अभिषेक कुमार पाण्डेय
रिपोर्टर, बिलासपुर छत्तीसगढ़
38.21 किमी लंबी रेल लाइन से औद्योगिक और खनन क्षेत्रों को मिलेगा फायदा, माल ढुलाई के लिए बनेगा वैकल्पिक मार्ग
बिलासपुर। क्षेत्रीय रेल कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में भारतीय रेलवे ने दक्षिण मध्य रेलवे के अंतर्गत मुकुटबन (आदिलाबाद) और गढ़चंदूर के बीच 38.21 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन के निर्माण को मंजूरी दी है। परियोजना की अनुमानित लागत 493 करोड़ रुपये बताई गई है। नई रेल लाइन के बनने से यात्रियों के साथ माल परिवहन को भी अधिक सुगम और प्रभावी बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
औद्योगिक और खनन क्षेत्रों को मिलेगी रेल सुविधा
यवतमाल जिले का मुकुटबन और चंद्रपुर जिले का गढ़चंदूर महत्वपूर्ण औद्योगिक एवं खनन क्षेत्र हैं। इन क्षेत्रों में सीमेंट संयंत्रों के अलावा वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड की कोयला खदानें और चूना पत्थर की खदानें स्थित हैं।
नई रेल लाइन के जरिए इन औद्योगिक और खनन समूहों को बेहतर रेल संपर्क मिलने की संभावना है। इससे खनिज एवं औद्योगिक उत्पादों की ढुलाई को अधिक व्यवस्थित और किफायती बनाने में मदद मिल सकती है।
छोटा रेल मार्ग मिलने से समय और लागत में कमी
परियोजना से परिवहन की दूरी और समय कम होने की उम्मीद है। इसके साथ ही वर्धा-मानिकगढ़ रेल खंड पर यातायात का दबाव घटाने के लिए एक वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध होगा। इससे विशेष रूप से मालगाड़ियों के संचालन को सुचारू बनाने में मदद मिलने की संभावना है।
विस्तृत परियोजना रिपोर्ट के अनुसार, रेल लाइन के शुरू होने के बाद प्रतिदिन दोनों दिशाओं में दो-दो मेमू ट्रेनों के साथ करीब 6.08 मीट्रिक टन वार्षिक माल ढुलाई यातायात संभालने का अनुमान है।
कोयला, सीमेंट और अन्य सामान की होगी ढुलाई
प्रस्तावित रेल मार्ग से कोयला एवं कोक, सीमेंट, स्पंज आयरन, मेटल स्क्रैप, लोहा-इस्पात, उर्वरक और खाद्यान्न सहित विभिन्न प्रकार की वस्तुओं के परिवहन की संभावना जताई गई है।
नई लाइन से औद्योगिक इकाइयों को बाजार और अन्य क्षेत्रों तक माल पहुंचाने के लिए अतिरिक्त रेल मार्ग उपलब्ध होगा।
माजरी-नांदेड़ मार्ग से बेहतर कनेक्टिविटी
नई रेल लाइन कोयला और सीमेंट से जुड़े औद्योगिक क्षेत्रों को माजरी-नांदेड़ रेल मार्ग से सीधा संपर्क उपलब्ध कराएगी। इससे जालना, परभणी, छत्रपति संभाजीनगर सहित महाराष्ट्र और कर्नाटक के विभिन्न गंतव्यों तक माल पहुंचाने में लगने वाले समय को कम करने में सहायता मिलने की उम्मीद है।
बल्हारशाह-नागपुर मार्ग पर दबाव होगा कम
परियोजना के जरिए व्यस्त बल्हारशाह-नागपुर हाई डेंसिटी नेटवर्क मार्ग पर निर्भरता कम करने का प्रयास होगा। इसके साथ ही यवतमाल और चंद्रपुर जिलों के उन क्षेत्रों में रेल संपर्क बेहतर होने की संभावना है, जहां वर्तमान में कनेक्टिविटी अपेक्षाकृत कम है।
क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को मिलेगा समर्थन
नई रेल लाइन से क्षेत्रीय रेलवे नेटवर्क की क्षमता बढ़ने के साथ आवश्यक वस्तुओं के परिवहन को भी अतिरिक्त मार्ग मिलने की उम्मीद है। परियोजना के माध्यम से यात्री और माल परिवहन की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए रेल ढांचे को मजबूत करने में मदद मिलेगी।
रेल कनेक्टिविटी में सुधार का असर औद्योगिक गतिविधियों, खनन क्षेत्र और क्षेत्रीय आर्थिक विकास पर भी पड़ने की संभावना है।




