रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में उद्योगों और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों को मिलने वाली मंजूरियों, अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) और अनुमोदनों की प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाने के लिए बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन अधिनियम के तहत एक राज्य स्तरीय नोडल एजेंसी का गठन किया है।
सिंगल विंडो सिस्टम की होगी मजबूत मॉनिटरिंग
नई नोडल एजेंसी सिंगल विंडो पोर्टल पर प्राप्त आवेदनों की नियमित समीक्षा करेगी और यह सुनिश्चित करेगी कि सभी विभागों में लंबित मामलों का निपटारा तय समय-सीमा के भीतर हो। इसका उद्देश्य उद्योगों को अलग-अलग विभागों के चक्कर लगाने से राहत देना और एक प्रभावी व्यवस्था उपलब्ध कराना है।
सरकार का मानना है कि यह कदम राज्य को निवेश के लिए अधिक आकर्षक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, क्योंकि मंजूरियों में देरी लंबे समय से निवेशकों के लिए बड़ी समस्या रही है।
लंबित आवेदनों पर एजेंसी को मिलेगा निर्णय का अधिकार
अधिसूचना के अनुसार यदि कोई आवेदन निर्धारित समय-सीमा से अधिक समय तक लंबित रहता है, तो नोडल एजेंसी को उसे मंजूरी देने का अधिकार भी दिया गया है। इस प्रावधान को प्रशासनिक देरी कम करने और निवेशकों का भरोसा बढ़ाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
वरिष्ठ अधिकारियों की उच्च स्तरीय समिति गठित
इस एजेंसी की अध्यक्षता वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के सचिव करेंगे, जो राज्य निवेश प्रोत्साहन बोर्ड के संयोजक भी हैं। समिति में कई प्रमुख विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल किए गए हैं, जिनमें—
वन विभाग, पर्यावरण संरक्षण मंडल, श्रम विभाग, नगरीय प्रशासन, राजस्व, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, स्वास्थ्य सेवाएं तथा अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएं प्रमुख हैं।
समय-सीमा और प्रक्रियाओं की होगी समीक्षा
नोडल एजेंसी विभिन्न सेवाओं के लिए तय टर्न अराउंड टाइम (TAT) की समीक्षा करेगी और आवश्यकता पड़ने पर समय-सीमा में बदलाव का सुझाव भी दे सकेगी। इसका उद्देश्य उद्योग स्थापना की प्रक्रिया को और अधिक सरल और तेज बनाना है।
निवेश बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम
सरकार का यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब देशभर के राज्य निवेश आकर्षित करने के लिए प्रक्रियाओं को सरल बनाने की होड़ में हैं। छत्तीसगढ़ में इस नई व्यवस्था से पारदर्शिता, जवाबदेही और प्रशासनिक दक्षता बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।
दीर्घकालिक निवेश रणनीति पर भी फोकस
नोडल एजेंसी को केवल अनुमोदन प्रक्रिया की निगरानी तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि उसे राज्य को अग्रणी निवेश गंतव्य बनाने के लिए नीति सुझाव, वैश्विक साझेदारियों को बढ़ावा देने और निवेश-अनुकूल माहौल विकसित करने की जिम्मेदारी भी दी गई है।


