नई दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR (Special Intensive Revision) को लेकर चल रही राजनीतिक बहस अब सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के भीतर भी चर्चा का विषय बन गई है। NDA के तीन सहयोगी दलों ने चुनाव आयोग से हालिया विवाद और आयोग के भीतर सामने आए मतभेदों को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।
लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख एवं केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान, तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के लोकसभा फ्लोर लीडर लावू श्रीकृष्ण देवरायालु और राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने अलग-अलग बयानों में चुनाव आयोग से पारदर्शिता और जनता के बीच उठ रहे सवालों को दूर करने की बात कही है।
चिराग पासवान बोले- जनता के बीच स्थिति स्पष्ट करे आयोग
केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने शुक्रवार को कहा कि चुनाव आयोग एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है और यदि उसके कामकाज को लेकर सवाल उठ रहे हैं तो आयोग की जिम्मेदारी है कि वह अपना पक्ष जनता के सामने स्पष्ट करे।
पासवान ने कहा कि वह सरकार का हिस्सा होने के नाते चुनाव आयोग का बचाव नहीं कर रहे हैं। उनके मुताबिक, राजनीतिक दलों के आरोप-प्रत्यारोप से अलग जनता के मन में चुनाव प्रक्रिया को लेकर किसी तरह का संदेह पैदा होना महत्वपूर्ण मुद्दा है। ऐसे में आयोग को लोगों के बीच उठ रही आशंकाओं को दूर करने के लिए स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
TDP ने पारदर्शिता को बताया जरूरी
NDA की सहयोगी तेलुगु देशम पार्टी ने भी चुनाव आयोग से पारदर्शिता बनाए रखने पर जोर दिया है। पार्टी के लोकसभा फ्लोर लीडर लावू श्रीकृष्ण देवरायालु ने कहा कि आंध्र प्रदेश में SIR की प्रक्रिया उनके अनुसार पारदर्शी तरीके से पूरी की गई और मतदाताओं को अपनी आपत्तियां रखने के लिए पर्याप्त अवसर दिया गया।
हालांकि उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग लोकतंत्र में महत्वपूर्ण संवैधानिक जिम्मेदारी निभाता है। ऐसे में जब आयोग के कामकाज को लेकर सवाल उठते हैं तो उचित स्पष्टीकरण और पारदर्शिता से जनता का विश्वास मजबूत करने में मदद मिलेगी।
उपेंद्र कुशवाहा ने भी मांगी तत्काल सफाई
राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख और राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा ने भी SIR विवाद पर चुनाव आयोग से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। कुशवाहा के अनुसार, विवाद के कारण लोगों के बीच भ्रम की स्थिति बन रही है।
उन्होंने कहा कि मामले की वास्तविक स्थिति को लेकर चुनाव आयोग को तत्काल स्पष्टीकरण जारी करना चाहिए, ताकि जनता के बीच मौजूद भ्रम दूर हो सके।
आयोग के भीतर मतभेद को लेकर क्या है विवाद?
यह पूरा विवाद द इंडियन एक्सप्रेस की 23 सितंबर को प्रकाशित एक रिपोर्ट के बाद तेज हुआ। रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने अक्टूबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच कम से कम 14 बार कुछ फैसलों और आदेशों पर औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई थी। रिपोर्ट में मतदाता सूची से जुड़े कुछ फैसलों, फॉर्म-6 में बदलाव और मतदाता सूची के प्रबंधन से जुड़े मामलों का भी उल्लेख किया गया।
चुनाव आयोग ने मतभेदों पर क्या कहा?
वहीं, चुनाव आयोग ने इन रिपोर्टों के बाद कहा है कि बहुसदस्यीय संवैधानिक संस्था में अलग-अलग विचार और टिप्पणियां deliberation का सामान्य हिस्सा हैं। आयोग के अनुसार, SIR समेत उसके अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
इस बीच SIR को लेकर राजनीतिक दलों के बीच बहस जारी है। NDA के सहयोगी दलों की ओर से सामने आए बयानों में मुख्य जोर चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण, पारदर्शिता और जनता के भरोसे से जुड़े सवालों को दूर करने पर रहा है।


