गन्ना कारखाने में जाम, प्रशासन मौन—क्या किसान की तकलीफ कोई मुद्दा नहीं?

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किसानों का सब्र टूटा—अगले साल गन्ना बोआई बंद करने की चेतावनी

* करकाभाट शक्कर कारखाना बना किसान विरोध का केंद्र, पेराई कब?
* हर साल वही कहानी—करकाभाट शुगर मिल, किसान और सिस्टम की विफलता

* ठंड में जागते किसान, कुर्सी पर सोता सिस्टम—करकाभाट शक्कर कारखाने की पोल

बालोद | बालोद जिले के करकाभाट शक्कर कारखाना में गन्ना पेराई शुरू न होने से सैकड़ों किसानों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है। कारखाना प्रबंधन के निर्देश पर 15 दिसंबर से किसानों से गन्ना तो मंगवा लिया गया, लेकिन बॉयलर मशीन और अन्य तकनीकी खामियों के कारण अब तक पेराई शुरू नहीं हो सकी है। इसका सीधा खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है।

कारखाने के बाहर गन्ने से लदे ट्रैक्टर-ट्रॉली और ट्रक पिछले 4–5 दिनों से खड़े हैं, जिससे गन्ना सूखने और खराब होने का खतरा बढ़ गया है। कड़ाके की ठंड के बावजूद किसान रात-रात भर जागरण करने को मजबूर हैं और अपने वाहनों की रखवाली कर रहे हैं।

“मशीन तैयार नहीं थी तो गन्ना क्यों बुलवाया?” – किसान

किसानों का सवाल है कि जब शक्कर कारखाने की मशीनें पूरी तरह से तैयार ही नहीं थीं, तो फिर टोकन जारी कर गन्ना मंगवाने का फैसला क्यों लिया गया। इससे न केवल किसानों का समय बर्बाद हुआ है, बल्कि आर्थिक नुकसान भी झेलना पड़ रहा है।

वाहन किराया और रबी फसल ने बढ़ाई चिंता

कई किसान वाहन किराए के बढ़ते खर्च से बेहद चिंतित हैं। वहीं दूसरी ओर रबी फसल की बुआई, बीज और खेत तैयार करने का काम भी जारी है, लेकिन किसान कारखाने में फंसे होने के कारण अपने कृषि कार्यों पर ध्यान नहीं दे पा रहे हैं।

प्रबंधन का तर्क: इंजीनियर की फ्लाइट मिस

इस पूरे मामले में शक्कर कारखाने के महाप्रबंधक लिलेश्वर देवांगन ने बताया कि

“कारखाना तभी शुरू हो पाएगा, जब फरीदाबाद से बुलाए गए इंजीनियर यहां पहुंच जाएंगे। इंजीनियर की फ्लाइट मिस हो गई थी, इसी कारण मशीन संचालन में देरी हो रही है।”

हालांकि किसानों का कहना है कि यह कोई पहली बार नहीं है, जब तकनीकी कारणों का हवाला देकर उन्हें परेशान किया जा रहा हो।

एक दशक बाद भी ठोस प्रबंधन नहीं

गौरतलब है कि करकाभाट शक्कर कारखाने की स्थापना को लगभग एक दशक हो चुका है, लेकिन आज तक यहां कोई ठोस और भरोसेमंद प्रबंधन व्यवस्था विकसित नहीं हो पाई है। हर वर्ष पेराई के समय इसी तरह की समस्याएं सामने आती हैं और किसान परेशान होते हैं।

अगले साल गन्ना बोआई नहीं करने का संकेत

लगातार हो रही परेशानियों से आक्रोशित किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि यही हाल रहा तो अगले वर्ष गन्ना की बोआई न करने का फैसला किसान खुद लेने को मजबूर होंगे।

प्रशासन की चुप्पी पर सवाल

सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि इस पूरे मामले में प्रशासनिक अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं। किसानों की समस्याओं को नजरअंदाज किया जाना क्या उचित है, यह सवाल अब खुलकर उठने लगा है।

किसानों की मांग है कि तत्काल पेराई शुरू कराई जाए, जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो और भविष्य में ऐसी लापरवाही की पुनरावृत्ति न हो, ताकि मेहनतकश किसानों को बार-बार इस तरह के संकट का सामना न करना पड़े।

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