लैलूंगा में आधार कार्ड बनाने के नाम पर अवैध वसूली प्रशासन मौन ?

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शासकीय जगह को छोड़ निजी जगह पर चल रहा आधार सेंटर, जिला प्रशासन के आदेश का खुला उलंघन…

रूपये लिए जाने कि शिकायत मिली है, जांच कर तत्काल कार्रवाई कि जायेगी । शिवम पाण्डेय तहसीलदार लैलूंगा

लैलूंगा:-नगर में आधार सेंटर के संचालन को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। जानकारी के अनुसार आधार नामांकन एवं सुधार केंद्र शासकीय भवन में संचालित किए जाने के स्पष्ट निर्देश होने के बावजूद निजी स्थान पर चलाया जा रहा है। इस मामले ने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं और आम जनता में नाराजगी बढ़ती जा रही है।स्थानीय लोगों का कहना है कि आधार जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज से जुड़ा कार्य पूर्णतः पारदर्शी और सुरक्षित माहौल में होना चाहिए। इसके लिए शासन द्वारा स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं कि आधार सेवा केंद्र शासकीय परिसर या अधिकृत स्थान पर ही संचालित हों। लेकिन लैलूंगा में इन नियमों की अनदेखी कर निजी जगह पर संचालन किया जा रहा है, जो कई आशंकाओं को जन्म दे रहा है। बताया जा रहा है कि जिला प्रशासन द्वारा पूर्व में भी निर्देश जारी किए गए थे कि आधार सेंटर को शासकीय संस्थान में ही संचालित किया जाए। इसके बावजूद आदेश का पालन नहीं किया गया। अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर आदेश की अनदेखी किसके संरक्षण में हो रही है? आधार कार्ड देश का सबसे महत्वपूर्ण पहचान दस्तावेज है, जिसे भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) द्वारा जारी किया जाता है। इसमें नागरिकों की व्यक्तिगत और बायोमेट्रिक जानकारी सुरक्षित रहती है। ऐसे में निजी स्थान पर संचालन डेटा सुरक्षा और पारदर्शिता को लेकर गंभीर चिंता पैदा करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संचालन में किसी भी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है तो यह सीधे तौर पर नागरिकों की गोपनीयता से जुड़ा मामला बन सकता है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि निजी जगह पर संचालित सेंटर में सुविधा और व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं है। कई बार भीड़, अव्यवस्था और समय पर काम न होने की शिकायतें सामने आती रही हैं। वहीं कुछ लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि मनमानी शुल्क वसूली की शिकायतें भी समय-समय पर सामने आती हैं। इस पूरे मामले में जब लैलूंगा तहसीलदार शिवम पांडे से संपर्क किया गया तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि “शिकायत प्राप्त हुई है। मामले की जांच कराई जाएगी और यदि नियम विरुद्ध संचालन पाया गया तो तत्काल आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।” तहसीलदार के इस बयान के बाद प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। अब यह देखना होगा कि जांच कितनी निष्पक्ष और त्वरित होती है। क्या वास्तव में आधार सेंटर को शासकीय भवन में स्थानांतरित किया जाएगा या फिर मामला जांच के नाम पर ठंडे बस्ते में चला जाएगा? जनता की निगाहें अब प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई है। लैलूंगा में यह मामला केवल एक सेंटर का नहीं, बल्कि व्यवस्था और नियमों के पालन का प्रश्न बन गया है। यदि शासन के आदेशों की खुलेआम अवहेलना होती है तो यह प्रशासनिक नियंत्रण पर भी सवाल खड़ा करता है। आम नागरिकों की मांग है कि जांच पारदर्शी हो, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो और आधार सेवा केंद्र को तत्काल नियम अनुसार शासकीय परिसर में संचालित कराया जाए। फिलहाल, पूरे क्षेत्र में इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज है। अब प्रशासन की कार्रवाई ही तय करेगी कि नियमों की जीत होती है या लापरवाही की कहानी आगे बढ़ती है।

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