मत्स्य पालन क्षेत्र को मिली अब तक की सबसे बड़ी बजटीय सहायता
केंद्र सरकार ने बजट 2026-27 में मत्स्य पालन क्षेत्र को बड़ी सौगात देते हुए 2,761.80 करोड़ रुपए की रिकॉर्ड वार्षिक सहायता प्रस्तावित की है। इसमें से 2,500 करोड़ रुपए प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के लिए निर्धारित किए गए हैं, जो इस क्षेत्र के विकास का मुख्य आधार बनी हुई है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत का मत्स्य पालन क्षेत्र तेजी से आर्थिक मजबूती का स्तंभ बनता जा रहा है और उत्पादन से लेकर निर्यात तक हर स्तर पर उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
भारत बना दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश
भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश बन चुका है और वैश्विक उत्पादन में लगभग 8 प्रतिशत योगदान दे रहा है।
- 2013-14 में उत्पादन: 95.79 लाख टन
- 2024-25 में उत्पादन: 197.75 लाख टन
➡️ यानी 106 प्रतिशत की ऐतिहासिक वृद्धि
समुद्री निर्यात में तेजी, झींगा बना प्रमुख उत्पाद
देश का समुद्री खाद्य निर्यात भी लगातार बढ़ रहा है। वित्त वर्ष 2024-25 में यह बढ़कर 62,408 करोड़ रुपए तक पहुंच गया।
फ्रोजन श्रिम्प (झींगा) भारत का सबसे प्रमुख निर्यात उत्पाद बना हुआ है, जिसकी मांग अमेरिका और चीन जैसे बड़े बाजारों में बनी हुई है।
रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बड़ा सहारा
मत्स्य पालन क्षेत्र अब ग्रामीण और तटीय अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार बन चुका है।
- कृषि GVA में योगदान: 7.43 प्रतिशत (सबसे अधिक)
- 74.66 लाख रोजगार सृजित (प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष)
- 4.39 लाख मछुआरों को किसान क्रेडिट कार्ड
- 33 लाख से अधिक लोगों को बीमा कवरेज
- 7.44 लाख परिवारों को आजीविका सहायता
नीली क्रांति और PMMSY से बदला स्वरूप
2015 की नीली क्रांति और 2020 में शुरू हुई प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना ने इस क्षेत्र को नई दिशा दी है। इन योजनाओं के जरिए उत्पादन, बुनियादी ढांचे और मूल्य श्रृंखला में बड़े सुधार देखने को मिले हैं।
आधुनिक तकनीक और इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर
सरकार अब इस सेक्टर में आधुनिक तकनीक को बढ़ावा दे रही है—
- हजारों तालाब और जलाशय विकसित
- 52,058 जलाशय पिंजरे स्वीकृत
- 27,189 मछली परिवहन इकाइयां
- आरएएस और बायो-फ्लॉक इकाइयों में बड़े निवेश
- कोल्ड चेन और प्रोसेसिंग नेटवर्क का विस्तार
