सरपंच का खुला अल्टीमेटम— “प्लांट सील करो, वरना 15 दिन में होगा ऐतिहासिक रण”
रायगढ़@दैनिक खबर सार :- औद्योगिक विकास के नाम पर रायगढ़ जिले के ग्राम पंचायत नवागाँव और उसके आश्रित ग्राम चुनचुना में एक ऐसा खौफनाक ‘औद्योगिक आतंकवाद’ पनप रहा है, जिसने पूरे क्षेत्र को एक सुलगते हुए गैस चेंबर में तब्दील कर दिया है। यहां स्थापित ‘शिव शक्ति स्टील प्लांट’ अब महज एक इस्पात कारखाना नहीं रह गया है, बल्कि यह ग्रामीणों के लिए मौत बांटने वाली एक ऐसी मशीन बन चुका है जिसकी चिमनियों से दिन-रात केवल जहर और ‘काली मौत’ बरस रही है। उद्योगपतियों की मुनाफे की अंधी हवस और स्थानीय प्रशासन की आपराधिक मिलीभगत ने हजारों मासूम ग्रामीणों के जीवन, उनके स्वास्थ्य और पीढ़ियों से चली आ रही कृषि व्यवस्था को पूरी तरह से तबाह कर दिया है। इस बेलगाम हो चुके उद्योग और सिस्टम की संवेदनहीनता के खिलाफ अब गांव का आक्रोश ज्वालामुखी की तरह भड़क उठा है। नवागाँव की सरपंच मंजू सत्यनारायण चौहान ने छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के क्षेत्रीय अधिकारी को एक बेहद सख्त, दो-टूक और अंतिम ज्ञापन सौंपकर यह स्पष्ट कर दिया है कि यदि अब प्रशासन ने अपनी आंखें नहीं खोलीं, तो इस क्षेत्र में ऐसा जनाक्रोश भड़केगा जिसे संभालना प्रशासन के बस में नहीं होगा।

रात के घने अंधेरे में रची जाती है ‘काली कमाई’ और ‘काले मौत’ की साजिश..
शिव शक्ति स्टील प्लांट का प्रबंधन पर्यावरण संरक्षण के सभी राष्ट्रीय और मानवीय मानकों की खुलेआम धज्जियां उड़ा रहा है। ज्ञापन में यह बेहद गंभीर और संगीन आरोप लगाया गया है कि दिन के उजाले में जो धुआं आसमान को मैला करता है, वह रात के अंधेरे में एक गहरी और जानलेवा साजिश का रूप ले लेता है। उद्योग प्रबंधन अपने चंद रुपयों की बिजली और मेंटेनेंस का खर्च बचाने के लिए रात के समय जानबूझकर प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों (ईटीपी और ईएसपी) को पूरी तरह से बंद कर देता है। इसका सीधा और खौफनाक परिणाम यह है कि रात भर यह प्लांट बिना किसी रोक-टोक के वायुमंडल में बेतहाशा कालिख और जहरीली गैसें उगलता रहता है। यह कालिख इतनी सघन, जहरीली और खतरनाक है कि इसने आसपास के हरे-भरे पेड़-पौधों को पूरी तरह से जलाकर काला कर दिया है। किसानों के खून-पसीने से सींची गई लहलहाती फसलें इस जहरीली राख की मोटी चादर तले घुटकर दम तोड़ रही हैं। जिस जमीन की उर्वरा शक्ति कभी इस गांव की जीवनरेखा हुआ करती थी, वह अब इस कालिख के जहर से बंजर और मृतप्राय हो चुकी है। रात के अंधेरे में दूर से ही दिखाई देने वाला यह काला गुबार इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि उद्योग किस तरह कानून की आंखों में धूल झोंक कर अपनी मनमानी कर रहा है।
फेफड़ों में जम रही कालिख, बीमारियों का लगा अंबार और प्रशासन की ‘आपराधिक खामोशी’..
इस बेलगाम प्रदूषण का सबसे दर्दनाक और खौफनाक खामियाजा नवागाँव और चुनचुना के मासूम ग्रामीणों को अपनी जान और सेहत की कीमत चुकाकर देना पड़ रहा है। लगातार जहरीले धुएं के बीच सांस लेने को मजबूर गांव का हर दूसरा घर आज गंभीर बीमारियों का गढ़ बन चुका है। छोटे-छोटे बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग लगातार जानलेवा श्वसन रोगों, अस्थमा, त्वचा को गला देने वाले भयानक संक्रमण और आंखों की गंभीर बीमारियों से तड़प रहे हैं। सबसे बड़ा दुर्भाग्य और शर्म का विषय यह है कि यह त्रासदी रातों-रात पैदा नहीं हुई है। पूर्व में भी जब ग्रामीणों के सब्र का बांध टूटा था और उन्होंने इस अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई थी, तब प्रशासन ने महज कागजी और दिखावटी कार्रवाई कर मामले को रफा-दफा कर दिया था। कुछ ही दिनों की शांति के बाद उद्योग ने अपने रसूख और धनबल के नशे में चूर होकर फिर से वही जानलेवा मनमानी शुरू कर दी। यह स्पष्ट रूप से प्रमाणित करता है कि विभागीय अधिकारियों और उद्योग प्रबंधन के बीच एक ऐसी गहरी और शर्मनाक मिलीभगत पनप रही है, जिसमें आम आदमी की जिंदगी की कोई कीमत नहीं है।
सरपंच की दो-टूक मांगें: अब केवल कागजी नोटिस नहीं, बल्कि सीधे प्लांट पर जड़े जाएं ताले..
सरपंच मंजू सत्यनारायण चौहान ने अपने कड़े ज्ञापन के माध्यम से पर्यावरण विभाग और जिला प्रशासन को यह चेतावनी दे दी है कि अब खोखले आश्वासनों और नोटिस भेजने की रस्म-अदायगी से काम नहीं चलेगा। उन्होंने स्पष्ट मांग की है कि पर्यावरण विभाग और जिला प्रशासन की एक उच्च स्तरीय संयुक्त टीम अविलंब इस उद्योग का निरीक्षण करे। यह निरीक्षण दिन के अलावा विशेष रूप से रात के समय आकस्मिक रूप से होना चाहिए ताकि प्लांट की इस जानलेवा चोरी को रंगे हाथों पकड़ा जा सके। सरपंच ने साफ शब्दों में कहा है कि यदि उद्योग में प्रभावी प्रदूषण नियंत्रण उपकरण सुचारू रूप से कार्य करते हुए नहीं पाए जाते हैं, तो इस प्लांट पर न केवल भारी-भरकम ‘पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति’ लगाई जाए, बल्कि इसे तत्काल प्रभाव से हमेशा के लिए सील कर दिया जाए। इसके साथ ही, इस जहरीले धुएं के कारण ग्रामीणों के स्वास्थ्य और कृषि को हुए भारी नुकसान का एक स्वतंत्र सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रभाव आकलन कराया जाए। उद्योग प्रबंधन की तिजोरी से वसूली कर सभी प्रभावित ग्रामीणों का मुफ्त और उच्च स्तरीय इलाज सुनिश्चित किया जाए तथा प्रदूषण से हुई हर प्रकार की क्षति के लिए उन्हें तत्काल भारी मुआवजा दिलाया जाए।
प्रशासन के लिए 15 दिनों की अंतिम मोहलत, न्याय नहीं मिला तो सड़कों पर उतरेगा पूरा गांव..
पर्यावरण संरक्षण मंडल को सौंपे गए इस ज्ञापन के अंत में एक ऐसी सख्त और सीधी चेतावनी दर्ज है, जिसे नजरअंदाज करना प्रशासन के लिए भारी पड़ सकता है। ग्राम पंचायत नवागाँव ने शासन-प्रशासन को धरातल पर ठोस और दृश्यमान कार्रवाई के लिए मात्र 15 दिनों की अंतिम मोहलत दी है। इसके साथ ही यह भी अनिवार्य किया गया है कि सात दिनों के भीतर विभाग अपनी पूरी लिखित कार्रवाई रिपोर्ट ग्राम पंचायत के समक्ष प्रस्तुत करे। यदि इस तय और सख्त समय-सीमा के भीतर प्रशासन अपनी कुंभकर्णी नींद से नहीं जागता है और शिव शक्ति स्टील प्लांट के खिलाफ कोई कड़ी दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाती है, तो ग्राम पंचायत नवागाँव के तमाम युवा, बुजुर्ग, महिलाएं और सभी ग्रामीण एकजुट होकर प्लांट के बाहर एक अनिश्चितकालीन और उग्र धरना-प्रदर्शन करने को विवश होंगे। कानून और व्यवस्था बिगड़ने की इस पूरी स्थिति और किसी भी प्रकार के जनाक्रोश की संपूर्ण जिम्मेदारी केवल और केवल पर्यावरण विभाग तथा जिला प्रशासन की होगी।
अब रायगढ़ की जनता और नवागाँव के ग्रामीणों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या प्रशासन चंद उद्योगपतियों की तिजोरी भरने में उनकी ढाल बनेगा, या फिर ग्रामीणों को शुद्ध हवा में सांस लेने का उनका संवैधानिक और बुनियादी अधिकार लौटाकर न्याय की स्थापना करेगा।




