इंदु राय को बचाने में जुटा खंड़ शिक्षा अधिकारी कार्यालय बिसरा।

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पहली बार ऐसा मामला देखने को मिल रहा है कि एक अध्यापिका एक ऐसे स्कूल से दसवीं पास होकर आती है जो अदृश्य है, जो स्कूल खंड़ शिक्षा अधिकारी द्वारा ढूंढने पर भी नही मिला, और जब बात खुली तो खंड़ शिक्षा अधिकारी कार्यालय द्वारा इस प्रमाण पत्र की जांच उच्चतर माध्यमिक शिक्षा परिषद से करवाई जा रही है जबकि प्रमाण पत्र दसवीं पास होने का है।

इन दिनों कुछ ऐसा ही चमत्कार कर रहा है,बिसरा का खंड़ शिक्षा अधिकारी कार्यालय।खंड़ शिक्षा अधिकारी कार्यालय द्वारा सूचना का अधिकार के तहत खत संख्या 749 ,दिनांक 16-03-2024 में यह सूचना दी गई है कि इंदुराय के प्रमाण पत्रों की छायाप्रती उच्चतर माध्यमिक शिक्षा परिषद (HSCE) को जाँच के लिए भेजी गई है। जबकि खत के साथ नत्थी की गई इंदु राय का प्रमाण पत्र दसवीं पास का है।

उच्च्तर माध्यमिक शिक्षा परिषद् इंटर का परीक्षा करवाता है,और दसवीं की परीक्षा माध्यमिक शिक्षा मंडल (BSE) द्वारा कराया जाता है।
इतना ही नहीं बिसरा खंड़ शिक्षा अधिकारी द्वारा इसकी पुष्टि भी की जा चुकी है कि इंदु राय द्वारा प्रेषित प्रमाण पत्र जिस कल्पतरू वाणी विहार संस्कृत विद्यालय बसंती कालोनी से जारी किया गया बताया जा रहा है, वास्तव में वह स्कूल है ही नहीं।

खंड़ शिक्षा अधिकारी कार्यालय बिसरा द्वारा जिस अध्यापिका इंदुराय को बचाने की कोशिश की जा रही है वह कोई और नहीं फर्जी प्रमाण पत्र प्रकरण मामले की बहुचर्चित अध्यापिका सरकारी हिंदी उच्च प्राथमिक विद्यालय में पढ़ाने वाली इंदु राय ही है। पूरा मामला यह बताने के लिए पर्याप्त है कि खंड़ शिक्षा अधिकारी कार्यालय बिसरा में किस कदर भ्रष्टाचार व्याप्त है।

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