राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव ने ताशकंद में किया सम्मानित, 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 5 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य
ताशकंद। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को रविवार को उज्बेकिस्तान के प्रमुख राजकीय सम्मानों में शामिल ‘ओली दराजाली दोस्तलिक’ (Order of Highest Friendship) से सम्मानित किया गया। ताशकंद में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव ने प्रधानमंत्री मोदी को यह सम्मान प्रदान किया। यह सम्मान भारत और उज्बेकिस्तान के बीच मैत्री तथा द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने में प्रधानमंत्री मोदी के योगदान के लिए दिया गया है।
सम्मान को 1.4 अरब भारतीयों को किया समर्पित
सम्मान प्राप्त करने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने इसे भारत के 1.4 अरब नागरिकों को समर्पित किया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे मैत्रीपूर्ण संबंधों और साझा सभ्यतागत विरासत का प्रतीक है।
प्रधानमंत्री ने ‘दोस्तलिक’ शब्द का अर्थ मित्रता बताते हुए कहा कि यह भारत और उज्बेकिस्तान के संबंधों की मूल भावना को दर्शाता है। उन्होंने राष्ट्रपति मिर्जियोयेव, उज्बेकिस्तान सरकार और वहां के लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया।
मोदी ने कहा कि यह उनके लिए व्यक्तिगत सम्मान से कहीं अधिक भारत के प्रत्येक नागरिक के लिए गौरव का विषय है।
वैश्विक दक्षिण के साझेदार के रूप में साथ काम करने पर जोर
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह सम्मान दोनों देशों के बीच मित्रता के साथ-साथ साझा जिम्मेदारी का भी संदेश देता है। भारत और उज्बेकिस्तान वैश्विक दक्षिण के साझेदार के तौर पर शांति, स्थिरता, विकास और मानव कल्याण के लिए मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
रिश्तों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी का दर्जा
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव के बीच हुई उच्चस्तरीय वार्ता के बाद भारत और उज्बेकिस्तान ने अपने संबंधों को ‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ के स्तर तक ले जाने का निर्णय लिया।
वार्ता में व्यापार और निवेश के अलावा डिजिटल कनेक्टिविटी, रक्षा, ऊर्जा, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन तथा खनिज संसाधनों सहित कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई।
दोनों देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 5 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, पिछले वर्ष दोनों देशों के बीच व्यापार पहली बार एक अरब डॉलर के आंकड़े को पार कर गया था।
दोनों देशों के बीच बढ़ रही कनेक्टिविटी
भारत और उज्बेकिस्तान के बीच हवाई संपर्क में भी विस्तार हुआ है। वर्तमान में दोनों देशों के बीच सप्ताह में 14 सीधी उड़ानें संचालित होने की जानकारी दी गई है। दोनों पक्षों ने आर्थिक और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने को संबंधों की मजबूती के लिए महत्वपूर्ण बताया।
कई अहम क्षेत्रों में हुए समझौते
प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के दौरान भारत और उज्बेकिस्तान के बीच विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए कई दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए गए।
इनमें 2026-2030 के सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम, आयुर्वेद एवं पारंपरिक चिकित्सा, उच्च शिक्षा एवं वैज्ञानिक अनुसंधान, पर्यावरण संरक्षण, पर्यटन, भूविज्ञान एवं खनिज संसाधन तथा आर्थिक एवं वित्तीय संवाद से संबंधित समझौते शामिल हैं।
इसके अलावा पुरातात्विक अनुसंधान और अभिलेखागार के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए भी दोनों देशों के बीच समझौते हुए।
यूरेनियम आपूर्ति और क्षेत्रीय साझेदारी भी अहम
रणनीतिक और ऊर्जा सहयोग के लिहाज से भी प्रधानमंत्री की यात्रा को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक यूरेनियम आपूर्ति को लेकर रूपरेखा पर भी प्रगति हुई है।
इसके साथ ही गुजरात और उज्बेकिस्तान के समरकंद क्षेत्र के बीच साझेदारी संबंध विकसित करने की दिशा में भी कदम उठाया गया है।
साझा सभ्यतागत विरासत को बताया रिश्तों की नींव
प्रधानमंत्री मोदी ने भारत और उज्बेकिस्तान के रिश्तों को केवल वर्तमान दौर की कूटनीतिक साझेदारी तक सीमित नहीं बताया। उन्होंने दोनों देशों के बीच सदियों से चले आ रहे सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और जन-जन के संबंधों को मजबूत रिश्तों की आधारशिला बताया।
उन्होंने कहा कि साझा विरासत और लोगों के बीच संपर्क दोनों देशों के संबंधों को भविष्य में और मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
अब किर्गिस्तान जाएंगे प्रधानमंत्री मोदी
प्रधानमंत्री मोदी 29 और 30 अगस्त को उज्बेकिस्तान की राजकीय यात्रा पर हैं। इसके बाद वह किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक जाएंगे, जहां 31 अगस्त से 1 सितंबर तक शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के 26वें शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे।
SCO सम्मेलन में भारत की ओर से क्षेत्रीय सुरक्षा, कनेक्टिविटी और आर्थिक सहयोग के अलावा आतंकवाद, अलगाववाद तथा उग्रवाद के खिलाफ सहयोग को प्रमुखता से उठाए जाने की संभावना है।




