बाल्को में पहली बार महिला क्रेन ऑपरेटर्स की तैनाती, 30 महिलाओं ने संभाली जिम्मेदारी

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वेदांता एल्युमीनियम ने भारत एल्युमीनियम कंपनी लिमिटेड (बाल्को) स्थित अपने स्मेल्टर प्लांट में पहली बार महिला क्रेन ऑपरेटर्स की टीम तैनात कर एक नई पहल की है। यह कदम देश के उन्नत तकनीक-संचालित एल्युमीनियम उद्योग में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

कंपनी ने कुल 30 महिलाओं को नियुक्त किया है, जिनमें 10 बीम-रेज़िंग ऑपरेटर और 20 पीटीएम पायलट शामिल हैं। यह उपलब्धि उस समय सामने आई है जब बाल्को ने हाल ही में उत्पादन क्षमता के आधार पर प्रतिष्ठित “मिलियन टन क्लब” में जगह बनाई है।

कठोर प्रशिक्षण के बाद मिली जिम्मेदारी

इन महिला पायलट्स ने अपनी भूमिका संभालने से पहले व्यापक प्रशिक्षण प्राप्त किया। इसमें क्लासरूम ट्रेनिंग, सिमुलेटर सेशन और चरणबद्ध ऑन-द-जॉब प्रशिक्षण शामिल रहा। अब ये महिलाएँ पॉट रूम में महत्वपूर्ण कार्यों जैसे एनोड बदलना, कवरिंग करना, पिघले एल्युमीनियम का टैपिंग और बीम उठाने जैसी जिम्मेदारियाँ संभाल रही हैं।

तकनीक और समावेशिता पर जोर

इस पहल पर टिप्पणी करते हुए राजीव कुमार ने कहा कि आधुनिक तकनीक और ऑटोमेशन एल्युमीनियम उद्योग में नई संभावनाएँ पैदा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कंपनी को गर्व है कि महिलाएँ इन तकनीक-आधारित महत्वपूर्ण भूमिकाओं को आत्मविश्वास के साथ निभा रही हैं और यह पहल भविष्य के लिए तैयार कार्यबल बनाने की दिशा में अहम कदम है।

महिलाओं के लिए नए अवसर

पीटीएम पायलट के रूप में कार्यरत नाज़ फातिमा ने कहा कि यह काम चुनौतीपूर्ण होने के साथ-साथ बेहद संतोषजनक है। उन्होंने बताया कि कंपनी महिलाओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ देकर उनके कौशल विकास में निवेश कर रही है, जिससे औद्योगिक क्षेत्रों में महिलाओं के लिए नए अवसर खुल रहे हैं।

विविधता और समावेशिता की दिशा में कदम

वेदांता एल्युमीनियम पहले भी कई पहलें कर चुका है, जिनमें झारसुगुड़ा में पूरी तरह महिलाओं द्वारा संचालित पॉटलाइन, ऑल-वुमन लोकोमोटिव टीम, डिजिटल कमांड सेंटर और पावर ऑपरेशंस टीम शामिल हैं। इसके अलावा कंपनी ने प्लांट संचालन में ट्रांसजेंडर पेशेवरों को भी शामिल किया है और उनके लिए विशेष सुविधाएँ प्रदान की जा रही हैं।

कंपनी के अनुसार वर्तमान में उसके कुल कार्यबल में महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग 21 प्रतिशत है, जिसे आने वाले वर्षों में 35 प्रतिशत तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।

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