Surajpur Double Murder: दोहरे हत्याकांड में तीन दोषियों को फांसी, एक को उम्रकैद; टूटे पुलिस मनोबल के बीच साक्ष्य जुटाकर मजबूत हुई थी विवेचना

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Surajpur Double Murder Case: प्रधान आरक्षक की पत्नी और 11 वर्षीय बेटी की हत्या के मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट का फैसला, कुलदीप साहू, चंद्रकांत चौधरी और फूल सिंह उर्फ रिंकू को मृत्युदंड; आर्यन विश्वकर्मा उर्फ गोल्डी को आजीवन कारावास

सूरजपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित सूरजपुर दोहरे हत्याकांड में गुरुवार को फास्ट ट्रैक कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया। अदालत ने प्रधान आरक्षक की पत्नी और उनकी 11 वर्षीय बेटी की हत्या के मामले में दोषी ठहराए गए चार आरोपियों में से तीन को मृत्युदंड और एक को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। सरकारी अधिवक्ता के मुताबिक जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक कोर्ट) आनंद प्रकाश वारियाल ने कुलदीप साहू, चंद्रकांत चौधरी और फूल सिंह उर्फ रिंकू को मौत की सजा दी, जबकि आर्यन विश्वकर्मा उर्फ गोल्डी को उम्रकैद की सजा सुनाई।

Surajpur Murder Case: 13 अक्टूबर 2024 की रात हुई थी वारदात

यह मामला 13 अक्टूबर 2024 की रात का है। पुलिस के अनुसार प्रधान आरक्षक की पत्नी और उनकी नाबालिग बेटी की हत्या उनके घर में की गई थी। मामले की जांच के दौरान दुष्कर्म और POCSO से जुड़े तथ्य भी सामने आए थे। चार आरोपियों को 28 सितंबर 2026 को अदालत ने दोषी करार दिया था, जिसके बाद सजा के बिंदु पर सुनवाई के लिए 8 अक्टूबर की तारीख तय की गई थी।

Police Investigation: घटना के बाद बदला गया पुलिस नेतृत्व

इस जघन्य वारदात के बाद पूरे सूरजपुर में आक्रोश का माहौल बन गया था। पुलिस परिवार भी घटना से प्रभावित था और कानून-व्यवस्था के साथ आम लोगों का विश्वास बनाए रखना पुलिस के सामने बड़ी चुनौती थी।

उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार घटना के बाद तत्कालीन पुलिस नेतृत्व में बदलाव किया गया और प्रशांत ठाकुर को सूरजपुर पुलिस अधीक्षक की जिम्मेदारी दी गई। इसके बाद मामले की विवेचना और साक्ष्य संकलन पर विशेष जोर दिया गया।

Evidence Collection: गिरफ्तारी से आगे साक्ष्यों पर रहा फोकस

मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच को केवल आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रखा गया। घटनाक्रम से जुड़े परिस्थितिजन्य तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों को एकत्र कर अभियोजन के माध्यम से न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया।

पुलिस अधीक्षक के स्तर से मामले की विवेचना की प्रगति की लगातार समीक्षा किए जाने और जांच अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जाने की जानकारी सामने आई है। तत्कालीन कोतवाली प्रभारी विमलेश दुबे सहित विवेचना से जुड़े पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों ने भी जांच में भूमिका निभाई।

Fast Track Court Verdict: तीन को फांसी, एक को उम्रकैद

फास्ट ट्रैक कोर्ट ने कुलदीप साहू, चंद्रकांत चौधरी और फूल सिंह उर्फ रिंकू को मृत्युदंड की सजा सुनाई। वहीं आर्यन विश्वकर्मा उर्फ गोल्डी को आजीवन कारावास दिया गया।

मामले में दो अन्य आरोपियों को पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर दोषमुक्त किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।

Court Decision: लंबे इंतजार के बाद आया फैसला

28 सितंबर को चार आरोपियों को दोषी ठहराए जाने के बाद अदालत ने सजा का फैसला सुरक्षित रखा था। गुरुवार, 8 अक्टूबर को फास्ट ट्रैक कोर्ट ने सजा सुनाई। इस फैसले के साथ करीब दो साल पुराने इस चर्चित मामले की न्यायिक प्रक्रिया में महत्वपूर्ण पड़ाव आया है।

अदालत द्वारा सुनाई गई मृत्युदंड की सजा पर कानून के तहत आगे की न्यायिक प्रक्रिया लागू होगी। मृत्युदंड के मामलों में उच्च न्यायालय की पुष्टि आवश्यक होती है।

फैसले के बाद पुलिस परिवार और आमजन में संतोष

फैसले के बाद पुलिस परिवार और स्थानीय लोगों में संतोष का माहौल देखने को मिला। इस मामले में कठोर सजा सुनाए जाने को लेकर लोगों की नजर लंबे समय से अदालत के फैसले पर थी।

यह प्रकरण एक बार फिर यह रेखांकित करता है कि गंभीर अपराधों में साक्ष्य आधारित और प्रभावी विवेचना न्यायिक प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। सूरजपुर दोहरे हत्याकांड में करीब दो वर्ष बाद आया यह फैसला अब इस मामले की न्यायिक प्रक्रिया का अहम अध्याय बन गया है।

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