ज्ञानेश्वरी की सफलता से राज्य के युवा लेंगे प्रेरणा, खेलों के लिए तैयार होगा बेहतर माहौल : अरुण साव

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रिपोर्ट: अभिषेक कुमार पाण्डेय, जिला संवाददाता, बिलासपुर (छत्तीसगढ़)

उप मुख्यमंत्री ने रजत पदक विजेता ज्ञानेश्वरी यादव और उनके माता-पिता का किया सम्मान

रायपुर। उप मुख्यमंत्री एवं खेल एवं युवा कल्याण मंत्री अरुण साव ने ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेल 2026 में भारोत्तोलन की 53 किलोग्राम स्पर्धा में रजत पदक जीतने वाली राजनांदगांव की खिलाड़ी ज्ञानेश्वरी यादव का सम्मान किया। नवा रायपुर स्थित अपने निवास कार्यालय में आयोजित समारोह में उनके माता-पिता का भी सम्मान किया गया। इस अवसर पर खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सचिव यशवंत कुमार, संयुक्त संचालक प्रभाकर पाण्डेय, उप संचालक रश्मि ठाकुर, भारोत्तोलन संघ के पदाधिकारी एवं विभिन्न खेलों के खिलाड़ी उपस्थित रहे।

ज्ञानेश्वरी की उपलब्धि से खिलाड़ियों को मिलेगा नया उत्साह

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि ज्ञानेश्वरी यादव ने राष्ट्रमंडल खेलों में रजत पदक जीतकर छत्तीसगढ़ और देश का गौरव बढ़ाया है। उनकी इस सफलता से प्रदेश में खेलों के प्रति सकारात्मक माहौल बनेगा और युवा खिलाड़ी राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित होंगे। उन्होंने ज्ञानेश्वरी के माता-पिता के योगदान की भी सराहना करते हुए उन्हें सम्मानित किया।

खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए सरकार कर रही लगातार प्रयास

अरुण साव ने कहा कि राज्य सरकार खेल और खिलाड़ियों के विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है। बस्तर ओलंपिक, सरगुजा ओलंपिक, स्पोर्ट्स कॉन्क्लेव जैसे आयोजनों के साथ खेल अलंकरण और उत्कृष्ट खिलाड़ियों के सम्मान की परंपरा को फिर शुरू किया गया है। साथ ही खेल अधोसंरचना को मजबूत कर प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा रहा है।

विश्व चैंपियनशिप के अनुभव ने बढ़ाया आत्मविश्वास

ज्ञानेश्वरी यादव ने प्रेस वार्ता में कहा कि विश्व चैंपियनशिप में पहली बार खेलने के दौरान काफी दबाव महसूस हुआ, लेकिन उसी अनुभव ने उन्हें बड़े मुकाबलों के लिए मानसिक रूप से मजबूत बनाया। उन्होंने कहा कि अब हर प्रतियोगिता में उनका लक्ष्य अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन देना होता है।

पिता का सपना बना सफलता की सबसे बड़ी प्रेरणा

ज्ञानेश्वरी ने अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए बताया कि उनके पिता साइकिल से उन्हें जिम तक लेकर जाते थे और हमेशा भारत के लिए खेलने का सपना दिखाते थे। उन्होंने कहा कि पिता के त्याग, मेहनत और समर्पण ने ही उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया। परिवार के सहयोग और कठिन परिस्थितियों से मिले अनुभवों ने उन्हें मजबूत खिलाड़ी बनने में अहम भूमिका निभाई।

हर चुनौती ने बनाया और मजबूत

ज्ञानेश्वरी यादव ने कहा कि जीवन की हर कठिनाई ने उन्हें आगे बढ़ने की सीख दी। उन्होंने कहा कि संघर्ष और लगातार मेहनत की बदौलत ही वह अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का प्रतिनिधित्व कर सकीं और आगे भी भारत के लिए पदक जीतने का प्रयास जारी रखेंगी।

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