छत्तीसगढ़ में अब भी एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट का इंतजार, वर्षों से उठ रही मांग
अभिषेक कुमार पाण्डेय, रिपोर्टर बिलासपुर, छत्तीसगढ़
रायपुर/विशेष संवाददाता। अधिवक्ताओं की सुरक्षा को लेकर गोवा सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। गोवा विधानसभा ने ‘गोवा एडवोकेट्स प्रोटेक्शन बिल, 2026’ पारित कर दिया है। प्रस्तावित कानून में ड्यूटी के दौरान अधिवक्ताओं पर हमला या बल प्रयोग करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। गंभीर मामलों में आरोपी को 7 साल तक की सजा और 1 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।
गोवा में कानून पारित होने के बाद छत्तीसगढ़ में भी लंबे समय से लंबित एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट की मांग एक बार फिर चर्चा में आ गई है। प्रदेश के अधिवक्ता संगठन लंबे समय से वकीलों की सुरक्षा के लिए विशेष कानून की मांग करते रहे हैं।
गोवा के कानून में क्या हैं प्रमुख प्रावधान?
गोवा विधानसभा से पारित विधेयक में अधिवक्ताओं को सुरक्षा देने के लिए कई महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं।
हमले पर कड़ी कानूनी कार्रवाई
ड्यूटी के दौरान अधिवक्ता पर हमला करने या बल प्रयोग करने को संज्ञेय अपराध की श्रेणी में रखा गया है। गंभीर हमले के मामलों में 7 वर्ष तक की जेल और 1 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है। वहीं सामान्य हमले के मामलों में 2 वर्ष तक की सजा और 50 हजार रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है।
धमकी मिलने पर पुलिस सुरक्षा
विधेयक में अधिवक्ताओं को धमकी मिलने की स्थिति में सुरक्षा उपलब्ध कराने का भी प्रावधान है। आवश्यकता होने पर अधिवक्ता सेशन कोर्ट से पुलिस सुरक्षा की मांग कर सकेंगे। निर्धारित प्रक्रिया के तहत मिली सुरक्षा को अदालत की अनुमति के बिना वापस नहीं लिया जा सकेगा।
नुकसान की भरपाई का प्रावधान
हमले की घटना में अधिवक्ता की संपत्ति को नुकसान पहुंचने अथवा इलाज पर खर्च होने वाली राशि की भरपाई का प्रावधान भी विधेयक में रखा गया है।
डीएसपी स्तर के अधिकारी करेंगे जांच
अधिवक्ताओं से जुड़े मामलों की शिकायत और जांच के लिए भी विशेष व्यवस्था प्रस्तावित है। जांच का अधिकार डीएसपी या उससे ऊपर के स्तर के अधिकारी को दिया गया है और जांच प्रक्रिया को निर्धारित समयसीमा में पूरा करना होगा।
छत्तीसगढ़ में वर्षों से उठ रही सुरक्षा कानून की मांग
गोवा में अधिवक्ताओं की सुरक्षा को लेकर कानून बनाए जाने के बाद अब छत्तीसगढ़ में भी यह सवाल उठ रहा है कि प्रदेश के अधिवक्ताओं को विशेष कानूनी सुरक्षा कब मिलेगी।
छत्तीसगढ़ राज्य बार काउंसिल और विभिन्न जिला बार एसोसिएशन लंबे समय से एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने की मांग करते रहे हैं। इस मुद्दे को लेकर समय-समय पर ज्ञापन, प्रदर्शन और कार्य बहिष्कार जैसे कदम भी उठाए जाते रहे हैं।
धमकी और मारपीट की घटनाओं को लेकर चिंता
अधिवक्ताओं का कहना है कि न्यायालयीन कार्य के दौरान कई बार उन्हें धमकियों, मारपीट और अन्य प्रकार के दबाव का सामना करना पड़ता है। कुछ मामलों में अधिवक्ताओं को झूठे प्रकरणों में फंसाए जाने की आशंकाएं भी सामने आती रही हैं।
ऐसे में अधिवक्ताओं का तर्क है कि न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े लोगों की सुरक्षा के लिए विशेष कानूनी प्रावधान जरूरी हैं।
अधिवक्ताओं को चाहिए स्पष्ट कानूनी सुरक्षा कवच
कानूनी क्षेत्र से जुड़े लोगों का मानना है कि अधिवक्ता यदि भयमुक्त वातावरण में अपने दायित्वों का निर्वहन करेंगे, तभी वे अपने पक्षकारों की प्रभावी पैरवी कर सकेंगे। इसी वजह से छत्तीसगढ़ में भी गोवा और अन्य राज्यों की तर्ज पर अधिवक्ताओं की सुरक्षा के लिए अलग कानून बनाए जाने की मांग तेज हो रही है।
गोवा में एडवोकेट प्रोटेक्शन बिल, 2026 पारित होने के बाद अब छत्तीसगढ़ के अधिवक्ताओं की नजर राज्य सरकार पर है। उनका सवाल है कि लंबे समय से लंबित सुरक्षा कानून की मांग पर प्रदेश में ठोस पहल आखिर कब होगी।


