देवलाल की जिजीविषा ने जगाई सुरों की लौ,ओपी ने दिया हौसलों को उजाला
रायगढ़। संगीत केवल सुरों का अभ्यास नहीं,बल्कि साधना, संस्कार और पीढ़ियों को जोड़ने वाली परंपरा है। रायगढ़ में इसी परंपरा को आगे बढ़ाने में जुटे चक्रधर संगीत महाविद्यालय के संचालक देवलाल देवांगन के प्रयासों को उस समय एक और संबल मिला,जब वित्त मंत्री एवं रायगढ़ विधायक ओपी चौधरी ने विद्यार्थियों से किया अपना वादा निभाते हुए विद्यालय के शत-प्रतिशत विद्यार्थियों को विधायक स्वेच्छानुदान निधि से तीन-तीन हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि के चेक स्वयं वितरित किए।

7 अक्टूबर को सिविल लाइन स्थित विधायक निवास में हुए इस आत्मीय आयोजन में मंत्री चौधरी ने एक-एक विद्यार्थी को चेक सौंपा। यह महज आर्थिक सहायता नहीं,बल्कि संगीत साधना में जुटे नन्हे कलाकारों के हुनर पर भरोसे और उन्हें आगे बढ़ाने का संदेश भी था। चेक पाकर बच्चों के चेहरों पर खुशी साफ नजर आई। उत्साहित विद्यार्थियों ने मंत्री के साथ सेल्फी लेकर इस यादगार पल को भी संजोया।
देवलाल की जिद और जुनून ने तैयार की संगीत की पौधशाला
चक्रधर संगीत महाविद्यालय आज जिन संगीत साधकों को तैयार कर रहा है,उसके पीछे संचालक देवलाल देवांगन एवं प्रिंसिपल श्रीमती चंद्रा देवांगन की जीवटता, जिजीविषा और कला के प्रति समर्पण है।सीमित संसाधनों के बीच उन्होंने रायगढ़ की संगीत परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का बीड़ा उठाया और विद्यालय को बाल संगीत साधकों की ऐसी पौधशाला के रूप में विकसित किया,जहां सुरों के साथ संस्कार और अनुशासन की भी साधना होती है।इसी विद्यालय में संगीत साधना को करीब से देखने पहुंचे ओपी चौधरी ने बच्चों की प्रतिभा और देवलाल देवांगन व श्रीमती चंद्रा देवांगन के प्रयासों को महसूस किया था।विद्यार्थियों की साधना से प्रभावित होकर उन्होंने उन्हें प्रोत्साहित करने के लिए आर्थिक सहायता देने की घोषणा की थी। बुधवार को उसी घोषणा को अमलीजामा पहनाते हुए उन्होंने स्वयं सभी विद्यार्थियों को चेक वितरित किए।
अब संगीत महाविद्यालय को गुरु के नाम की पहचान दिलाने की पहल
इस अवसर पर देवलाल देवांगन सहित विद्यालय के संरक्षक और शहर के स्थापित कलाकारों ने रायगढ़ में शुरू हुए शासकीय संगीत महाविद्यालय का नाम कलागुरु स्व.वेदमणि सिंह ठाकुर के नाम पर किए जाने की मांग संबंधी पत्र भी मंत्री ओपी चौधरी को सौंपा। कलाकारों का मानना है कि रायगढ़ की संगीत परंपरा को समृद्ध करने वाले कलागुरु के नाम से महाविद्यालय का नामकरण उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी। मंत्री चौधरी ने इस मांग पर सकारात्मक आश्वासन दिया। इससे संगीत जगत से जुड़े कलाकारों और साधकों में उम्मीद जगी है कि रायगढ़ की संगीत विरासत को नई पहचान देने की दिशा में यह पहल आगे बढ़ेगी।
एक तरफ साधना,दूसरी तरफ संबल
इस पूरे आयोजन की सबसे खूबसूरत तस्वीर यही रही कि एक ओर देवलाल देवांगन और श्रीमती चंद्रा देवांगन जैसे कला साधक अपनी पूरी ऊर्जा से बच्चों को संगीत की राह पर आगे बढ़ा रहे हैं,वहीं दूसरी ओर जनप्रतिनिधि के रूप में ओपी चौधरी ने वादे को केवल घोषणा तक सीमित न रखकर उसे बच्चों तक पहुंचाया। मौके पर चक्रधर संगीत महाविद्यालय के संचालक एवं संरक्षक,विद्यार्थी और उनके पालकगण उपस्थित रहे।तीन हजार रुपये के चेक से कहीं अधिक महत्वपूर्ण बच्चों के लिए वह भरोसा था,जो उन्हें यह एहसास दिलाता है कि उनकी सुर साधना को देखने और उसे आगे बढ़ाने वाले हाथ उनके साथ हैं।


