Secl लात खुली खदान में मजदूरों का हो रहा शोषण

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संगठन के नाम पर वसूली जा रही मोटी रकम

संगठन चेहरा देख तिलक लगाने का कर रहा काम।

छाल :- एसईसीएल लात खुली खदान यू तो प्रिंट मीडिया पोर्टल मीडिया में हमेशा से सुर्खियों में रही है और सुर्खियां क्षेत्र के समस्याओं को लेकर सड़क, बिजली, पानी, आवास, धूल डस्ट, शिक्षा, स्वास्थ जैसे कई मुद्दों को लेकर अगर गिनाने लगें तो सुबह से शाम होते देर नही लगेगी। आज हम बताने जा रहे  छाल उपक्षेत्र के लात एसईसीएल खुलीखदान विस्तार को लेकर  केंद्र सरकार के उपक्रम एसईसीएल, एस.के.ए. को ओ.बी. (खदान से मिट्टी हटाने ) को नया काम दिया है जबकि इससे पूर्व आर.के.एस. द्वारा इस कार्य को सालों से करते आ रही है और आगामी कोयले के प्रोडक्शन में बढ़ोतरी को लेकर महालक्ष्मी को भी ओ.बी. का काम दिए जाने की सुगबुगाहट है। अर्थात कोयले के मांग अनुरूप प्रोडक्शन करना एसईसीएल की नैतिक जिम्मेदारी है जिसे यह बखूबी निभा रही है।



इस बीच प्रोडक्शन के लिए उक्त फर्म के बीच हुए अनुबन्ध में कार्य सम्पादित करने हेतु मेन पावर की आवश्यकता मुख्य रूप से होती है जिसे उक्त फर्म द्वारा ग्रामीण जिला प्रदेश के साथ दीगर प्रांत से भी कुशल, अर्ध- कुशल, अकुशल मजदूरों को काम करने हेतु लाया गया है। इस बीच क्षेत्र में एक मजदूरों के सहायक संगठन मजदूर एकता सेवा समिति छाल का भी धमक हुआ जो संगठन मजदूरों के हितों को लेकर मजदूरों के साथ खड़े होकर उनकी हक की लड़ाई लड़ी (इस बात की पुष्टि हम नही करते ट्रोल हुए विडीयो ये सब कहती है) औऱ उनकी मासिक वेतन में बढ़ोतरी कराई। यहां तक ठीक किन्तु एक लाइन ट्रोल विडीयो में छोड़ दिया गया जोकि बतौर वेतन बढ़ोतरी को लेकर 500 से लेकर 700 रुपये एक मजदूर से वसूलने का काला खेल खेला जा रहा है।



एक बात इस बीच और निकल कर सामने आती है जहाँ ओ.बी. के कार्य दो फर्म के द्वारा किया जा रहा है जैसे कि आगे बताया गया है किंतु दोनों में वेतन विसंगति देखने को मिल रहा है और यूनियन मजदूर एकता सेवा समिति छाल महज एक ही फर्म के लिए हितैसी आखिर क्यों..

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