चुनाव में लगाए जनरेटर का किराया नहीं रोका जा सकता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

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करीब 13 साल पुराने मामले में डिविजन बेंच का फैसला, निर्धारित स्थल पर जनरेटर चालू हालत में उपलब्ध रखना ही माना गया उपयोग

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने चुनाव के दौरान लगाए गए जनरेटर के किराए से जुड़े करीब 13 साल पुराने मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट की डिविजन बेंच ने स्पष्ट किया कि संविदा के तहत जनरेटर को निर्धारित स्थल पर स्थापित कर चालू हालत में उपलब्ध रखना ही उसकी उपयोगिता मानी जाएगी।

कोर्ट ने कहा कि केवल इस आधार पर जनरेटर का किराया रोका नहीं जा सकता कि बिजली जाने के दौरान उसे चलाने की आवश्यकता नहीं पड़ी।

जनरेटर उपलब्ध कराना भी संविदा का हिस्सा

मामले की सुनवाई के दौरान डिविजन बेंच ने संविदा में तय शर्तों और जनरेटर उपलब्ध कराने के उद्देश्य को ध्यान में रखा। कोर्ट के अनुसार, यदि ठेकेदार ने निर्धारित स्थान पर जनरेटर स्थापित कर उसे उपयोग के लिए तैयार और चालू हालत में उपलब्ध रखा है, तो केवल वास्तविक संचालन नहीं होने के आधार पर उसकी सेवा को अनुपयोगी नहीं माना जा सकता।

बिजली कटौती नहीं हुई तो भी किराए का अधिकार

अदालत के फैसले का महत्वपूर्ण पहलू यह है कि जनरेटर की सेवा का मूल्यांकन केवल उसके चलने के समय के आधार पर नहीं किया जा सकता। यदि चुनावी व्यवस्था के लिए जनरेटर को बैकअप के तौर पर निर्धारित स्थान पर तैयार रखा गया था, तो बिजली कटौती न होने या जनरेटर का उपयोग नहीं किए जाने से संविदा के तहत देय किराया स्वतः समाप्त नहीं होता।

हाईकोर्ट के इस फैसले से चुनावी ड्यूटी अथवा अन्य सरकारी व्यवस्थाओं के लिए बैकअप के रूप में उपलब्ध कराए जाने वाले जनरेटर की संविदात्मक उपयोगिता को लेकर महत्वपूर्ण कानूनी स्थिति सामने आई है।

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