️ वर्जन:

लम्बोदर यादव (ड्राइवर) -“मेरे ऊपर लगाए गए सारे आरोप निराधार हैं। मैंने किसी से कोई वसूली नहीं की है।”

रितुराज सिंह बिसेन (एसडीएम, पत्थलगांव) –“मुझे इस पूरे मामले की जानकारी अभी आपके माध्यम से मिल रही है। ऑफिस आने के बाद मैं जांच कराऊंगा।”

रुद्र कुमार यादव (शिकायतकर्ता नागरिक) — “हमसे ड्राइवर ने डायवर्सन के नाम पर ₹60,000 मांगे। हमने कलेक्टर को लिखित शिकायत दी। कलेक्टर ने कहा पैसा मत दो, काम हो जाएगा — और सच में हमारा काम बिना पैसे हो गया।”

जनचर्चा में सवाल : कलेक्टर की सख्त हिदायत के बावजूद अगर ड्राइवर इस तरह बेलगाम होकर विभाग चला रहा है, तो क्या यह राजस्व तंत्र के भीतर की सड़ांध का प्रमाण नहीं? क्या ऐसे भ्रष्ट कारिंदों को संरक्षण देना अधिकारियों की मिलीभगत नहीं दर्शाता?

जनता की मांग :अब वक्त आ गया है कि पत्थलगांव के इस “ड्राइवर बाबू” पर सख्त विभागीय जांच हो, और पूरे मामले की निगरानी जिला प्रशासन स्तर पर हो — ताकि राजस्व विभाग में फैले भ्रष्टाचार, दादागीरी और अधिकारी-ड्राइवर गठजोड़ पर विराम लग सके।

> क्योंकि सवाल सिर्फ एक है – क्या पत्थलगांव का राजस्व विभाग अब ड्राइवर चलाएगा या कानून?

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