सुशासन शिविर में फूटा जनता का गुस्सा, मंच से राजस्व विभाग पर रिश्वतखोरी के आरोप

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गरियाबंद। गरियाबंद जिले के छुरा विकासखंड के ग्राम कनसिंघी में आयोजित सुशासन शिविर उस समय चर्चा का विषय बन गया, जब ग्रामीणों ने खुले मंच से अपनी नाराजगी जाहिर की। जिले के कलेक्टर, एसपी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी और बड़ी संख्या में ग्रामीणों की मौजूदगी में लोगों ने प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठाए।

मंच से राजस्व विभाग पर रिश्वतखोरी के आरोप

शिविर के दौरान जिला पंचायत सदस्य लेखराज धुर्वा ने मंच से राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि छुरा तहसील कार्यालय में बिना लेनदेन के काम नहीं होते और रिश्वत नहीं देने वाले लोगों को लंबे समय तक दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। उन्होंने अधिकारियों को व्यवस्था में सुधार लाने की चेतावनी भी दी।

वृद्ध महिला ने आवेदन देने से किया इंकार

शिविर में कोठीगांव की वृद्ध महिला भुखई बाई नेताम भी अपनी समस्या लेकर पहुंची थी, लेकिन मंच पर कलेक्टर को बैठे देखकर वह बिना आवेदन दिए वापस लौट गई। महिला ने आरोप लगाया कि वह पहले भी जनदर्शन कार्यक्रम में कलेक्टर कार्यालय पहुंची थी, जहां उसके साथ अभद्र व्यवहार हुआ था। इसी अनुभव के चलते उसने दोबारा आवेदन देने से मना कर दिया।

आवेदन लेने से मना करने का आरोप

ग्राम कनसिंघी के उपसरपंच और कुछ ग्रामीण स्वास्थ्य विभाग से संबंधित समस्याओं को लेकर आवेदन देने पहुंचे थे। आरोप है कि संबंधित विभाग के अधिकारी ने उनका आवेदन लेने से इंकार कर दिया। बाद में ग्रामीणों के विरोध और हस्तक्षेप के बाद आवेदन की पावती दी गई।

प्रशासनिक व्यवस्था पर उठे सवाल

सुशासन शिविर का उद्देश्य लोगों की समस्याओं का त्वरित समाधान करना और शासन की योजनाओं को आम लोगों तक पहुंचाना है। हालांकि, शिविर के दौरान सामने आए मामलों ने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि यदि अधिकारियों की मौजूदगी में भी समस्याएं सुनने और आवेदन स्वीकार करने में दिक्कत हो रही है, तो सामान्य दिनों में आम लोगों को और अधिक परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

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