गुड़ेली टिमरलगा के नाम से खनिज विभाग चुप, दिख रहा क्रेशर माफियाओ राज
सारंगढ़ बिलाईगढ़ जिला के अंतर्गत आने वाला ग्राम पंचायत गुड़ेली टिमरलगा जहां अवैध क्रेशर बंद होने के नाम ही नहीं ले रहा है और न ही खनिज विभाग द्वारा कोई कार्रवाई किया जा रहा, एक तरफ छत्तीसगढ़ शासन के निर्देश दूसरी तरफ सारंगढ़ जिला के खनिज विभाग दोनों में जमीन आसमान का फर्क है। देखा जा रहा है कि मां शारदा मिनरल्स और मंगल क्रशर उद्योग के संचालकों द्वारा लगातार खनिज एवं पर्यावरण के नियम को उल्लंघन करते हुए अपने दबंगाई अंदाज से क्रेशर संचालित कर रहे हैं वही बात की जाए खनिज निर्धारित नियमों को तो यहां कोई भी भंडारण क्रेशर केवल लीज के सहमति से चूना पत्थर खरीद सकता है लेकिन यहां तो सब हवा में खनिज विभाग बिना कोई जांच के भण्डारण क्रेशर संचालकों पर खटाखट रॉयल्टी पर्ची जारी किये जा रहे हैं, केवल कागजों पर लीज के सहमति ली जा रही हैं। फिर अवैध खनन माफियाओं से अवैध तरीके से पत्थर खरीद कर अपना क्रेशर संचालित कर रहे हैं। जिससे कि खनिज नियमों का घोर उल्लंघन किया जा, लेकिन इस विषय पर जिला खनिज विभाग द्वारा कोई गंभीरता दिखाई नहीं दे रहा फिलहाल खनिज विभाग तो रात दिन केवल गाड़ी पकड़ने में बिजी है। क्या ये जिला खनिज अधिकारी को जानकारी नहीं है या फिर क्रेशर माफियाओं का दबदबा है।

एक नजर अब जिला अधिकारी पर, अवैध क्रेशर से राजस्व को लाखों करोड़ों रूपये चूना
सारंगढ़ बिलाईगढ़ जिला के ग्राम पंचायत गुड़ेली टिमरलगा लाइमस्टोन क्रशर प्लांट अवैध खनन का सबसे बड़ा ठिकाना बन गया है बिना रॉयल्टी पर्ची के पत्थर खरीदना और रात दिन डंपर से परिवहन करना अब बात हो गई है। हर महीने करोड़ का राजस्व का नुकसान हो रहा है और DMF फंड का पैसा खनन प्रभावित गांवों तक नहीं पहुंच रहा। विभाग और क्रेशर मालिक की मिली भगत से आज राजस्व के लाखों करोड़ों रुपए खनन माफिया और भ्रष्टाचारियों के जेब में जा रहे हैं। अवैध पत्थर खरीदने का मुख्य कारण यह भी बताया जा रहा है कि सरकार के निर्धारित मूल्य से कई गुना नीचे दामों पर अवैध पत्थर मिल जा रहा जिससे कि अवैध क्रेशर संचालकों को काफी मुनाफा हो रहा है।


