लकड़ी माफिया का आतंक: फर्जी हस्ताक्षर से चल रहा तस्करी का खेल, प्रशासन बेबस!

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एसडीएम के नाम पर फर्जी अनुज्ञा पत्र जारी कर काटी और ढोई जा रही लकड़ी

शिकायत के बाद हरकत में आया प्रशासन, तीन आरोपी गिरफ्तार

सवालों के घेरे में वन विभाग और राजस्व अमला

सूरजपुर @कौशलेन्द्र यादव । जिले में लकड़ी माफिया का आतंक इस कदर बढ़ चुका है कि अब तस्कर खुलेआम प्रशासनिक व्यवस्था को ठेंगा दिखा रहे हैं। ताजा मामले में माफियाओं ने एसडीएम के फर्जी हस्ताक्षर से अनुज्ञा पत्र तैयार कर नीलगिरी लकड़ी की कटाई और परिवहन का खेल संचालित किया। मामला सामने आने के बाद प्रशासन हरकत में जरूर आया, लेकिन यह भी साफ हो गया कि लंबे समय से यह अवैध कारोबार प्रशासन की नाक के नीचे फल-फूल रहा था।

जिला मुख्यालय से लगे तिलसिंवा, पचिरा और लटोरी क्षेत्र में नीलगिरी लकड़ी की अवैध कटाई और भंडारण बड़े पैमाने पर जारी है। दिन-रात ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के जरिए लकड़ी ढुलाई हो रही है, लेकिन जिम्मेदार विभाग आंख मूंदे बैठे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई बार शिकायत के बावजूद न तो जांच हुई और न ही कार्रवाई।

स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि ओवरलोड लकड़ी से भरे वाहन बस्तियों और मुख्य सड़कों से बेखौफ गुजर रहे हैं, जिससे हादसों का खतरा लगातार बना हुआ है। हाल ही में ऐसे ही एक ट्रैक्टर-ट्रॉली की चपेट में आकर एक शिक्षिका की मौत हो चुकी है, जबकि एक मजदूर भी जान गंवा चुका है।

फर्जीवाड़े का पर्दाफाश ऐसे हुआ

रामानुजनगर में जांच के दौरान एक लकड़ी से लदे ट्रक (CG 12 BB 1429) को रोका गया। चालक द्वारा प्रस्तुत अनुज्ञा पत्र पर संदेह होने पर जब जांच कराई गई, तो एसडीएम के हस्ताक्षर फर्जी पाए गए। बताया गया कि ट्रक में करीब 15 टन नीलगिरी लकड़ी रायपुर भेजी जा रही थी।
फर्जी दस्तावेज में लटोरी-कसकेला क्षेत्र के एक ग्रामीण के घर से 60 नग लकड़ी काटने की अनुमति दर्शाई गई थी, जो पूरी तरह झूठी निकली।

मजबूरी में हुई कार्रवाई

मामले के उजागर होने के बाद एसडीएम की शिकायत पर कोतवाली पुलिस ने बीएनएस की धारा 318(4), 338, 336, 340 व 3(5) के तहत अपराध दर्ज कर आजम खान, बृज नारायण साहू और राजेश यादव को गिरफ्तार किया है।

बड़ा सवाल – आखिर कब तक?

इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासनिक व्यवस्था की पोल खोल दी है। सवाल यह है कि जब खुलेआम लकड़ी की कटाई, भंडारण और परिवहन हो रहा था, तब जिम्मेदार विभाग क्या कर रहे थे?
लकड़ी माफिया के बढ़ते हौसले इस बात का संकेत हैं कि कहीं न कहीं सिस्टम की ढिलाई या मिलीभगत से इनका मनोबल बढ़ रहा है। अब जरूरत है सख्त और लगातार कार्रवाई की, ताकि इस अवैध नेटवर्क को जड़ से खत्म किया जा सके।

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