सूरजपुर वन विभाग पर लकड़ी माफिया को संरक्षण देने के गंभीर आरोप

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रेंजर का बयान बना सवालों का केंद्र, बैकडेट कागजों की आशंका

सूरजपुर। जिले में वन विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। लकड़ी तस्करी के एक मामले में कार्रवाई के बजाय आरोपितों को छोड़ दिए जाने से विभाग पर लकड़ी माफिया को संरक्षण देने के गंभीर आरोप लग रहे हैं। मौके पर मौजूद अधिकारियों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जब पकड़ी गई लकड़ी और वाहनों को लेकर सवाल उठाए गए तो संबंधित रेंजर ने यह कहकर मामला टाल दिया कि “ऊंचे अधिकारियों के निर्देश पर छोड़ा गया है।”

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि वाकई उच्च अधिकारियों का निर्देश था, तो मौके पर उससे संबंधित वैध दस्तावेज क्यों नहीं दिखाए गए? बताया जा रहा है कि जब स्थानीय लोगों और अन्य कर्मचारियों ने कागजात दिखाने की मांग की, तब काफी देर बाद आरोपितों को छोड़ा गया।

बाद में कागजात तैयार कर पेश किए जाने की बात सामने आ रही है, जिससे बैकडेट पर दस्तावेज बनाने की आशंका और गहरा गई है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह पूरा मामला वन विभाग और लकड़ी माफिया के बीच मिलीभगत की ओर इशारा करता है। यदि सब कुछ नियमों के अनुसार था, तो तत्काल दस्तावेज दिखाकर कार्रवाई को पारदर्शी क्यों नहीं बनाया गया? वहीं, विभाग के भीतर से भी यह चर्चा है कि बिना ठोस कागजात के छोड़े गए तस्करों को बाद में बचाने की कवायद की गई।

इस पूरे प्रकरण ने वन विभाग की साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है और कहा है कि यदि दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो यह संदेश जाएगा कि जिले में लकड़ी माफिया को खुला संरक्षण प्राप्त है।
अब देखना यह होगा कि उच्च अधिकारी इस मामले में क्या रुख अपनाते हैं और क्या सच्चाई सामने लाने के लिए स्वतंत्र जांच कराई जाती है या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।

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