उपभोक्ता फोरम का बीमा कंपनी पर चला हथॉड़ा @ फसल बीमा एवज मे करना होगा 77 हजार का भुगतान

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फसल बीमा दावा प्रकरण में उपभोक्ता आयोग का आदेश, 45 दिन में भुगतान करे बीमा कंपनी

आयोग के अध्यक्ष छमेश्वर लाल पटेल ने आयोग के सदस्यों राजेन्द्र कुमार पाण्डेय एवं श्रीमती राजश्री अग्रवाल की उपस्थिति में सुनाया निर्णय

आवेदक की ओर से अधिवक्ता प्रवीण कुमार त्रिपाठी ने की पैरवी

अतिवृष्टि के कारण हुई फसल नुकसान का भुगतान नहीं कर रही थी एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया लिमिटेड

रायगढ़ (छत्तीसगढ़): जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग रायगढ़ ने फसल बीमा के एक महत्वपूर्ण निर्णय में एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया लिमिटेड को आदेश दिया है कि वे किसान पुनीराम पटेल को 49,853 रुपये की बीमा क्षतिपूर्ति राशि 6% वार्षिक ब्याज सहित 45 दिनों के भीतर भुगतान करें,  इसके अलावा ₹10000 मानसिक क्षतिपूर्ति एवं ₹5000 वाद व्यय भी प्रदान करे.

 क्या है पूरा मामला 

आवेदक पुनीराम पटेल निवासी देवगांव जिला रायगढ़ ने 08/08/2019 को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत धान फसल का बीमा कराया था, क्षतिपूर्ति राशि 3,108 रुपये थी। सर्वेक्षण के अनुसार, फसल का नुकसान 1,437 हेक्टेयर में पाया गया। बीमा कंपनी द्वारा क्षतिपूर्ति राशि 57,000 रुपये निर्धारित की गई थी, लेकिन भुगतान नहीं किया गया, जिससे किसान को आर्थिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ा।

 बीमा कंपनी ने कही यह बात

बीमा कंपनी अर्थात अनावेदक ने दावा खारिज करने का निवेदन करते हुए बताया कि बीमा की प्रक्रिया बैंक और संबंधित संस्थाओं द्वारा संचालित होती है। उनके अनुसार, बीमा की प्रक्रिया सही तरीके से पूरी नहीं हुई।

आयोग का निर्णय: प्रमाणों और तर्कों का विश्लेषण करने के बाद, आयोग ने बीमा कंपनी को आदेशित किया कि वे:

बीमा क्षतिपूर्ति के रूप में 49,853 रुपये की राशि 6% वार्षिक ब्याज के साथ 45 दिनों के भीतर भुगतान करें।
मानसिक क्षति के लिए 10,000 रुपये और वाद व्यय के लिए 5,000 रुपये का अतिरिक्त भुगतान भी निर्धारित अवधि में करें।

आयोग के अध्यक्ष छमेश्वर लाल पटेल और सदस्यों राजेन्द्र कुमार पाण्डेय एवं श्रीमती राजश्री अग्रवाल की उपस्थिति में यह निर्णय 6 मार्च 2025 को सुनाया गया वही अधिवक्ता प्रवीण कुमार त्रिपाठी ने आवेदक की ओर से आयोग के समक्ष अपना पक्ष रखा था.

यह निर्णय किसानों के हित में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे बीमा कंपनियों को उनकी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने के प्रति सचेत किया गया है।

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