सक्ती | प्रातः स्मरणीय परम पूज्य संत शिरोमणि गुरु घासीदास बाबा जी की तीन दिवसीय जयंती समारोह ग्राम दलालपाली में श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ सम्पन्न हुआ। आयोजन में आसपास के ग्रामों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और सतनाम संदेश का सामूहिक स्मरण किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ बाबाजी के छायाचित्र एवं जैतखाम पर विधिवत पूजा-अर्चना और चौका-आरती के साथ हुआ। पूरा वातावरण “जय सतनाम” के जयघोष से गूंजायमान रहा।

भक्ति और लोक-संस्कृति का संगम
इस अवसर पर संत खड़ग दास बाबा जी एवं तौलीपाली वाले बाबा जी ने सुमधुर पंथी गीत-संगीत की प्रस्तुति देकर श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया।
लोककला मंच जमगहन से मुकेश लहरे तथा लोककला मंच मौहापाली से दिनेश कुमार खंडेलवाल सहित विभिन्न ग्रामों से आए कलाकारों ने पारंपरिक लोक-सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। पंथी नृत्य ‘खर्रा छाल’ एवं सतनाम भजन (लिखित राम) की प्रस्तुति ने आयोजन को आध्यात्मिक ऊंचाई प्रदान की।

गुरु बालक दास बालिका पंथी पार्टी बछौरडीह, सिंगर सुमित्रा सायर, दारा सिंह बंजारे और सुमित्रा लोक संगीत जर्वे की प्रस्तुतियों ने भी खूब सराहना बटोरी। तीनों दिनों तक भजन-कीर्तन, पंथी नृत्य और लोकसंगीत का क्रम निरंतर चलता रहा।
अतिथियों के उद्बोधन
समारोह के अंतिम दिवस विशेष अतिथियों में राकेश नारायण बंजारे (प्रदेश प्रवक्ता, साहित्य प्रकोष्ठ), तोरन लक्ष्मी (पूर्व अध्यक्ष, युवा प्रकोष्ठ, प्रगतिशील छत्तीसगढ़ सतनामी समाज खरसिया), सोमनाथ भारद्वाज एवं जागेश्वर लक्ष्मी उपस्थित रहे।

राकेश नारायण बंजारे ने अपने संबोधन में कहा कि गुरु घासीदास बाबा जी का जीवन समता, सत्य, अहिंसा और मानवता का अमर संदेश देता है। उन्होंने “मनखे-मनखे एक समान” के संदेश को समाज को एकता के सूत्र में पिरोने वाला बताया और युवाओं से संत परंपरा से प्रेरणा लेकर समाज निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
आयोजन में सामूहिक योगदान
तीन दिवसीय आयोजन को सफल बनाने में युवा समिति एवं महिला समिति की महत्वपूर्ण भूमिका रही। ग्रामवासियों और समाज के वरिष्ठजनों का भी सराहनीय योगदान रहा।
समारोह के समापन पर आयोजन समिति ने समस्त ग्रामवासियों और सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया। ग्राम दलालपाली सहित आसपास के ग्रामीणों के सहयोग से यह जयंती समारोह श्रद्धा, भक्ति और सामाजिक एकता का प्रेरक उदाहरण बनकर संपन्न हुआ।


