छत्तीसगढ़ में सड़क सुरक्षा एक गंभीर चिंता का विषय बन गई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है और घायलों और मृतकों की संख्या भी चिंताजनक है।
साल दर साल हादसों का आंकड़ा
- 2024: 14,857 दुर्घटनाएं, 12,484 घायल, 6,945 मौतें
- 2025: 15,318 दुर्घटनाएं, 13,135 घायल, 6,728 मौतें
इससे पता चलता है कि साल-दर-साल दुर्घटनाओं और घायलों की संख्या में वृद्धि हुई है, हालांकि कुल मौतों में थोड़ी गिरावट आई है।
जिलों में स्थिति
कुछ जिलों में हादसों में मौतों की वृद्धि विशेष रूप से चिंताजनक है: जिला मौतों में बढ़ोतरी (%) अन्य जानकारी महासमुंद 16% कबीरधाम 32% कांकेर 11% सुकमा 54% दंतेवाड़ा – घायल हुए लोगों में 115% बढ़ोतरी
विशेषकर सुकमा और दंतेवाड़ा जैसे पहले नक्सल प्रभावित क्षेत्र अब सड़क हादसों के लिए भी खतरनाक साबित हो रहे हैं।
सड़क हादसों के पीछे प्रमुख कारण
सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, हादसों की वृद्धि के पीछे कई गंभीर कारण हैं:
- सड़क और हाईवे की स्थिति:
- कई जगह अंधे मोड़
- गड्ढों से भरी सड़कें
- खराब मेंटेनेंस
- सुरक्षा और संकेतक:
- संकेतक बोर्ड की कमी
- स्ट्रीट लाइट का अभाव, विशेषकर रात में
- यातायात नियंत्रण में कमी:
- ट्रैफिक नियमों का पालन कम
- ओवरलोडिंग पर नियंत्रण नहीं
- स्पीड मॉनिटरिंग सिस्टम केवल बड़े शहरों तक सीमित
ब्लैक स्पॉट्स और सुधार की जरूरत
प्रदेश में कई सड़क दुर्घटना ब्लैक-स्पॉट्स चिन्हित किए गए हैं। हालांकि इन क्षेत्रों में सुधार के काम अभी या तो अधूरे हैं या शुरू नहीं हुए हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि सड़क इंजीनियरिंग सुधार, पर्याप्त संकेतक, रोशनी और ट्रैफिक नियमों का सख्ती से पालन ही दुर्घटनाओं को कम करने का रास्ता है।
