पर्यावरण संरक्षण मंडल और जिला प्रशासन को सौंपा ज्ञापन, जांच के साथ स्वास्थ्य व फसल नुकसान के मुआवजे की मांग
रायगढ़। ग्राम पंचायत नवागांव के आश्रित ग्राम चुनपुना स्थित शिव शक्ति स्टील प्लांट से कथित प्रदूषण को लेकर समाजसेवी जितेंद्र कुमार निषाद ने पर्यावरण संरक्षण मंडल और जिला प्रशासन का ध्यान आकर्षित कराया है। उन्होंने ज्ञापन सौंपकर उद्योग में पर्यावरणीय मानकों के पालन की जांच कराने और शिकायत सही पाए जाने पर तत्काल कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
24 घंटे प्रदूषण फैलाने का आरोप
जितेंद्र निषाद ने अपने ज्ञापन में आरोप लगाया है कि प्लांट से लगातार काला धुआं और उड़ती हुई कालिख निकलने के कारण आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में प्रदूषण की स्थिति गंभीर बनी हुई है। उनका दावा है कि इससे कृषि भूमि और फसलों पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है। उन्होंने ग्रामीणों के स्वास्थ्य को लेकर भी चिंता जताते हुए सांस संबंधी परेशानी, आंखों में जलन और त्वचा संबंधी समस्याओं की शिकायत का उल्लेख किया है।
ESP और ETP की जांच की मांग
ज्ञापन में प्लांट के प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों की कार्यप्रणाली की भी जांच कराने की मांग की गई है। निषाद ने आरोप लगाया है कि रात के समय कथित तौर पर ESP और ETP जैसे प्रदूषण नियंत्रण संयंत्रों को बंद कर दिया जाता है। उन्होंने प्रशासन से दिन के साथ-साथ रात में भी औचक निरीक्षण कराने की मांग की है, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
प्लांट सील करने और पर्यावरण क्षतिपूर्ति की मांग
समाजसेवी ने मांग की है कि यदि जांच के दौरान पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो जिम्मेदार प्रबंधन के खिलाफ नियमानुसार एफआईआर दर्ज की जाए। साथ ही पर्यावरण को हुए नुकसान के आकलन के आधार पर पर्यावरण क्षतिपूर्ति वसूली जाए। उन्होंने मानकों का पालन सुनिश्चित होने तक उद्योग पर आवश्यक कार्रवाई करने तथा प्रभावित ग्रामीणों के स्वास्थ्य की जांच कराने की भी मांग रखी है।
फसल और जनस्वास्थ्य नुकसान के मुआवजे की मांग
ज्ञापन में प्रदूषण से प्रभावित होने का दावा कर रहे ग्रामीणों की फसलों और स्वास्थ्य संबंधी नुकसान का सर्वे कराने की मांग भी की गई है। निषाद के अनुसार यदि जांच में उद्योग की वजह से नुकसान की पुष्टि होती है तो प्रभावित लोगों को नियमानुसार मुआवजा दिलाया जाना चाहिए।
कार्रवाई नहीं होने पर न्यायालय जाने की चेतावनी
जितेंद्र निषाद ने प्रशासन को दिए ज्ञापन में कहा है कि निर्धारित समय-सीमा में ठोस कार्रवाई नहीं होने पर मामले को न्यायालय के समक्ष ले जाने का रास्ता अपनाया जाएगा। उन्होंने पर्यावरणीय नुकसान के लिए जिम्मेदार पाए जाने वाले उद्योग प्रबंधन और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग करने की बात कही है।
ज्ञापन में सात दिनों के भीतर की गई कार्रवाई की लिखित जानकारी ग्राम पंचायत नवागांव को उपलब्ध कराने का आग्रह किया गया है। वहीं, दस दिनों के भीतर कार्रवाई नहीं होने पर ग्रामीणों, युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों के आंदोलन की चेतावनी भी दी गई है। ज्ञापन की प्रतिलिपि कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी रायगढ़ तथा छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल, रायपुर के सदस्य सचिव को भी भेजी गई है।
फिलहाल लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मामले में प्रशासन और पर्यावरण विभाग की जांच के बाद ही प्रदूषण संबंधी आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।




