नयी दिल्लीः प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पश्चिम एशिया के युद्ध को ‘कोरोना महामारी’ जैसा ही एक अप्रत्याशित वैश्विक संकट करार दिया है. उन्होंने कहा कि इस संघर्ष का असर लंबे समय तक रहने वाला है और इससे पार पाने के लिए देशवासियों को उसी तरह तैयार और एकजुट रहना होगा, जैसे सबने मिलकर कोरोना का सामना किया था. प्रधानमंत्री मोदी सोमवार को लोकसभा में पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और इसके कारण भारत के सामने आई चुनौतियों पर वक्तव्य दे रहे थे.
प्रधानमंत्री ने कहा, “इस युद्ध के कारण दुनिया में बने हालात का प्रभाव लंबे समय तक रहने की आशंका है. इसलिए हमें तैयार रहना होगा, हमें एकजुट रहना होगा. हम कोरोना के समय भी एकजुटता से ऐसी चुनौतियों का सामना कर चुके हैं. अब हमें फिर से उसी तरह तैयार रहने की आवश्यकता है. धीरज, संयम और शांत मन से हर चुनौती का मुकाबला करना है. यही हमारी पहचान है.”
#WATCH | On the West Asia conflict, Prime Minister Narendra Modi says, ” … another major challenge of the war is that the summer season is beginning in india. in the coming days, with rising temperatures, the demand for electricity will increase. currently, adequate coal stocks… pic.twitter.com/CC393Nivjj
— ANI (@ANI) March 23, 2026
मोदी ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य से कच्चे तेल, गैस और उर्वरक से लदे जहाजों के आवागमन में चुनौती के बावजूद सरकार का प्रयास देश में पेट्रोल, डीजल और गैस की आपूर्ति बहुत अधिक प्रभावित नहीं होने देने का है. उन्होंने कहा कि देश में एलपीजी उत्पादन बढ़ाया जा रहा है और पेट्रोल-डीजल की लगातार सुचारू आपूर्ति पर काम किया गया है. प्रधानमंत्री ने कृषि संबंधी चुनौतियों के संदर्भ में कहा कि सरकार किसानों की हरसंभव मदद करती रहेगी.
उन्होंने कहा कि जिस क्षेत्र में युद्ध हो रहा है, वह दुनिया के दूसरे देशों के साथ भारत के व्यापार का महत्वपूर्ण रास्ता है और देश में कच्चे तेल तथा गैस के बड़े हिस्से की आपूर्ति करता है. उन्होंने कहा कि पिछले तीन सप्ताह से अधिक समय से पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के हालात से पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था, लोगों के जीवन पर बहुत विपरीत असर हो रहा है. भारत के सामने भी इस युद्ध ने अप्रत्याशित चुनौतियां खड़ी कर दी हैं.
On the West Asia conflict, Prime Minister Narendra Modi says, ” because of such efforts, many of our ships that were stranded in the strait of hormuz have also arrived in india. due to ethanol blending, we are saving the import of about 4.5 crore barrels of oil every year.… pic.twitter.com/MaURhm7jvC
— ANI (@ANI) March 23, 2026
मोदी ने कहा कि यह क्षेत्र इसलिए भी अहम है क्योंकि खाड़ी देशों में एक करोड़ भारतीय रहते और काम करते हैं. उन्होंने कहा कि उस क्षेत्र के समुद्र में संचालित व्यावसायिक जहाजों में तैनात चालक दल के सदस्यों में भारतीयों की संख्या बहुत अधिक है, इसलिए भारत की चिंताए स्वाभाविक रूप से अधिक हैं. उन्होंने कहा, “इसलिए यह आवश्यक है कि भारत की संसद से इस संकट को लेकर एकमत और एकजुट आवाज में संदेश दुनिया में जाए.”
प्रधानमंत्री ने कहा कि संकट की स्थिति बनने के बाद उन्होंने स्वयं पश्चिम एशिया के अधिकतर राष्ट्राध्यक्षों से दो बार फोन पर बात की है. उन सभी ने वहां भारतीयों की सुरक्षा का पूरा आश्वासन दिया है. उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य से इस दौरान कुछ लोगों की मृत्यु हो गई और कुछ लोग घायल हो गए. मोदी ने कहा कि प्रभावित देशों में भारत के जितने भी मिशन हैं वे निरंतर भारतीयों की मदद में जुटे हैं, वहां काम करने वाले भारतीयों, पर्यटकों को हर संभव मदद दी जा रही है.
उन्होंने कहा कि ऐसे संकट के समय देश-विदेश में भारतीयों की सुरक्षा भारत की बहुत बड़ी प्राथमिकता रही है. मोदी ने कहा, “युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक लगभग 3 लाख 75 हजार भारतीय सुरक्षित देश लौट चुके हैं. ईरान से ही अभी तक लगभग एक हजार भारतीय सुरक्षित वापस आए हैं. इनमें मेडिकल की पढ़ाई करने वाले 700 से अधिक युवा हैं.” उन्होंने कहा कि खाड़ी देशों में भारतीय बच्चों की निर्बाध पढ़ाई के लिए सीबीएसई उचित कदम उठा रही है.
उन्होंने कहा कि बीते एक दशक में भारत ने संकट के ऐसे समय से निपटने के लिए कच्चे तेल के भंडारण को प्राथमिकता दी है. आज भारत के पास 53 लाख मीट्रिक टन से अधिक कच्चे तेल का रणनीतिक भंडार है, वहीं 65 लाख टन से अधिक भंडारण पर काम किया जा रहा है.
#WATCH | On the West Asia conflict, Prime Minister Narendra Modi says, ” … in the last 11 years, india has diversified its energy imports. earlier, for energy needs like crude oil, lng and lpg, imports were made from 27 countries, but today india imports energy from 41… pic.twitter.com/ElXZOR6b1C
— ANI (@ANI) March 23, 2026
उन्होंने कहा कि बीते दिनों होर्मुज में फंसे देश के कई जहाज भारत आए हैं. मोदी ने कहा कि संकट के समय इथेनॉल उत्पादन तथा ब्लेंडिंग के क्षेत्र में पिछले 10-11 साल में देश में की गई तैयारी भी बहुत काम आ रही है. मोदी ने कहा कि आज रेलवे का इतने बड़े स्तर पर विद्युतीकरण नहीं होता तो हर साल 180 करोड़ लीटर डीजल अतिरिक्त लगता. उन्होंने कहा कि देश में मेट्रो का 1100 किलोमीटर नेटवर्क, राज्यों को केंद्र द्वारा 15,000 इलेक्ट्रिक बसें दिए जाने समेत वैकल्पिक ईंधन पर हो रहे कार्यों से भारत का भविष्य और सुरक्षित होगा.
प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्तमान पश्चिम एशिया संकट से दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाएं प्रभावित हैं और भारत पर इसका कम से कम प्रभाव हो, इसके लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं. मोदी ने कहा कि एक अंतर-मंत्रालयीन समूह इस संकट पर प्रतिदिन बैठक करता है और आयात-निर्यात में आने वाली दिक्कतों पर बात कर समाधान के लिए काम रहा है. उन्होंने कहा, “मुझे विश्वास है कि सरकार और उद्योगों के साझा प्रयासों से हम परिस्थितियों का बेहतर सामना कर पाएंगे.”
प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसे संकटों से देश के किसानों को बचाने के लिए सरकार ने पिछले एक दशक में कई कदम उठाए हैं जिनमें खाद की पर्याप्त उपलब्धता, यूरिया संयंत्र स्थापित किया जाना, डीएपी तथा एनपीके जैसी खादों का घरेलू उत्पादन बढ़ाना आदि शामिल हैं. उन्होंने कहा, “आज देश में किसानों ने अन्न भंडार भर रखे हैं. हमारे पास पर्याप्त खाद्यान्न हैं. प्रयास है कि खरीफ मौसम की सही से बुवाई हो.”
#WATCH | On the West Asia conflict, Prime Minister Narendra Modi says, ” … a major question is – what will be the impact of the war on agriculture? the farmers of our country have filled our grain reserves. therefore, india has adequate food stocks. it is also our endeavor that… pic.twitter.com/d2cGcxjpZx
— ANI (@ANI) March 23, 2026
मोदी ने कोरोना वायरस महामारी के समय का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार ने अतीत में भी दुनिया के संकटों का किसानों पर बोझ नहीं पड़ने दिया. उन्होंने कहा, “मैं देश के किसानों को विश्वास दिलाता हूं कि सरकार उनकी हरसंभव मदद करती रहेगी.” प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में आने वाले गर्मी के मौसम को देखते हुए बिजली की मांग बढ़ने की चुनौती रहेगी, लेकिन देश में फिलहाल सभी बिजली यंयंत्रों के लिए पर्याप्त कोयला भंडार पर्याप्त हैं. उन्होंने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में सरकार के कदमों ने भी उसकी तैयारियों में मदद की है.
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार ने भविष्य की तैयारी बढ़ाते हुए परमाणु ऊर्जा के उत्पादन को भी बढ़ावा दिया है. उन्होंने कहा, “जहां तक कूटनीति की बात है, भारत की भूमिका स्पष्ट है. शुरुआत से हमने इस संघर्ष को लेकर अपनी गहरी चिंता व्यत की है. मैंने स्वयं पश्चिम एशिया के संबंधित नेताओं से बात की है. उनसे तनाव कम करने और संघर्ष खत्म करने का आग्रह किया है.”
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने इस संघर्ष के समय नागरिकों और परिवहन मार्गों से जुड़े हमलों का विरोध किया है. उन्होंने कहा, “होर्मुज में रुकावट और व्यावसायिक जहाजों पर हमला अस्वीकार्य है. भारत इस हालात में युद्ध के माहौल में कूटनीति के जरिए भारतीय जहाजों के निरंतर आवागमन के लिए प्रयासरत है. भारत मानवता के हित में और शांति के पक्ष में हमेशा आवाज उठाता रहा है. मैं फिर कहूंगा कि इस समस्या का समाधान कूटनीति और बातचीत से ही संभव है.”
मोदी ने कहा, “इस युद्ध में किसी के भी जीवन पर संकट मानवता के हित में नहीं है. इसलिए भारत का प्रयास सभी पक्षों को जल्द से जल्द शांतिपूर्ण समाधानों के लिए प्रोत्साहित करने का है.” उन्होंने कहा कि कुछ तत्व ऐसे संकट में गलत फायदा उठाने का प्रयास करते हैं, इसलिए कानून व्यवस्था से जुड़ी सभी एजेंसियों को सतर्क रखा गया है.
पीएम मोदी ने कहा कि तटीय सुरक्षा, सीमा सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और रणनीतिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को और मजबूत किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि राज्य सरकारों से कालाबाजारी और जमाखोरी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने का आह्वान किया गया है. मोदी ने कहा, “देश की सभी राज्य सरकारें और नागरिक जब मिलकर चलेंगे तो हम हर चुनौती को चुनौती दे सकते हैं.”

