द्वारिकापुर खाद प्रकरण में जांच की स्थिति स्पष्ट नहीं, प्रशासन और कृषि विभाग की चुप्पी से बढ़े सवाल
सूरजपुर। ग्राम द्वारिकापुर में 3 जुलाई को हुई कार्रवाई में 676 बोरी यूरिया और 80 बोरी डीएपी समेत कुल 756 बोरी खाद जब्त किए जाने के बाद अब कार्रवाई की स्थिति को लेकर सवाल उठने लगे हैं। जब्ती के बाद गोदाम को सील किया गया था, लेकिन महज 21 दिन बाद दुकान दोबारा खुल गई। इसके बावजूद जांच का अंतिम निष्कर्ष और कार्रवाई की स्पष्ट जानकारी अब तक सार्वजनिक नहीं हुई है।
मामले में खास तौर पर 80 बोरी खाद के स्रोत को लेकर भी सवाल बने हुए हैं। संबंधित दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच किस स्तर तक हुई, इसे लेकर भी प्रशासन की ओर से स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
बड़ी जब्ती के बाद इतनी जल्दी दुकान कैसे खुली?
3 जुलाई की कार्रवाई में भारी मात्रा में खाद मिलने के बाद गोदाम सील किया गया था। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि दुकान खोलने की अनुमति किस आधार पर दी गई?
क्या विभागीय जांच पूरी हो चुकी थी? यदि जांच पूरी हो गई थी तो उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की गई? और यदि जांच अभी लंबित थी तो जांच पूरी होने से पहले दुकान खोलने का निर्णय किन नियमों और परिस्थितियों के आधार पर लिया गया?
इन सवालों का स्पष्ट जवाब सामने नहीं आने से मामले को लेकर संदेह और चर्चा दोनों बढ़ रहे हैं।
80 बोरी खाद का स्रोत सबसे बड़ा सवाल
जब्त 80 बोरी खाद को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। विभागीय स्तर पर इसे कथित तौर पर गैर-सरकारी खाद बताया जा रहा है। वहीं, खाद के स्रोत और उसके दुकान परिसर तक पहुंचने को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं।
कुछ चर्चाओं में यह बात भी सामने आई है कि पूछताछ के दौरान दुकानदार को खाद के संबंध में क्या जवाब देना है, इसे लेकर कथित रूप से समझाइश दी गई। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
ऐसे में वास्तविक स्थिति का पता दस्तावेजों और संबंधित रिकॉर्ड की जांच से ही चल सकता है।
समिति के रिकॉर्ड से मिल सकता है खाद का हिसाब
यदि 80 बोरी खाद किसी समिति से घरेलू या अन्य उपयोग के लिए प्राप्त की गई थी, तो उसके लिए संबंधित दस्तावेज उपलब्ध होने चाहिए। ऐसे में जांच के दायरे में यह बिंदु प्रमुखता से आना जरूरी है कि खाद किस समिति से जारी हुई और किसके नाम पर कितनी मात्रा में दी गई।
जांच में इन सवालों के जवाब जरूरी
- खाद किस समिति से जारी की गई थी?
- किस व्यक्ति या संस्था के नाम पर खाद आवंटित हुई?
- रिकॉर्ड में कितनी मात्रा दर्ज है?
- क्या समिति के स्टॉक रजिस्टर में इसका उल्लेख है?
- इतनी बड़ी मात्रा दुकान परिसर में कैसे पहुंची?
- क्या खाद को वहां रखने की अनुमति थी?
- विभाग ने समिति और दुकानदार के दस्तावेजों का मिलान किया या नहीं?
इन सवालों का जवाब सामने आने के बाद ही 80 बोरी खाद की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
दुकान खोलने का आदेश किस अधिकारी ने दिया?
गोदाम सील होने के करीब 21 दिन बाद दुकान दोबारा खुल गई। अब यह भी महत्वपूर्ण सवाल है कि दुकान खोलने का लिखित आदेश किस अधिकारी ने जारी किया और किन शर्तों के आधार पर सील हटाई गई।
क्या दुकान खोलने से पहले दोबारा निरीक्षण किया गया था? क्या स्टॉक का सत्यापन हुआ? क्या जब्त खाद से संबंधित जांच पूरी होने के बाद ही संचालन की अनुमति दी गई?
यदि पूरी प्रक्रिया नियमों के तहत हुई है तो संबंधित आदेश और जांच रिपोर्ट सार्वजनिक होने से स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
जयनगर मामले से तुलना क्यों?
जिले के जयनगर क्षेत्र से जुड़े खाद प्रकरण में स्टॉक में कमी पाए जाने के बाद संबंधित व्यक्ति के खिलाफ अपराध दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में द्वारिकापुर में 756 बोरी खाद की जब्ती के बाद आगे की कार्रवाई क्या हुई, यह सवाल भी महत्वपूर्ण हो जाता है।
हालांकि दोनों मामलों की परिस्थितियां अलग हो सकती हैं, लेकिन खाद से जुड़े मामलों में विभागीय जांच और कार्रवाई की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
पिछली शिकायतों और खबरों के बाद भी स्थिति अस्पष्ट
द्वारिकापुर मामले को लेकर पहले भी सवाल उठाए जा चुके हैं। इसके बावजूद अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि 756 बोरी खाद की जब्ती के बाद जांच किस निष्कर्ष तक पहुंची।
स्थिति फिलहाल यह है कि खाद जब्त हुई, गोदाम सील किया गया और कुछ ही दिनों बाद दुकान फिर खुल गई। लेकिन जांच का अंतिम परिणाम जनता के सामने नहीं आया।
उप संचालक से पक्ष जानने का प्रयास
मामले में कृषि विभाग की उप संचालक संपदा पैकरा से फोन और वाट्सऐप के माध्यम से संपर्क कर 756 बोरी खाद की जब्ती, दुकान दोबारा खोलने के आदेश, 80 बोरी कथित गैर-सरकारी खाद के स्रोत तथा विभागीय कार्रवाई के संबंध में पक्ष जानने का प्रयास किया गया।
समाचार तैयार किए जाने तक उनकी ओर से कोई जवाब प्राप्त नहीं हुआ। विभाग की ओर से जवाब या स्पष्टीकरण प्राप्त होने पर उसे भी खबर में प्रमुखता से शामिल किया जाएगा।
अब प्रशासन के सामने सीधे सवाल
द्वारिकापुर खाद प्रकरण में अब प्रशासन से कई सवालों के जवाब अपेक्षित हैं—
756 बोरी खाद जब्त होने के बाद अंतिम कार्रवाई क्या हुई?
दुकान किस अधिकारी के आदेश से दोबारा खोली गई?
जांच रिपोर्ट कहां है?
80 बोरी खाद का वास्तविक स्रोत क्या था?
क्या संबंधित समिति के रिकॉर्ड की जांच की गई?
स्टॉक रजिस्टर और खरीद-बिक्री दस्तावेजों का मिलान हुआ या नहीं?
जांच लंबित थी तो दुकान खोलने की अनुमति किस आधार पर दी गई?
स्वतंत्र जांच की मांग
स्थानीय स्तर पर अब मांग उठ रही है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। जांच में जब्त खाद से जुड़े दस्तावेज, स्टॉक रजिस्टर, खरीद-बिक्री का रिकॉर्ड, संबंधित समिति के दस्तावेज, गोदाम सील करने और खोलने के आदेश तथा संबंधित अधिकारियों की भूमिका को भी शामिल किया जाए।
क्योंकि मामला केवल 756 बोरी खाद की जब्ती तक सीमित नहीं है। असली सवाल यह है कि इतनी बड़ी कार्रवाई के बाद जांच और विभागीय कार्रवाई का अंतिम परिणाम क्या रहा। यदि कार्रवाई नियमों के तहत पूरी हो चुकी है तो उसकी जानकारी सार्वजनिक करने में देरी क्यों हो रही है—और यदि जांच अभी बाकी है, तो दुकान दोबारा खोलने का आधार क्या था?


