मकान और 15 दुकानों को “खाली जमीन” दिखाकर रजिस्ट्री का आरोप, पीड़ित की गुहार—शिकायतों के बाद भी नहीं मिल रहा न्याय
सूरजपुर कौशलेन्द्र यादव । जिले में फर्जी रजिस्ट्री और जमीन माफियाओं का खेल लगातार बढ़ता जा रहा है। ताजा मामला मानपुर क्षेत्र से सामने आया है, जहां 76 वर्षीय वृद्ध रामचरित्र साहू ने अपनी ही पुत्रियों सहित अन्य लोगों पर मिलीभगत कर संपत्ति हड़पने का गंभीर आरोप लगाया है। लगातार शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं होने से प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल उठने लगे हैं।
प्रार्थी के अनुसार, ग्राम मानपुर स्थित उनकी स्वामित्व की भूमि खसरा नंबर 131/1, 131/2, 132/1, 132/7 रकबा क्रमशः 0.097, 0.045, 0.0122, 0.120 हेक्टेयर (कुल रकबा 0.384 हेक्टेयर) मुख्य सड़क किनारे स्थित है। इस जमीन पर वर्षों से उनका मकान बना हुआ है, जहां वे अपने परिवार के साथ निवास करते हैं। साथ ही, भूमि के एक हिस्से पर लगभग 15 दुकानें निर्मित हैं, जो किराये पर दी गई हैं और उनकी जीविका का प्रमुख साधन हैं।
निर्माण को छुपाकर रजिस्ट्री—गंभीर आरोप
आरोप है कि उनकी पुत्रियां—संगीता साहू, सीता साहू, सविता साहू और सुनीता साहू—ने सुनियोजित तरीके से उप पंजीयक कार्यालय सूरजपुर में उक्त भूमि की फर्जी रजिस्ट्री करवा ली। रजिस्ट्री दस्तावेज में जमीन को बिना किसी निर्माण के “खाली” दर्शाया गया, जबकि मौके पर मकान और दुकानें पहले से मौजूद हैं।
बताया जा रहा है कि इसी भूमि के कुछ हिस्से को राजेश साहू और राधाकृष्ण साहू को बेचने का मामला भी सामने आया है, जिससे संगठित रूप से जमीन हड़पने की आशंका और गहरा गई है।
लगातार शिकायत, फिर भी न्याय नहीं
बताया जाता है कि पीड़ित वृद्ध द्वारा इस पूरे मामले को लेकर लगातार प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस में शिकायत की जा रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है। इससे यह सवाल खड़ा हो रहा है कि आखिर पीड़ित को न्याय कब मिलेगा?
रजिस्ट्रार कार्यालय पर फिर उठे सवाल
सूरजपुर के उप पंजीयक (रजिस्ट्रार) कार्यालय की कार्यप्रणाली पर पहले भी कई बार सवाल उठ चुके हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि फर्जी रजिस्ट्री के कई मामलों में शिकायतें होने के बावजूद कार्रवाई नहीं की जाती, जिससे जमीन माफियाओं के हौसले लगातार बढ़ रहे हैं।
धमकी से सहमा वृद्ध
प्रार्थी ने यह भी आरोप लगाया है कि आरोपियों द्वारा उन्हें जान से मारने की धमकी दी जा रही है। इसके चलते वे भय के माहौल में जीने को मजबूर हैं और आवश्यक कार्य होने पर ही घर से बाहर निकलते हैं।
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल, कार्रवाई की मांग तेज
लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों के बावजूद प्रशासन की निष्क्रियता पर सवाल उठ रहे हैं। आमजन का कहना है कि यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो जिले में जमीन माफियाओं का जाल और फैल सकता है।
प्रार्थी ने पुलिस अधीक्षक से निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। वहीं लोगों ने भी मांग की है कि रजिस्ट्रार कार्यालय की भूमिका की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
अब सबकी नजर प्रशासन पर है—क्या इस बार पीड़ित को न्याय मिलेगा या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा?
