टीआरएन एनर्जी किसानों के लिए वरदान नहीं क्षेत्र के लिए बना अभिशाप

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फ्लाईएश का काला साम्राज्य किसानों की जमीन और सड़कों पर बिछ रही मौत की चादर

कुड़ेकेला:- विकास की चमक के पीछे विनाश का काला धुआं क्षेत्र के जनजीवन को निगलने पर आमादा है। बात की जा रही टीआरएन एनर्जी पावर लिमिटेड भेंगारी की जो वर्षों से स्थानीय ग्रामीणों और किसानों के लिए किसी अभिशाप से कम साबित नहीं हो रहा। सालों से इस प्लांट के प्रदूषण ने न केवल उपजाऊ खेती को बंजर किया है बल्कि जीव-जंतुओं और इंसानी फेफड़ों में भी जहर घोलने का काम किया है। क्षेत्र के ग्रमीण प्रबंधन के लचर रवैये से तंग आकर व  फ्लाईएश के बेतरतीब निपटान के विरोध में कई बारआंदोलन कर प्लांट के कार्य को भी प्रभावित कर चुके हैं।

लेकिन प्रबंधन ने सबक सीखने के बजाय अब दमन का नया रास्ता चुन लिया है। प्लांट अब फ्लाईएश निपटान का विस्तार करते हुए उसे कोसों दूर किसानों की निजी जमीनों और राजस्व भूमि में डंप कर रहा है। हरे-भरे खेत अब काले मरुस्थल में तब्दील होते जा रहे हैं, लेकिन शासन-प्रशासन मौन साधे बैठा है।प्लांट से फ्लाईएश बाहर निकालने के खेल में ट्रांसपोर्टरों के बीच ऐसी होड़ लगी है कि नियम-कायदे धूल में उड़ रहे हैं।

प्लान्ट प्रबन्धन ट्रांसपोर्टर और वाहन मालिक के मिलीभगत पर गाड़ियों में क्षमता से अधिक माल लोड कर रहे हैं। सड़कों पर गिरती फ्लाईएश से दोपहिया वाहन चालक फिसल रहे हैं।भारी वाहनों के दबाव से घरघोड़ा, छाल और हाटी मार्ग की दशा किसी से छिपी नहीं है।

धृतराष्ट्र बना पर्यावरण विभागविभाग ।-पर्यावरण विभाग को मामले की मौखिक शिकायत लोगों द्वारा कई बार किया जा चुका है किन्तु वहीँ हैरानी की बात यह है कि इस पूरी रेलमपेल और नियम विरुद्ध परिवहन पर पर्यावरण विभाग ने धृतराष्ट्र की भूमिका अपना ली है। शिकायतों का अंबार लगने के बावजूदऑफिस के मेज पर बैठे अधिकारी जिला में ही फ्लाइएस के इस काले खेल का प्रमाण शिकायत कर्ता से मांग कानून के लम्बे फजीहत का जिक्र कर शिकायत पर कानूनी मिट्टी डाल दबा दिया जाता है।और विभाग इस मामले में।अपनी आंखें बंद कर रखी है क्या विभाग की यह चुप्पी किसी बड़े वरदान या सांठगांठ का हिस्सा है घरघोड़ा से छाल और छाल से हाटी के बीच सैकड़ों वाहन खुलेआम नियमों को ताक पर रखकर दौड़ रहे हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर शून्य है।

सत्ता के गलियारों में गूंज, मगर धरातल पर सन्नाटा
विधानसभा में इस मुद्दे पर उमेश पटेल और ओपी चौधरी जैसे दिग्गज आमने-सामने आ चुके हैं। फ्लाईएश निपटान के मुद्दे पर जमकर बयानबाजी हुई, लेकिन हकीकत यह है कि सत्ता और विपक्ष की यह जंग केवल वातानुकूलित कमरों तक सीमित है। धरातल पर आज भी किसान राखड़ की धूल फांकने को मजबूर है और प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है।

धृतराष्ट्र बना पर्यावरण विभाग शिकायतों पर क्यों है चुप्पी –
पर्यावरण विभाग को मामले की मौखिक शिकायत लोगों द्वारा कई बार किया जा चुका हैकिन्तु हैरानी की बात यह है कि इस पूरी रेलमपेल और नियम विरुद्ध परिवहन पर पर्यावरण विभाग ने धृतराष्ट्र की भूमिका अपना ली है। शिकायतों का अंबार लगने के बावजूद विभाग ने अपनी आंखें बंद कर रखी हैं। क्या विभाग की यह चुप्पी किसी बड़े वरदान या सांठगांठ का हिस्सा है घरघोड़ा से छाल और छाल से हाटी के बीच सैकड़ों वाहन खुलेआम नियमों को ताक पर रखकर दौड़ रहे हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर शून्य है।

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