अबूझमाड़ की बदलती तस्वीर : जब विकास की राह खुद बना रहे हैं ग्रामीण, प्रशासन कब पहुँचेगा इलाके में?

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छत्तीसगढ़ के दक्षिण बस्तर के दुर्गम अबूझमाड़ इलाके से एक प्रेरणादायक तस्वीर सामने आई है। जहाँ कभी नक्सलियों की धमक और बंदूकों की आवाज सुनी जाती थी, वहीं अब विकास की गूंज सुनाई दे रही है। वर्षों से सड़क जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित रहे ग्रामीण अब अपने दम पर विकास की राह तैयार कर रहे हैं।

दंतेवाड़ा और बीजापुर जिले की सीमा पर स्थित कौशलनार क्षेत्र के ग्रामीणों ने मिलकर श्रमदान से 12 किलोमीटर लंबी सड़क निर्माण की शुरुआत की है। नक्सल गतिविधियों के कारण यह इलाका लंबे समय तक प्रशासनिक पहुंच से दूर रहा, लेकिन अब हालात बदल रहे हैं।

ग्रामीणों ने बताया:

“पहले डर लगता था, लेकिन अब नक्सली नहीं हैं। हमने सोचा कि अगर सरकार नहीं पहुँची, तो हम खुद ही सड़क बना लेंगे। बच्चों की पढ़ाई, बीमारों के इलाज और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए रास्ता होना बहुत जरूरी है।”

तुषवाल, मंगनार, हंदावाड़ा, कौशलनार-1, कौशलनार-2 और मुचनार जैसे छह ग्राम पंचायतों के करीब 800 से अधिक ग्रामीण रोजाना कुदाल और फावड़ा लेकर सड़क निर्माण में जुटे हुए हैं। ग्रामीणों की यह मेहनत अबूझमाड़ में आत्मनिर्भरता और विकास की नई मिसाल बन रही है।

जहाँ कभी सुरक्षा बलों का पहुँचना भी मुश्किल था, वहाँ आज आम लोग अपने हाथों से बदलाव की इबारत लिख रहे हैं।
यह न सिर्फ एक सड़क निर्माण की कहानी है, बल्कि विश्वास, साहस और परिवर्तन की नई शुरुआत है।

अब सवाल यह है — जब ग्रामीण खुद विकास की राह बना रहे हैं, तो प्रशासन कब इस इलाके तक पहुँचेगा?

बाइट: सायबो राम सरपंच पति,



बाइट:जिला राम ग्रामीण

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