आईआईटी रिपोर्ट का बड़ा खुलासा–टूटी सड़कों और भारी वाहनों ने शहर को बनाया गैस चैंबर,सरकार सिर्फ घोषणाओं में व्यस्त
रायगढ। शहर में बढ़ते प्रदूषण के लिए अब तक उद्योगों को जिम्मेदार ठहराया जाता रहा,लेकिन आईआईटी खड़कपुर की सर्वे रिपोर्ट ने इस धारणा को उलट दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक़ रायगढ़ में प्रदूषण की असली जड़ खराब सड़कें और उन पर दौड़ती भारी गाड़ियां हैं,न कि उद्योग।शहर की सड़कों की हालत इतनी बदतर हो चुकी है कि हर गुजरती ट्रक और डंपर के साथ धूल का गुबार हवा में जहर घोल रहा है। हालत यह है कि लोगों का सांस लेना तक मुश्किल हो गया है, लेकिन जिम्मेदार सिस्टम अब भी चुप्पी साधे बैठा है।
10 साल से ‘विकास’ सिर्फ कागजों में
रायगढ़ से सरायपाली,रायपुर, अंबिकापुर,पत्थलगांव से लेकर यूपी, बिहार और झारखंड तक आने जाने वाली सड़कें खस्ताहाल हैं।पिछले एक दशक में सुधार के नाम पर सिर्फ घोषणाएं हुईं,जमीन पर काम नदारद रहा।शहर की बहुप्रतीक्षित जरूरत रिंग रोड और फोरलेन प्रोजेक्ट सिर्फ फाइलों में कैद है तो प्रदूषण की भट्टी बने रायगढ़ में रोजाना हजारों भारी वाहनों के शहर से गुजरने से जनता धूल और जाम से त्रस्त हो गई है।
इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी से पूंजीपतियों का शहर से हो रहा मोह भंग
शहर की बदहाल व्यवस्था का असर अब अर्थव्यवस्था पर भी दिखने लगा है।सूत्रों के मुताबिक,बड़े निवेशक और पूंजीपति रायगढ़ छोड़कर महानगरों की ओर रुख कर रहे हैं।इसका एक बड़ा कारण बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव , एयरपोर्ट की कमी और संकुचित होती सड़कों पर अवैध काबिज व्यवसाय,बेतरकीब जाम और प्रदूषण से बिगड़ता जीवन स्तर है।
बेतरतीब उद्योग: बिना प्लानिंग, बिना नियंत्रण
पिछले 25 सालों में रायगढ़ में उद्योग तो तेजी से बढ़े,लेकिन उनके साथ जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित नहीं हुआ।मिसाल के तौर पर गेरवानी-तराईमाल क्षेत्र में 40 से अधिक उद्योग संचालित हैं,लेकिन न पर्याप्त सड़क,न रेलवे यार्ड और ना ही प्रदूषण नियंत्रण की कोई कारगर योजना है। कोयला परिवहन पूरी तरह सड़क पर निर्भर है इसका सीधा असर ट्रैफिक का दबाव,लगातार दुर्घटनाएं,और बढ़ते प्रदूषण के रुप में अपना प्रभाव दिखा रहा है।बड़ा सवाल यह है कि क्या रायगढ़ की जनता ऐसे ही धूल और जहर में जीती रहेगी? क्या सरकार सिर्फ उद्योग बढ़ाने तक ही सीमित रहेगी? और कब बनेगी सड़कें,आखिर कब मिलेगी राहत?
जिंदल पर भी उठे सवाल
तमनार से आने वाला कोयला बड़े पैमाने पर सड़कों के जरिए शहर में प्रवेश करता है।स्थानीय लोगों का कहना है कि जिंदल जैसी बड़ी कंपनियों को अपने ट्रांसपोर्ट के लिए अलग मार्ग विकसित करना चाहिए। शहर के अंदर से डंपरों का आवागमन बंद हो।जोरापाली गेट की ओर से वैकल्पिक रूट शुरू किया जाए और भारी वाहनों को शहर के भीतर पूर्णत: प्रतिबंधित करना जरुरी हो गया है।
‘पावरफुल’ विधायक से उम्मीदें
रायगढ़ के विधायक ओपी चौधरी न सिर्फ पूर्व आएएस अधिकारी हैं, बल्कि वर्तमान में प्रदेश के वित्त मंत्री भी हैं।
शहरवासियों को उनसे बड़ी उम्मीदें हैं कि वे इस संकट को प्राथमिकता में लेकर ठोस कदम उठाएंगे।ओपी के विजन और उनकी राजनैतिक क्षमता को देखकर आशान्वित शहरवासियों का कहना है कि यदि अगर अब भी सुधार नहीं हुआ,तो रायगढ़ का भविष्य ‘इंडस्ट्रियल हब’ नहीं, ‘प्रदूषण का हॉटस्पॉट’ बन जाएगा।
