ग्रामीणों द्वारा किया गया सड़क निर्माण  ग्रामीणों ने मतदान का बहिष्कार करने की दी चेतावनी।

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राजगांगपुर विधानसभा क्षेत्र में आजादी के 77 साल बाद भी राजगांगपुर प्रखंड के जोरूमल पंचायत के महाईखाना गांव के लोगों के लिए पक्की सड़क नहीं बन पाई है। प्रधानमंत्री सड़क योजना के बावजूद गांव को यह सुविधा नहीं मिल पाई है। यहां 40 साल पुराना स्कूल भी है, लेकिन बरसात के मौसम में स्कूल में पढ़ाई नहीं है पाती है? कीचड़ के कारण बच्चों का सड़कों पर चलना मुश्किल हो जाता है,उनके पैर फिसल जाते हैं या कीचड़ में गिर जाते हैं।

वाहनों से कीचड़ उछलने पर वे कीचड़ से सन जाते है जिस वजह से बच्चे स्कूल नहीं जा पाते हैं। इस सड़क के कारण बच्चों को पढ़ाई में दिक्कत हो रही है। इतना ही नहीं गांव में कोई बीमार पड़ जाए तो अस्पताल ले जाने में दिक्कत होती है और एंबुलेंस भी गांव तक नहीं पहुंच पाती, ऐसा ग्रामीणों ने बताया। ग्रामीणों ने शिकायत करते हुए कहा कि हमारे गांव में करीब 250 घर हैं, जबकि मतदाताओं की संख्या करीब 100 है। ग्रामीणों ने अपनी राय जाहिर की है कि अगर इस गांव में सड़क नहीं बनी तो आने वाले दिनों में वे चुनाव का बहिष्कार करने को बाध्य होंगे।

पहले बरसात के दिनों में लोग दूसरे गांवों से यहाँ रूकने आते थे, क्योंकि एक गांव से दूसरे गांव जाने के लिए पानी के तेज बहाव में संकरी नहर को पार करना काफी मुश्किल होता था।

उस समय कुटुनिया पंचायत के सरपंच विक्रम टोप्पो से अनुरोध करने के बाद उनके प्रयास से नहर पर पुल का निर्माण हुआ था। लेकिन अभी तक किसी भी योजना के तहत में सड़क नहीं बन पाई है, चाहे वह मध्यम आकार की सड़क हो या पक्की सड़क। यहां तक कि मरीज को डॉक्टर के पास ले जाने के लिए एंबुलेंस भी गांव में नहीं आ सकती है, फलस्वरूप मरीज को गोद में उठाकर या चारपाई पर ले जाना पड़ता है।

ग्रामीणों का कहना है कि बीजद के जमाने में जब हमारे विधायक मंगला किसान आदिवासी मंत्री थे, तब हमने उनसे सड़क के लिए बार-बार अनुरोध किया, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। हमने जिला पाल,  सरपंच, जिला पार्षद से सड़क के लिए अनुरोध किया था और वर्तमान विधायक डॉ. सीएस राजन एक्का से भी कहा था, लेकिन उसके बाद भी हमें अब तक कोई लाभ नहीं मिला।

अंत में हम ग्रामीणों को चंदा इक्ट्ठा कर सड़क बनाने के लिए मजबूर होना पड़ा और चूंकि बरसात के दिनों में यात्रा करना सुविधाजनक नहीं था, इसलिए हमने फैक्ट्री से 40 डंपर अपशिष्ट पदार्थ खरीदकर सड़क पर डाला और उसकी मरम्मत की।

हमने मीडिया को बताया था कि अगर आने वाले दिनों में हमारे गांव की सड़क नहीं बनी, तो ग्रामीण चुनाव का बहिष्कार करने को मजबूर होंगे।

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