खेत बेचकर निवेश की थी रकम, न मुनाफा मिला और न मूलधन लौटा; ओडिशा और मुंबई तक जुड़े नेटवर्क की जांच में जुटी साइबर पुलिस
रायगढ़। यूनिटी मेटा टोकन और बीड क्वाइन में निवेश कर कम समय में भारी मुनाफा कमाने का लालच देकर 11 लाख 60 हजार रुपये की कथित धोखाधड़ी के मामले में रायगढ़ साइबर पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, ओडिशा निवासी एक युवक ने आरोपियों के झांसे में आकर अपना खेत बेच दिया और प्राप्त रकम निवेश कर दी। इसके बावजूद उसे न तो मुनाफा मिला और न ही उसकी मूल राशि वापस की गई। तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है।
पुलिस ने इस मामले में साइबर थाना रायगढ़ में अपराध क्रमांक 16/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) और 3(5) में अपराध दर्ज कर जांच शुरू की थी।
ऐसे निवेश के नाम पर ली गई रकम
पुलिस के अनुसार, शिकायतकर्ता विक्रम परिडा (26), निवासी ग्राम डिपाटपुर, जिला गंजाम, ओडिशा, वर्तमान में रायगढ़ के चक्रधरनगर क्षेत्र में रह रहा था। वर्ष 2024 में उसकी पहचान गजुला मोहन से हुई, जो चक्रधरनगर क्षेत्र की एक फास्ट फूड दुकान में कुक का काम करता था।
आरोप है कि गजुला मोहन ने यूनिटी मेटा टोकन और बीड क्वाइन में निवेश कर लाभ कमाने की बात कहते हुए विक्रम को भी अधिक मुनाफे का लालच दिया। उसकी बातों पर भरोसा कर विक्रम ने अपना खेत बेच दिया और 25 जुलाई से 3 सितंबर 2024 के बीच कुल 11 लाख 60 हजार रुपये निवेश कर दिए।
पुलिस की जांच में सामने आया कि रकम के लेन-देन के लिए चंदन दास के माध्यम से बीड क्वाइन से जुड़े काम करने वाले भावेष पटेल के बैंक खाते का इस्तेमाल किया गया। निवेश के बाद जब विक्रम को न तो कोई लाभ मिला और न ही उसकी मूल रकम वापस हुई, तो उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
बैंक खातों के लेन-देन से खुला मामला
मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के निर्देशन में साइबर पुलिस ने जांच तेज की। पुलिस ने संबंधित बैंक खातों के स्टेटमेंट की जांच की, जिसमें शिकायतकर्ता और आरोपियों के बीच रकम के लेन-देन से जुड़े तथ्य सामने आए।
विवेचना के दौरान पुलिस ने गजुला मोहन, चंदन दास और भावेष पटेल को गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में आरोपियों ने अपराध स्वीकार किया है। मामले में इस्तेमाल किए गए मोबाइल फोन भी जांच के लिए जब्त किए गए हैं।
मुख्य आरोपी के खिलाफ पहले भी दर्ज था मामला
पुलिस के अनुसार, मुख्य आरोपी गजुला मोहन के खिलाफ वर्ष 2025 में भी चक्रधरनगर थाना क्षेत्र में धोखाधड़ी का मामला दर्ज हुआ था। वह मामला विवेकानंद राउत, देवेंद्र महापात्रे और शरद जैन से संबंधित शिकायत पर दर्ज किया गया था।
पुलिस का कहना है कि पुराने मामले में न्यायालय से स्टे प्राप्त करने के बाद आरोपी के फरार रहने की जानकारी सामने आई है। वर्तमान प्रकरण में उसकी भूमिका और पुराने मामले से जुड़े तथ्यों की भी जांच की जा रही है।
ओडिशा और मुंबई तक जुड़े संपर्कों की जांच
जांच के दौरान मुख्य आरोपी के संपर्क ओडिशा और मुंबई तक होने तथा निवेश की रकम आगे अन्य लोगों तक भेजे जाने से जुड़े तथ्य सामने आने की जानकारी पुलिस ने दी है। साइबर पुलिस अब रकम के पूरे लेन-देन, कथित नेटवर्क और अन्य संभावित संलिप्त व्यक्तियों का पता लगाने में जुटी है।
गिरफ्तार आरोपी
- गजुला मोहन (45), निवासी ग्राम बरमपुर, जिला गंजाम, ओडिशा; वर्तमान निवासी संजय नगर, चक्रधरनगर, रायगढ़।
- चंदन दास (33), निवासी ग्राम साबामूला, ओडिशा; वर्तमान निवासी रायगढ़ स्टेडियम के पास, चक्रधरनगर, रायगढ़।
- भावेष पटेल (28), निवासी कारीछापर, थाना पुसौर, जिला रायगढ़, छत्तीसगढ़।
साइबर पुलिस की टीम की रही अहम भूमिका
एसएसपी शशि मोहन सिंह के निर्देशन तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनिल सोनी और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक यातायात पुष्पेंद्र बघेल के मार्गदर्शन में की गई कार्रवाई में साइबर थाना प्रभारी निरीक्षक विजय चेलक, निरीक्षक विमल राय, सहायक उप निरीक्षक नंद कुमार सारथी, सहायक उप निरीक्षक ज्योत्सना शर्मा, प्रधान आरक्षक दुर्गेश सिंह, रूप राम पटेल और आरक्षक पुष्पेंद्र जाटवर की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
एसएसपी की अपील: निवेश से पहले करें जांच
एसएसपी शशि मोहन सिंह ने आम नागरिकों से अपील की है कि डिजिटल करेंसी, क्रिप्टो टोकन या किसी भी ऑनलाइन निवेश योजना में पैसा लगाने से पहले उसकी वैधता, विश्वसनीयता और संबंधित संस्था की प्रमाणिकता की जांच अवश्य करें। कम समय में रकम दोगुनी करने या असाधारण मुनाफा दिलाने के वादों पर आंख मूंदकर भरोसा न करें।
उन्होंने कहा कि अपनी मेहनत की कमाई या संपत्ति बेचकर किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर निवेश करने से बचें। किसी भी तरह की वित्तीय साइबर धोखाधड़ी होने पर तत्काल पुलिस को सूचना दें और साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।


