फर्जी अंकसूची से डाकपाल बनने की कोशिश नाकाम, दो गिरफ्तार

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रायगढ़, 14 फरवरी। फर्जी 10वीं की अंकसूची के जरिए डाकपाल की नौकरी हासिल करने की कोशिश करने वाले एक महिला और एक पुरुष को सिटी कोतवाली पुलिस ने गिरफ्तार किया है। मामले में कोरबा निवासी मुख्य साजिशकर्ता अब भी फरार है, जिसकी तलाश जारी है।

ऐसे हुआ फर्जीवाड़े का खुलासा

जुलाई 2023 में भारतीय डाक विभाग द्वारा ग्रामीण डाकसेवक (GDS) पदों पर ऑनलाइन भर्ती निकाली गई थी। भर्ती प्रक्रिया में सक्ती जिले के नरेन्द्र कुमार और सोनम साहू ने 10वीं की अंकसूची अपलोड कर आवेदन किया था। चयन के बाद दस्तावेज सत्यापन के दौरान अंकसूचियों को तमिलनाडु शिक्षा बोर्ड से सत्यापित कराया गया, जहां से स्पष्ट किया गया कि प्रस्तुत अंकसूचियां बोर्ड द्वारा जारी नहीं की गई थीं।

इसके बाद अधीक्षक डाकघर की शिकायत पर थाना सिटी कोतवाली में अपराध दर्ज किया गया।

लाखों रुपये लेकर दिलाई थी फर्जी मार्कशीट

पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि नौकरी दिलाने के नाम पर कोरबा निवासी विनोद कुमार राठौर ने उनसे 3 से साढ़े 3 लाख रुपये की मांग की थी।

नरेन्द्र कुमार ने ₹3,50,000 दिए।

सोनम साहू ने नियुक्ति के बाद रकम देने की बात कही थी।


राठौर ने ही दोनों को नकली अंकसूची उपलब्ध कराई थी, जिसे जानते हुए भी उन्होंने आवेदन किया। सत्यापन में फर्जीवाड़ा सामने आने पर उनकी नियुक्ति निरस्त कर दी गई।

पुलिस कार्रवाई

पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468, 471, 34 के तहत मामला दर्ज कर दोनों को न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है। नकली और मूल दस्तावेज जब्त कर लिए गए हैं। मुख्य आरोपी विनोद राठौर फरार है।

एसएसपी का सख्त संदेश

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह ने कहा कि शासकीय सेवाओं में भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और नियमबद्ध होती है। फर्जी दस्तावेज के आधार पर नौकरी पाने की कोशिश दंडनीय अपराध है। उन्होंने युवाओं से अपील की है कि वे नौकरी के नाम पर दलालों और बिचौलियों के झांसे में न आएं और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल पुलिस को दें।

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