Raigarh Medical College में 8 किलो के विशाल ट्यूमर की सफल सर्जरी, 46 वर्षीय महिला को मिली नई जिंदगी

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24 सेंटीमीटर से ज्यादा आकार की थी गांठ, आंतों और मूत्रवाहिनी से चिपके होने के कारण ऑपरेशन था बेहद चुनौतीपूर्ण; विशेषज्ञ डॉक्टरों की संयुक्त टीम ने किया सफल उपचार

पेट में दर्द और सूजन के बाद सामने आया विशाल ट्यूमर

रायगढ़। Raigarh Medical College के चिकित्सकों ने एक बेहद जटिल सर्जरी को सफलतापूर्वक पूरा कर चिकित्सा क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। झलमला निवासी 46 वर्षीय चंपा यादव के पेट से लगभग 8 किलोग्राम वजनी विशाल ट्यूमर निकाला गया। करीब 24.2 × 23.1 × 17 सेंटीमीटर आकार की यह गांठ एक बड़े फुटबॉल के लगभग बराबर थी।

एक महीने से गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही थीं महिला

चंपा यादव करीब एक महीने से लगातार पेट दर्द, पेट में अत्यधिक सूजन और उल्टी जैसी गंभीर परेशानियों से जूझ रही थीं। 22 अगस्त को उनकी हालत बिगड़ने पर उन्हें श्री लखीराम अग्रवाल स्मृति शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं संबद्ध संत बाबा गुरु घासीदास जी स्मृति चिकित्सालय, रायगढ़ के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग में आपात स्थिति में भर्ती कराया गया।

अस्पताल पहुंचने पर नाजुक थी मरीज की स्थिति

अस्पताल में प्रारंभिक जांच के दौरान मरीज का ब्लड प्रेशर 84/54 एमएमएचजी दर्ज किया गया। वहीं हीमोग्लोबिन का स्तर भी केवल 7.5 जी/डीएल था, जिससे शरीर में खून की गंभीर कमी का पता चला। चिकित्सकों के लिए तत्काल ऑपरेशन करना जोखिम भरा था, इसलिए पहले मरीज की स्थिति को नियंत्रित करना जरूरी समझा गया।

विशाल गांठ से कई महत्वपूर्ण अंगों पर पड़ रहा था दबाव

अल्ट्रासाउंड और सीटी स्कैन की जांच में ट्यूमर के कारण शरीर के अंदर कई महत्वपूर्ण अंगों पर दबाव की स्थिति सामने आई। गांठ के दबाव से गर्भाशय अपनी सामान्य स्थिति से विस्थापित हो गया था। बायीं मूत्रवाहिनी भी दबाव में थी, जिसका असर किडनी पर पड़ रहा था। जांच में लिवर से जुड़े पैरामीटर्स में भी गड़बड़ी सामने आई।

सर्जरी से पहले कई यूनिट ब्लड चढ़ाकर स्थिर किया गया

मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए Raigarh Medical College की मेडिकल टीम ने पहले उन्हें ऑपरेशन के लिए तैयार किया। खून की कमी पूरी करने के लिए कई यूनिट पैक्ड रेड ब्लड सेल चढ़ाए गए। इसके साथ ही संक्रमण से बचाव और ऑर्गन फंक्शन को बेहतर स्थिति में लाने के लिए आवश्यक दवाएं और एंटीबायोटिक्स दिए गए। मरीज के स्थिर होने के बाद हाई-रिस्क सर्जरी का निर्णय लिया गया।

एक सितंबर को शुरू हुआ बेहद चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन

एक सितंबर 2026 को जनरल एनेस्थीसिया के तहत एक्सप्लोरेटरी लेपरोटॉमी की गई। ऑपरेशन के दौरान चिकित्सकों को पता चला कि विशाल ट्यूमर आंतों से गहराई तक चिपका हुआ था। इसके चलते प्रक्रिया बेहद जटिल और जोखिमपूर्ण हो गई। मरीज की सुरक्षा को देखते हुए जनरल सर्जरी यूनिट को भी ऑपरेशन में शामिल किया गया।

तीन विशेषज्ञ विभागों ने मिलकर संभाला हाई-रिस्क केस

स्त्री रोग, जनरल सर्जरी और निश्चेतना विभाग की संयुक्त टीम ने ऑपरेशन को अंजाम दिया। डॉक्टरों ने बेहद सावधानी से ट्यूमर और आंतों के बीच बने जटिल जुड़ाव को अलग किया। साथ ही दोनों मूत्रवाहिनियों को सुरक्षित रखते हुए उन्हें किसी भी प्रकार की क्षति से बचाया गया। इसके बाद गर्भाशय सहित विशाल ट्यूमर को सफलतापूर्वक बाहर निकाला गया।

सफल सर्जरी के बाद अब स्थिर है महिला की हालत

कई चुनौतियों के बावजूद ऑपरेशन सफल रहा। सर्जरी के बाद मरीज को रिकवरी रूम में रखा गया, जहां उन्हें आईवी फ्लूइड्स और दर्द नियंत्रित करने वाली दवाएं दी जा रही हैं। चिकित्सकों के अनुसार फिलहाल चंपा यादव की स्थिति स्थिर है और वे स्वास्थ्य लाभ ले रही हैं।

विशेषज्ञ टीम की सूझबूझ और टीमवर्क बना सफलता का आधार

इस जटिल सर्जरी का संचालन अधिष्ठाता डॉ. संतोष कुमार और अस्पताल अधीक्षक डॉ. दुर्गाशंकर पटेल के मार्गदर्शन में किया गया। प्रसूति एवं स्त्री रोग विभागाध्यक्ष डॉ. राघवेन्द्र महिलांगे, डॉ. कुंती चौधरी, डॉ. अनीस भगत, निश्चेतना विभागाध्यक्ष डॉ. अशोक सिंह सिदार और सर्जरी विभाग के डॉ. निखिलेश शिंदे सहित नर्सिंग एवं पैरामेडिकल स्टाफ ने उपचार प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

Raigarh Medical College की टीम ने पेश की चिकित्सा सेवा की मिसाल

Raigarh Medical College की टीम ने गंभीर स्थिति में पहुंची मरीज को पहले स्थिर किया और उसके बाद योजनाबद्ध तरीके से हाई-रिस्क सर्जरी को सफल बनाया। चिकित्सकों की विशेषज्ञता, आपसी समन्वय और टीमवर्क ने इस चुनौतीपूर्ण मामले को सफल उपचार में बदल दिया। यह उपलब्धि जटिल सर्जिकल मामलों में Raigarh Medical College की चिकित्सा क्षमता का उल्लेखनीय उदाहरण है।

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