पानी को लेकर कांग्रेस ने घेरा निगम दफ्तर को ।

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पेयजल की बदहाल होती व्यवस्था का आरोप लगाते कांग्रेसियों ने निगम दफ्तर का घेराव किया। कांग्रेसी 48 में से 4 वार्डों में पेयजल का संकट बता रहे थे, जबकि महापौर ने कहा कि सिर्फ एक वार्ड में पेयजल की दिक्कत थी, जिसे दूर कर दिया गया।
मीडिया पहुंची तो बयानों के तीर चले और इस बार निगम का प्रतिनिधित्व कर रहे नेताओं से आगे जाकर बात पूर्व विधायक तक पहुंच गई।

कांग्रेसियों ने महापौर सफीरा साहू के खिलाफ सीधा मोर्चा खोलते हुए आरोप लगाया कि शहर की मूलभूत जरुरतों से उन्हें कोई लेना-देना नहीं है। जनचौपाल के जरिए वे सिर्फ दिखावा कर रही हैं। कांग्रेसियों ने निगम में काबिज भाजपा की नगर सरकार को चेताया है कि यदि जल्द ही इस समस्या का निराकरण न हुआ तो उग्र आंदोलन होगा।

उदयनाथ जेम्स, नेता प्रतिपक्ष, नगर निगम (सिर पर बाल नहीं, नजर का चश्मा पहने हुए

उपनेता प्रतिपक्ष ने तुकबंदी के जरिए अपना रोष जाहिर करते हुए महापौर को भ्रष्ट कह डाला। उन्होंने भाजपा शासित निगम पर कई आरोप लगाते हुए कहा कि शहर के लोग परेशान हैं और सत्ताधारी लोगों को कुछ दिखाई नहीं दे रहा।

राजेश रॉय, उपनेता प्रतिपक्ष, नगर निगम, जगदलपुर (हरे रंग की शर्ट)

चूंकि इन दिनों महापौर कांग्रेसियों के निशाने पर हैं, इसलिए जब उनसे प्रतिक्रिया ली गई तो उन्होंने भी बयान देने में कोई कमी नहीं की। कांग्रेसी पार्षदों को मुद्दाविहीन बताते महापौर ने एक कदम आगे बढ़ाया और कह दिया कि पूर्व विधायक के पास अब कोई काम बचा नहीं है, इसलिए वे अपनी राजनीति चमकाने निगम का दरवाजा खटखटा रहे हैं।

सफीरा साहू, महापौर
आपसी खींचतान में उलझी निगम की राजनीति हर दिन नए बयान के साथ सुर्खियां बटोर रही है। पिछले एक पखवाड़े में कांग्रेसियों ने दूसरी बार नगर निगम दफ्तर का घेराव किया है। कमरे को लेकर शुरु हुई यह पॉलीटिक्स सबसे पहले बाथरुम तक गई। फिर चूड़ी की बात पर व्यक्तिगत हमले हुए। मैन-टू-मैन घेरेबंदी की गई और राम का नाम आने के बावजूद सारी मर्यादाएं तार-तार की गईं। अब पानी के बहाने एक-दूसरे को पानी कर रहे हैं ।

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