छत्तीसगढ़ में फिर बिगड़ा मौसम, रायपुर से बस्तर तक भारी बारिश; खारुन नदी उफान पर, गंगरेल के सभी गेट खुले

जगदलपुर में 246 MM बारिश, रायपुर में 69 MM; कई इलाकों में जलभराव, हाईवे और रेल यातायात भी प्रभावित

रायपुर। मानसून की विदाई से पहले छत्तीसगढ़ में एक बार फिर बारिश ने अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है। चक्रवात अर्नब के प्रभाव से प्रदेश के कई हिस्सों में लगातार तेज बारिश हो रही है। राजधानी रायपुर समेत मध्य और दक्षिण छत्तीसगढ़ के कई जिलों में बारिश से जनजीवन प्रभावित हुआ है।

मौसम विभाग ने रायपुर, बस्तर और दुर्ग संभाग के विभिन्न हिस्सों में भारी बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया है। लगातार हो रही बारिश के कारण नदी-नालों का जलस्तर बढ़ रहा है, जबकि कई निचले इलाकों में पानी भरने की स्थिति बन गई है।

खारुन नदी का बढ़ा जलस्तर, महादेव घाट पुल पर आवाजाही बंद

राजधानी रायपुर में लगातार बारिश के बाद खारुन नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा है। महादेव घाट के पास नदी का पानी पुल के ऊपर से बहने लगा, जिसके बाद सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस मार्ग पर आवागमन रोकना पड़ा।

नदी के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी को देखते हुए आसपास के इलाकों में भी प्रशासन और स्थानीय स्तर पर निगरानी बढ़ाई गई है। बारिश जारी रहने पर स्थिति और बिगड़ने की आशंका के चलते लोगों को नदी और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी जा रही है।

रायपुर में 69 MM, जगदलपुर में 246 MM बारिश

प्रदेश के मध्य और दक्षिणी हिस्सों में पिछले 24 घंटे के दौरान भारी बारिश दर्ज की गई। रायपुर में 69 MM बारिश रिकॉर्ड हुई, जबकि जगदलपुर में 246 MM बारिश दर्ज की गई।

बस्तर में भारी बारिश के कारण नदी-नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ा है। कई स्थानों पर जलभराव की स्थिति पैदा हो गई है। खराब मौसम और लगातार बारिश के कारण उपमुख्यमंत्री अरुण साव का कांकेर दौरा भी रद्द किए जाने की जानकारी सामने आई है।

28 साल बाद गंगरेल डैम के सभी 14 गेट खोले गए

लगातार बारिश का असर जलाशयों पर भी पड़ा है। धमतरी जिले में स्थित गंगरेल डैम का जलस्तर बढ़ने के बाद बांध के सभी 14 गेट करीब 28 साल बाद खोले गए हैं।

जानकारी के मुताबिक बांध से करीब 2.5 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। बड़ी मात्रा में पानी छोड़े जाने के बाद डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों में प्रशासन की निगरानी बढ़ गई है और नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है।

बस्तर में कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात

दक्षिण छत्तीसगढ़ में बारिश का असर सबसे ज्यादा दिखाई दे रहा है। इंद्रावती नदी पर बने खातीगुड़ा डैम और सहायक नदी मुरान से जुड़े बांध के गेट खोले जाने के बाद आसपास के क्षेत्रों में पानी का दबाव बढ़ा है।

बताया जा रहा है कि बस्तर क्षेत्र में करीब 300 गांव बाढ़ के पानी से घिर गए हैं। लगातार बारिश और बढ़ते जलस्तर के कारण ग्रामीण इलाकों में आवागमन और सामान्य गतिविधियां प्रभावित हुई हैं।

हाईवे पर भी बारिश की मार

भारी बारिश के कारण सड़क यातायात भी प्रभावित हुआ है। नेशनल हाईवे-30 पर रायपुर-कोंटा मार्ग के कई हिस्सों में आवागमन बाधित होने की खबर है। इसी तरह NH-63 पर जगदलपुर-बीजापुर-भोपालपट्टनम मार्ग भी बारिश के कारण प्रभावित हुआ है।

जलभराव और खराब सड़क परिस्थितियों के चलते इन मार्गों पर यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लगातार बारिश के बीच प्रशासन और संबंधित विभागों की ओर से स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

किरंदुल-कोत्तावालसा रेल लाइन पर लैंडस्लाइड

बारिश का असर रेल यातायात पर भी पड़ा है। किरंदुल-कोत्तावालसा रेल लाइन पर चार अलग-अलग स्थानों पर लैंडस्लाइड होने की जानकारी सामने आई है। भूस्खलन के कारण रेलवे ट्रैक को नुकसान पहुंचा है, जिससे रेल परिचालन प्रभावित हुआ है।

पहाड़ी और वन क्षेत्रों में लगातार बारिश के चलते भूस्खलन का खतरा बना हुआ है। रेलवे की ओर से ट्रैक की स्थिति की निगरानी और आवश्यक सुधार कार्य किए जा रहे हैं।

मौसम को लेकर सतर्क रहने की जरूरत

मानसून की विदाई के दौर में अचानक सक्रिय हुए बारिश के इस सिस्टम ने प्रदेश के कई हिस्सों में चिंता बढ़ा दी है। नदी-नालों और बांधों का जलस्तर बढ़ने के साथ ही निचले इलाकों में जलभराव और बाढ़ का खतरा भी बढ़ गया है।

ऐसे में नदी किनारे और जलभराव वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। सड़क या रेल मार्ग से यात्रा करने वालों को भी मौसम और संबंधित विभागों की ओर से जारी ताजा जानकारी लेने के बाद ही यात्रा करने की सलाह दी जा रही है।

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