लघुकथा: “जलने से डरती थी… फिर मौत के बाद भी जिंदा रहने का रास्ता चुन लिया”

बचपन के जले निशानों ने रूबी के मन में ऐसा डर बसा दिया था कि वह मरने के बाद भी जलना नहीं चाहती थी। लेकिन आशीष की एक बात ने उसके डर को एक ऐसे संकल्प में बदल दिया, जो उसके जाने के बाद भी किसी के काम आ सकता था।

डॉ. ऋचा यादव
बिलासपुर, छत्तीसगढ़

“मुझे जलने से बहुत डर लगता है…”

रूबी ने आशीष से यह बात बेहद धीमी आवाज में कही।

“देखो ना… मुझे रोज एक सपना आता है। मैं जल रही हूं… और मैं मरने के बाद भी जलना नहीं चाहती।”

उसकी आवाज में डर साफ महसूस किया जा सकता था।

आशीष ने उसके हाथ थामते हुए पूछा,
“तुम इतना डरती क्यों हो?”

रूबी ने धीरे से अपने हाथ उसकी ओर बढ़ा दिए। हाथों पर जले के छोटे-छोटे निशान अब भी मौजूद थे।

“बचपन से ही… कभी रोटी बनाते हुए जल गई, कभी कुकर से हाथ झुलस गया। चोट के निशान तो धीरे-धीरे मिट गए, लेकिन जलने का डर आज तक नहीं गया।”

कमरे में कुछ पल के लिए खामोशी छा गई।

फिर रूबी ने आशीष की ओर देखते हुए कहा,
“सुनो ना… मरने के बाद मुझे मत जलाना… प्लीज।”

आशीष ने हल्की मुस्कान के साथ कहा,
“ठीक है… नहीं जलाएंगे।”

रूबी ने मासूमियत से पूछा,
“तो फिर क्या करोगे?”

आशीष ने उसकी ओर एक कागज बढ़ा दिया।

“ये देखो… देहदान का फॉर्म है।”

रूबी कुछ पल के लिए चौंक गई।

“देहदान?”

आशीष ने समझाते हुए कहा,
“हां। तुम्हारी इच्छा हो तो तुम्हारे जाने के बाद तुम्हारा शरीर चिकित्सा शिक्षा और शोध के काम आ सकता है। तुम्हारा शरीर किसी और को सीखने, समझने और भविष्य में किसी की जिंदगी बचाने की दिशा में मदद कर सकता है।”

रूबी चुपचाप उस कागज को देखने लगी।

जिस मौत से वह डर रही थी, उसी के बाद भी किसी के काम आने का विचार उसके मन को छू गया।

कुछ देर बाद उसने धीमी आवाज में कहा,
“जलने से तो डरती हूं… लेकिन इससे नहीं डरूंगी।”

आशीष ने पूछा,
“तो भरोगी ये फॉर्म?”

रूबी के चेहरे पर हल्की मुस्कान आई।

“हां… कम से कम मेरे जाने के बाद भी मेरे होने का कोई अर्थ तो रहेगा।”

उसने पेन उठाया।

कुछ पल तक कागज को देखती रही और फिर देहदान के फॉर्म पर अपने हस्ताक्षर कर दिए।

उस दिन रूबी ने सिर्फ अपने जलने के डर पर जीत नहीं हासिल की, बल्कि अपने जीवन के बाद भी किसी के काम आने का एक रास्ता चुन लिया।

कभी-कभी मौत का डर हमें कमजोर करता है, और कभी वही डर हमें ऐसा संकल्प दे जाता है, जो हमारे जाने के बाद भी किसी के लिए उम्मीद बन जाता है।

Share This Article