बिलासपुर प्रेस क्लब में केंद्रीय राज्यमंत्री की दो टूक—सामाजिक भेदभाव समाप्त हो, सभी वर्गों को मिले समान अवसर; छत्तीसगढ़ में RPI विस्तार और भाजपा के साथ गठबंधन पर भी खुलकर रखी बात
बिलासपुर प्रेस क्लब में अठावले ने की पत्रकार वार्ता
बिलासपुर। रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (अठावले) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता तथा दिव्यांगजन सशक्तिकरण राज्यमंत्री रामदास अठावले बुधवार को बिलासपुर पहुंचे। बिलासपुर प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता में उन्होंने आरक्षण, जातीय जनगणना, सामाजिक समानता, महिला आरक्षण, निजी क्षेत्र में आरक्षण, रोजगार, छत्तीसगढ़ में RPI के विस्तार और आगामी चुनावी रणनीति सहित विभिन्न मुद्दों पर अपनी बात रखी।
केंद्र सरकार के विकास कार्यों का किया उल्लेख
रामदास अठावले ने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार के कार्यकाल में देश में विकास की गति तेज हुई है। उन्होंने विशेष रूप से सड़क और राष्ट्रीय राजमार्गों के विस्तार का उल्लेख करते हुए कहा कि नितिन गडकरी के नेतृत्व में देशभर में राष्ट्रीय राजमार्गों का नेटवर्क मजबूत हुआ है। उनके मुताबिक बेहतर कनेक्टिविटी व्यापार, उद्योग और आम लोगों की आवाजाही के लिए महत्वपूर्ण है।
सामाजिक न्याय मंत्रालय की योजनाओं पर जोर
अठावले ने सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि मंत्रालय अनुसूचित जाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, डीएनटी, वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजनों, ट्रांसजेंडर, अनाथ बच्चों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों सहित विभिन्न वर्गों के लिए काम कर रहा है।
आरक्षण का विरोध नहीं, सामाजिक न्याय को समझने की जरूरत
आरक्षण के मुद्दे पर अठावले ने कहा कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति को अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन आरक्षण का अनावश्यक विरोध उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक रूप से वंचित समाज को मुख्यधारा में लाने के लिए संविधान में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए प्रावधान किए गए हैं। उन्होंने OBC आरक्षण को भी सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों को प्रतिनिधित्व देने के लिए महत्वपूर्ण बताया।
‘जातिवाद खत्म हो तो आरक्षण पर विचार संभव’
आरक्षण को लेकर पूछे गए सवाल पर रामदास अठावले ने कहा कि देश में सामाजिक परिवर्तन जरूर हुआ है, लेकिन जातिवाद पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। उनके अनुसार शहरों में परिस्थितियों में बदलाव दिखाई देता है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में दलितों और आदिवासियों के साथ भेदभाव और अत्याचार की घटनाएं सामने आती हैं।
अठावले ने कहा कि यदि जातिगत भेदभाव पूरी तरह समाप्त हो जाए और समाज में वास्तविक समानता स्थापित हो जाए तो भविष्य में आरक्षण की आवश्यकता पर विचार किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य समाज के सभी वर्गों को समान अधिकार और अवसर दिलाना है। Aarakshan aur samajik samanata के मुद्दे पर उन्होंने सामाजिक भेदभाव खत्म करने को महत्वपूर्ण बताया।
जातीय जनगणना से सामने आएगी वास्तविक स्थिति
जातीय जनगणना के सवाल पर अठावले ने कहा कि इससे देश में विभिन्न जातियों की वास्तविक आबादी का आंकड़ा सामने आएगा। उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में प्रत्येक जाति की आबादी के अनुपात में प्रतिनिधित्व देने पर विचार होता है तो उस पर भी चर्चा की जा सकती है। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय का उद्देश्य किसी वर्ग को दूसरे वर्ग के खिलाफ खड़ा करना नहीं, बल्कि सभी को उचित अवसर देना होना चाहिए।
अंतरजातीय संबंधों से सामाजिक दूरी कम करने की बात
जातिगत समानता को लेकर अठावले ने कहा कि केवल राजनीतिक और सामाजिक समानता की बात करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि आपसी रिश्तों में भी बदलाव जरूरी है। उन्होंने अंतरजातीय विवाह और विभिन्न समाजों के बीच पारिवारिक एवं सामाजिक संबंधों का उल्लेख किया।
अपने निजी जीवन का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी ब्राह्मण समाज से हैं, जबकि वे स्वयं दलित समाज से आते हैं। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी में भी विभिन्न जाति और समाज के लोग साथ काम करते हैं। उनके अनुसार सभी समाजों को साथ लेकर चलना ही सामाजिक एकता का रास्ता है।
निजी क्षेत्र में आरक्षण को लेकर जताई चिंता
निजी क्षेत्र में आरक्षण के सवाल पर अठावले ने कहा कि सरकारी क्षेत्र में रोजगार के अवसर सीमित हो रहे हैं और कई संस्थान निजी क्षेत्र में जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी संस्थानों के निजी क्षेत्र में जाने के बाद वहां आरक्षण का प्रावधान उसी तरह लागू नहीं रहता। उन्होंने सरकारी और निजी क्षेत्र में रोजगार के अवसरों को लेकर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता बताई।
उन्होंने दलित, आदिवासी और पिछड़े वर्ग के युवाओं से कौशल विकास, उद्यमिता और MSME के क्षेत्र में आगे बढ़ने की अपील भी की।
महिला आरक्षण जल्द लागू करने की मांग
महिला आरक्षण के मुद्दे पर अठावले ने कहा कि उनकी पार्टी महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने की पक्षधर है। उन्होंने संसद और राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की जरूरत बताई तथा सभी राजनीतिक दलों से महिला आरक्षण से जुड़े प्रावधानों का समर्थन करने की अपील की।
उन्होंने डॉ. भीमराव अंबेडकर के महिला अधिकारों से जुड़े प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि बाबा साहब महिलाओं को संपत्ति, शिक्षा और अन्य क्षेत्रों में समान अधिकार दिलाने के पक्षधर थे।
छत्तीसगढ़ में RPI का विस्तार करने का दावा
प्रेस कॉन्फ्रेंस में छत्तीसगढ़ में रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया के विस्तार का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। अठावले ने कहा कि छत्तीसगढ़ में उनकी पार्टी की पहले से मौजूदगी है, लेकिन संगठन को और मजबूत करने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि सतनामी, दलित, OBC, ब्राह्मण, वैश्य सहित सभी समाजों को साथ लेकर पार्टी का विस्तार करने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि आने वाले समय में RPI छत्तीसगढ़ में बड़ी राजनीतिक ताकत बन सकती है।
भाजपा से गठबंधन पर अठावले ने साफ किया रुख
आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा के साथ गठबंधन के सवाल पर अठावले ने कहा कि RPI वर्तमान में NDA का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि यदि भाजपा छत्तीसगढ़ में उनकी पार्टी को सीट देती है तो गठबंधन के तहत चुनाव लड़ने पर विचार किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि यदि भाजपा 4-5 सीटें देती है तो उस पर विचार किया जाएगा। वहीं पर्याप्त सीटें नहीं मिलने की स्थिति में RPI करीब 8 से 10 सीटों पर चुनाव लड़ने का प्रयास कर सकती है। उन्होंने बताया कि पिछले विधानसभा चुनाव में वे कई बार छत्तीसगढ़ आए थे और उनकी पार्टी ने कोई सीट नहीं लड़ी थी, बल्कि भाजपा के पक्ष में प्रचार किया था।
महाराष्ट्र की राजनीति पर भी रखी बात
महाराष्ट्र में RPI के विधायकों को लेकर पूछे गए सवाल पर अठावले ने कहा कि वर्तमान में उनकी पार्टी के विधायक नहीं हैं। उन्होंने अपने राजनीतिक सफर का उल्लेख करते हुए कहा कि वे पहले कांग्रेस के साथ रहे और बाद में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाले NDA के साथ आए।
अठावले ने कहा कि उनका राजनीतिक अनुभव रहा है कि वे जिस गठबंधन के साथ जाते हैं, वह सत्ता में आता है। उन्होंने कहा कि फिलहाल वे नरेंद्र मोदी के साथ हैं और केंद्र में NDA सरकार को लेकर उन्हें पूरा विश्वास है।
राहुल गांधी को लेकर भी किया राजनीतिक दावा
कांग्रेस नेता राहुल गांधी के राजनीतिक भविष्य को लेकर पूछे गए सवाल पर अठावले ने कहा कि उन्हें विपक्ष के नेता के रूप में अपनी भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री और सरकार की आलोचना करना विपक्ष का अधिकार है, लेकिन गलत आरोप लगाना उचित नहीं है।
अठावले ने दावा किया कि 2029 के लोकसभा चुनाव में भी नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में NDA की जीत होगी और राहुल गांधी के लिए प्रधानमंत्री बनना आसान नहीं होगा।
छत्तीसगढ़ को मंत्रालय की योजनाओं का अधिकतम लाभ दिलाने की बात
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से संभावित मुलाकात और छत्तीसगढ़ के लिए मिलने वाली सौगात को लेकर पूछे गए सवाल पर अठावले ने कहा कि उन्होंने अधिकारियों से चर्चा की है। उन्होंने सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के बजट से छत्तीसगढ़ को अधिकतम लाभ दिलाने का प्रयास करने की बात कही।
उन्होंने बिलासपुर, रायपुर, रायगढ़, दुर्ग, भिलाई और राजनांदगांव सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों से प्रस्ताव आने पर मंत्रालय की योजनाओं के माध्यम से सहायता उपलब्ध कराने की बात कही।
दिव्यांगों और वरिष्ठ नागरिकों की योजनाओं पर जोर
अठावले ने कहा कि दिव्यांगजनों के लिए मंत्रालय की योजनाओं के माध्यम से आवश्यक उपकरण और सहायता उपलब्ध कराई जाती है। वरिष्ठ नागरिकों के लिए भी केंद्र सरकार की योजनाओं का अधिकतम लाभ दिलाने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने छत्तीसगढ़ में इन योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के लिए अधिकारियों के साथ समन्वय की बात कही।
युवाओं से नौकरी के साथ उद्यमिता अपनाने की अपील
केंद्रीय राज्यमंत्री ने युवाओं से केवल सरकारी नौकरी के पीछे नहीं भागने और कौशल विकास के साथ MSME तथा स्वरोजगार के क्षेत्र में आगे बढ़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा दे रही है और उद्योग एवं व्यापार के नए अवसर तैयार किए जा रहे हैं।
उन्होंने दावा किया कि भारत की अर्थव्यवस्था आने वाले समय में और मजबूत होगी तथा देश जल्द ही दुनिया की शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होगा।
सामाजिक न्याय और राजनीतिक विस्तार पर फोकस
बिलासपुर प्रेस क्लब की पत्रकार वार्ता में रामदास अठावले ने आरक्षण, जातीय जनगणना, महिला आरक्षण, निजी क्षेत्र में आरक्षण, रोजगार, राहुल गांधी की राजनीति, भाजपा के साथ गठबंधन और छत्तीसगढ़ में RPI के विस्तार सहित कई मुद्दों पर पार्टी का पक्ष रखा। Aarakshan aur samajik samanata को लेकर उनका मुख्य जोर सामाजिक भेदभाव समाप्त करने और सभी वर्गों को समान अवसर देने पर रहा।
अभिषेक कुमार पाण्डेय, रिपोर्टर, बिलासपुर (छत्तीसगढ़)


