Bandamunda बंडामुंडा थाने में दर्ज चार एफआईआर को लेकर एक गंभीर विवाद सामने आया है, जिसने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिकायतकर्ता राजकुमारी चौधरी द्वारा दर्ज कराए गए मामलों में अब कई विरोधाभास सामने आने का दावा किया जा रहा है। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि शिकायतकर्ता और कुछ पुलिस अधिकारियों की मिलीभगत से एक निर्दोष व्यक्ति को झूठे मामलों में फंसाया गया।
मामले के अनुसार, राजकुमारी चौधरी ने 8 मार्च 2021 को Bandamunda Police Station में पहली एफआईआर (35/2021) दर्ज कराई थी। शिकायत में उन्होंने आरोप लगाया था कि उनके पति और दो देवरों ने मारपीट कर उनके बेटे, गहने और नकदी छीन ली। इसके बाद वह लगातार अपने एक देवर पर बेटे को छिपाकर रखने, अपहरण और प्रताड़ना जैसे आरोप लगाती रहीं तथा अलग-अलग समय पर कई शिकायतें दर्ज कराती रहीं।
विवाद तब और गहरा गया जब परिवार न्यायालय में दाखिल I.A. (इंटरलोक्यूटरी एप्लिकेशन) और मीडिया रिपोर्ट्स में अलग तस्वीर सामने आई। शिकायतकर्ता ने अपने आवेदन में कहा कि उनका बेटा 3 मार्च 2021 को उनके पति द्वारा जबरन ले जाया गया था। वहीं एक मीडिया रिपोर्ट में जांच अधिकारी लखिंदर मुर्मू के हवाले से बताया गया कि राजकुमारी का पति बेटे को लेकर Lucknow चला गया था।
इसी आधार पर देवर ने बड़ा सवाल उठाया है। उनका कहना है कि जब बेटी राजकुमारी के पास थी और बेटा 3 मार्च 2021 से पिता के साथ था, तब 8 मार्च 2021, 21 फरवरी 2022 और 8 मई 2022 को दर्ज शिकायतों में आखिर किस बच्चे को छिपाकर रखने का आरोप लगाया गया। पीड़ित पक्ष का दावा है कि यह आरोप तथ्यात्मक रूप से मेल नहीं खाते।
आरटीआई के जरिए मांगी गई जानकारी में भी पुलिस स्पष्ट जवाब नहीं दे सकी कि शिकायतों में किस बच्चे को लेकर आरोप लगाए गए थे। इससे मामले पर और संदेह गहरा गया है।
पीड़ित देवर ने पूरे मामले की जांच के लिए Rourkela Police के एसपी को आवेदन सौंपा है। एसपी ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए डीवाईएसपी जोन-2 को जांच के निर्देश दिए हैं।
अब निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। यदि आरोपों में सच्चाई पाई जाती है, तो शिकायतकर्ता के साथ-साथ मामले से जुड़े पुलिस अधिकारियों और कथित झूठे गवाहों पर भी कार्रवाई हो सकती है। मामला फिलहाल जांच के अधीन है।



