ओबीसी महासभा द्वारा राष्ट्रीय जनगणना एवं यूजीसी के समर्थन में चलाया जा रहा है पोस्टकार्ड लेखन अभियान दीपेंद्र यादव

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गुलाम भारत में जाति आधारित जनगणना हो सकती है तो आजाद भारत में क्यों नहीं?

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा पारित अधिसूचना के समर्थन में ओबीसी महासभा

ओबीसी महासभा द्वारा राष्ट्रीय जनगणना में ओबीसी को भी शामिल किए जाने बाबत ज्ञापन विगत कई वर्षों से प्रतिमाह दिया जा रहा है। लेकिन गृह मंत्रालय भारत के महा रजिस्टार कार्यालय द्वारा जारी अधिसूचना एवं राष्ट्रीय जनगणना  2027 के 34 कालम के निर्धारित प्रपत्र के कालम नंबर 13 में विगत जनगणना की भांति इस बार भी ओबीसी समाज के लिए पृथक से कोड नंबर निर्धारित नहीं किया गया है।

जिसके कारण ओबीसी की जनगणना इस बार भी नहीं हो पाएगी। ओबीसी महासभा ने बताया कि जनगणना का मकसद भारतीय समाज की विविधताओं से जुड़े तथ्यों को सामने लाना है ताकि देश को समझने का रास्ता खुल सके। इन आंकड़ों का इस्तेमाल नीति निर्माता से लेकर समाजशास्त्री ,अर्थशास्त्री, जनसंख्याविद और आंकड़ाविज्ञानी करते हैं। राष्ट्रीय जनगणना में समस्त जातियां के आंकड़े जुटाए जाएं तभी जनगणना का उद्देश्य पूरा होता है।

ओबीसी महासभा द्वारा छत्तीसगढ़ में दूसरे चरण प्रदेशव्यापी पोस्टकार्ड लेखन अभियान चलाने से पहले कलेक्टर /एसडीएम /तहसीलदार के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति प्रधानमंत्री गृहमंत्री अध्यक्ष विश्वविद्यालय अनुदान आयोग एवं सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय तथा पंजीयक जनरल एवं जनगणना आयुक्त गृह मंत्रालय भारत सरकार नई दिल्ली के नाम प्रथम चरण में ज्ञापन प्रदेश भर में सौंपा गया था।

पोस्टकार्ड लेखन अभियान अंतर्गत राष्ट्रीय जनगणना 2027 के जनगणना प्रपत्र में ओबीसी के लिए भी पृथक से कोड नंबर निर्धारित किया जाकर सभी वर्गों का पृथक पृथक आंकड़े एकत्र कर अधिकृत रूप से आंकड़े प्रकाशन उपरांत ओबीसी समुदाय को आबादी के बराबर हिस्सेदारी (आरक्षण) प्रदान किए जाने का अनुरोध किया गया है। साथ ही 13 जनवरी 2026 को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा अधिसूचित विनियम 2026 के प्रावधानों को यथावत लागू किए जाने का समर्थन किया जा रहा है।

ओबीसी महासभा के युवा जिला अध्यक्ष दीपेंद्र यादव ने बताया कि यूजीसी विनियम 2026 उच्च शिक्षण संस्थानों में सामान्य को बढ़ावा देने वाले एवं समावेशी और सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

उन्होंने आगे बताया कि इस विनियम की  बहुत महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि प्रत्येक उच्च शिक्षण संस्थानों में समान अवसर केंद्र की स्थापना अनिवार्य की गई है यह केंद्र वंचित वर्गों के छात्रों एवं कर्मचारियों को शैक्षणिक सहायता परामर्श कैरियर मार्गदर्शन और उनके अधिकारों की जानकारी प्रदान करेगा यह केंद्र एक ऐसा सहयोगी और सुलभ स्थान पर होगा जहां सभी विद्यार्थी आत्मविश्वास के साथ भाग ले सके विशेष रूप से वे लोग जो स्वयं को उपेक्षित या अलग-थलग महसूस करते हैं।

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