बिना विभागीय अनुमति शिक्षक ने खरीदी एकड़ से अधिक जमीन, सरकारी रिकॉर्ड में छेड़छाड़ के आरोप से बढ़ा विवाद

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सूरजपुर के कुसमुसी गांव का मामला, शिक्षक ने अनुमति नहीं लेने की बात स्वीकारी; राजस्व रिकॉर्ड की जांच की मांग

सूरजपुर। भैयाथान विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत कुसमुसी में शासकीय सेवा में पदस्थ एक शिक्षक द्वारा विभागीय अनुमति के बिना एक एकड़ से अधिक जमीन खरीदे जाने का मामला सामने आया है। संबंधित शिक्षक की पदस्थापना शासकीय हाई स्कूल केवरा में बताई जा रही है। मामले में जमीन की खरीद के साथ-साथ राजस्व रिकॉर्ड में कथित छेड़छाड़ के आरोप भी लगाए गए हैं।

विभागीय अनुमति से जुड़ा दस्तावेज नहीं होने का दावा

प्राप्त जानकारी के अनुसार, शासकीय कर्मचारी द्वारा संपत्ति खरीदने के मामले में विभागीय स्तर पर अनुमति अथवा सूचना से संबंधित प्रक्रिया का पालन किया जाना आवश्यक होता है। इस मामले में शिक्षा विभाग की ओर से बताया गया है कि संबंधित जमीन की खरीद के लिए विभागीय अनुमति से जुड़ा कोई दस्तावेज उनके समक्ष प्रस्तुत नहीं किया गया है।

मामले को लेकर शिक्षक से विभागीय अनुमति के संबंध में जानकारी ली गई तो उन्होंने अनुमति नहीं लिए जाने की बात स्वीकार की।

शिक्षक ने कहा—इंटरनेट पर जानकारी देखने के बाद नहीं ली अनुमति

संबंधित शिक्षक देव चरण से जब इस संबंध में बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि उन्होंने जमीन खरीदने से पहले विभागीय अनुमति नहीं ली थी। उनका कहना था कि उन्होंने इंटरनेट पर इस संबंध में जानकारी सर्च की थी और उसी आधार पर उन्हें विभाग से अलग से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं लगी।

शिक्षक के अनुसार, उन्होंने इस विषय में विभाग के संबंधित अधिकारियों से भी पहले जानकारी नहीं ली थी।

‘छोटे झाड़ के जंगल’ मद की जमीन होने का आरोप

मामले का दूसरा पहलू जमीन के राजस्व रिकॉर्ड से जुड़ा हुआ है। आरोप लगाया जा रहा है कि खरीदी गई जमीन ‘छोटे झाड़ के जंगल’ मद में दर्ज शासकीय भूमि से संबंधित है और रिकॉर्ड में कथित तौर पर बदलाव अथवा छेड़छाड़ के बाद इसकी रजिस्ट्री कराई गई।

हालांकि, राजस्व रिकॉर्ड में हेरफेर किए जाने के आरोपों की फिलहाल आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। यह स्पष्ट होना जांच के बाद ही संभव होगा कि संबंधित भूमि की वास्तविक स्थिति क्या थी और रजिस्ट्री से पहले राजस्व अभिलेखों में किसी प्रकार का परिवर्तन किया गया था या नहीं।

जांच के बाद सामने आएगी वास्तविक स्थिति

एक ओर शिक्षक द्वारा विभागीय अनुमति नहीं लेने की बात सामने आई है, वहीं दूसरी ओर जमीन के शासकीय मद में दर्ज होने और रिकॉर्ड में कथित छेड़छाड़ के आरोपों ने मामले को गंभीर बना दिया है। अब संबंधित विभाग और राजस्व अधिकारियों की जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि जमीन की खरीद प्रक्रिया नियमों के अनुरूप हुई थी या नहीं।

मामले में निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है, ताकि जमीन के स्वामित्व, राजस्व रिकॉर्ड, रजिस्ट्री प्रक्रिया और विभागीय नियमों के पालन से जुड़े सभी तथ्यों की स्थिति स्पष्ट हो सके।

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