रामकथा में आज तीसरे दिन पूज्य महराज रविनंदन महराज (हरिद्वार )ने शिव बारात का कथन किया

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राम कथा का आयोजन सुंदरकांड सेवा समिति के द्वारा किया जा रहा हैं

कथा स्थल :- गजमोहनी परिसर, मंगला बिलासपुर में शाम 3 बजे से 7 बजे तक रखा गया हैं

कल चौथे दिन सोमवार को भगवान राम जन्मउत्स्व पर कथा होंगी

बिलासपुर :- आज राम कथा का तीसरा दिन था जिसमे भगवान शिव विवाह का परम्पू पूज्य गुरुदेव श्री रवि नंदन महराज के द्वारा गवान शिव और माता पार्वती का विवाह पर कथा की गई हिंदू धर्म की सबसे सुंदर और प्रेरणादायक कथाओं में से एक है। यह कथा प्रेम, तपस्या और समर्पण का प्रतीक है।

यहाँ इस दिव्य विवाह पर महराज रवि नंदन महराज ने कथा में बताया की माता पार्वती की कठिन तपस्या का जिक्र करते हुये कहा
सती के आत्मदाह के बाद, उन्होंने पर्वतराज हिमालय के घर पार्वती के रूप में जन्म लिया। बचपन से ही उनका मन शिव में रमा था। उन्हें पाने के लिए पार्वती ने अन्न-जल त्याग कर हजारों वर्षों तक घोर तपस्या की। उनकी भक्ति इतनी शक्तिपूर्ण थी कि देवलोक तक उनके तप की गूँज पहुँच गई।

तत्पश्चात महाराज जी ने भगवान शिव के द्वारा पार्वती माता की  परीक्षा का कथन बताया कि कैसे  शिव ने पार्वती की परीक्षा लेने के लिए सप्तऋषियों को भेजा और स्वयं भी एक ब्राह्मण का रूप धरकर उनके पास गए। उन्होंने शिव की बुराई की और पार्वती से कहा कि वे एक “भस्मधारी अघोरी” से विवाह क्यों करना चाहती हैं? लेकिन पार्वती अपने निश्चय पर अडिग रहीं। उनकी निष्ठा देखकर शिव अत्यंत प्रसन्न हुए और उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया।

पूज्य महराज श्री रवि नंदन महराज जी ने आगे कथा को बढ़ाते हुये भगवान शिव की बारात का अनोखा और आनंद मय कथा सुनाई और भगवान शिव की बारात के विवाह का दिन आया। शिवजी की बारात किसी सामान्य राजकुमार की बारात नहीं थी। उसमें देवता, गंधर्व, यक्षों के साथ-साथ भूत-प्रेत, पिशाच, डाकनी-शाकिनी और नंदी भी शामिल थे। शिव स्वयं नंदी पर सवार थे, शरीर पर भस्म लगी थी और गले में सर्पों का हार था।

श्री रवि नंदन महराज जी के द्वारा माता पार्वती जी की माता का भी कथा में सुनाया की वो प्रभु शिव को देखकर कैसे मूर्छत हुई
• मैना देवी का मूर्छित होना: जब पार्वती की माता मैना ने शिव के इस भयानक रूप को देखा, तो वे डरकर मूर्छित हो गईं और अपनी पुत्री का हाथ देने से मना कर दिया।

• चंद्रशेखर स्वरूप: माता पार्वती की प्रार्थना पर शिव ने एक अत्यंत सुंदर और मनमोहक रूप धारण किया। उनके मस्तक पर चंद्रमा और दिव्य वस्त्राभूषण देख हर कोई मंत्रमुग्ध हो गया।

कथा के अंतिम में महराज ने शिव विवाह कथा सम्पन्न का जिक्र किया हिमालय नगरी (हिमावत) में वेदों के मंत्रोच्चार के बीच भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह संपन्न हुआ। यह मिलन प्रकृति (पार्वती) और पुरुष (शिव) का मिलन था, जिसने संसार में संतुलन स्थापित किया। इसी दिन को हम हर वर्ष महाशिवरात्रि के रूप में मनाते हैं।

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