270 दिन जेल में रहने के बाद POCSO मामले में विजय नाथ बरी, एडवोकेट प्रशांत मिश्रा ने की निःशुल्क पैरवी

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आर्थिक रूप से कमजोर आरोपी की अदालत में की पैरवी, पुलिस विवेचना की खामियों और साक्ष्यों में विरोधाभास को बनाया आधार

कानपुर नगर। POCSO एक्ट से जुड़े एक मामले में करीब नौ महीने तक जेल में रहने के बाद विजय नाथ को अदालत से राहत मिली है। विशेष न्यायाधीश (POCSO एक्ट), कोर्ट संख्या-20, पवन कुमार राय की अदालत ने मामले में उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के परीक्षण के बाद विजय नाथ को बरी करने का आदेश दिया। मामले में एडवोकेट प्रशांत मिश्रा ने आरोपी की ओर से निःशुल्क पैरवी की।

आर्थिक परेशानी के चलते नहीं उठा पा रहे थे वकील का खर्च

मामला अपराध संख्या 74/2023 से संबंधित बताया गया है। जानकारी के अनुसार विजय नाथ की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वह लंबे समय तक मुकदमे की प्रभावी पैरवी के लिए निजी अधिवक्ता का खर्च उठाने की स्थिति में नहीं थे। ऐसे में नेशनल मीडिया प्रेस क्लब अधिवक्ता मोर्चा के जिलाध्यक्ष एडवोकेट प्रशांत मिश्रा ने बिना फीस लिए मामले की पैरवी करने की जिम्मेदारी संभाली।

केस की पड़ताल में सामने आईं कई विसंगतियां

एडवोकेट प्रशांत मिश्रा ने केस डायरी, दस्तावेजों और गवाहों के बयानों का अध्ययन किया। बचाव पक्ष की ओर से अदालत में पुलिस विवेचना से जुड़ी कथित कमियों और बयानों में सामने आए विरोधाभासों को प्रमुखता से रखा गया।

अदालत में साक्ष्यों और गवाहों के परीक्षण के दौरान अभियोजन पक्ष के दावों पर भी न्यायालय ने विचार किया। उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर अदालत ने विजय नाथ को मामले में बरी करने का आदेश दिया।

फैसले के बाद कानूनी जगत में चर्चा

करीब 270 दिन जेल में रहने के बाद आरोपी को अदालत से मिली राहत के बाद मामले की चर्चा कानूनी क्षेत्र में भी हुई। इस प्रकरण ने एक बार फिर यह तथ्य सामने रखा कि किसी मामले में पुलिस की विवेचना और चार्जशीट के बाद अंतिम निर्णय न्यायालय में प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर होता है।

निःशुल्क पैरवी की हुई सराहना

आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्ति की बिना फीस पैरवी करने के लिए नेशनल मीडिया प्रेस क्लब के पदाधिकारियों और सदस्यों ने एडवोकेट प्रशांत मिश्रा की सराहना की। इस दौरान द लॉयर्स एसोसिएशन के कार्यकारिणी सदस्य एडवोकेट अवधेश सिंह तोमर और एडवोकेट धनराज सिंह चौहान ने भी उन्हें बधाई दी।

एडवोकेट मोर्चा की ओर से कहा गया कि आर्थिक स्थिति किसी व्यक्ति को न्याय पाने से वंचित नहीं कर सकती और जरूरतमंद लोगों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराना अधिवक्ताओं की महत्वपूर्ण सामाजिक जिम्मेदारी है।

अभिषेक कुमार पाण्डेय
रिपोर्टर, बिलासपुर, छत्तीसगढ़

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