दीपावली पर केवल घर नहीं, समाज की सोच भी रोशन होनी चाहिए : डॉ. मनीषा त्रिपाठी

Advertisement

उत्सव की असली खूबसूरती तभी है, जब खुशियों के साथ संवेदनाएं भी जीवित रहें

दीपावली आते ही चारों ओर उत्साह, उमंग और उल्लास का वातावरण बन जाता है। घरों की सजावट, बाजारों की रौनक, दीपों की कतारें और अपनों के साथ खुशियां बांटने की परंपरा इस पर्व को विशेष बनाती है। लेकिन क्या हमने कभी विचार किया है कि दीपावली का वास्तविक अर्थ केवल उत्सव मनाना है या इसके पीछे जीवन और समाज को बेहतर बनाने का कोई गहरा संदेश भी छिपा है?

मेरे विचार से दीपावली स्वयं से संवाद करने का भी अवसर है। यह वह समय है, जब हमें अपने जीवन की प्राथमिकताओं पर विचार करना चाहिए। हम कितनी संपत्ति अर्जित कर रहे हैं, इससे अधिक महत्वपूर्ण यह है कि हम कितने लोगों के जीवन में खुशियां जोड़ पा रहे हैं। हमारे घर कितने रोशन हैं, इससे अधिक महत्वपूर्ण यह है कि हमारे व्यवहार से कितने लोगों के जीवन में सकारात्मकता आती है।

त्योहारों की चमक में कहीं मानवीय संवेदनाएं पीछे न छूट जाएं

आज हमारा समाज तेजी से बदल रहा है। जीवन की भागदौड़, प्रतिस्पर्धा और भौतिक उपलब्धियों की दौड़ में कहीं न कहीं आपसी संवाद और आत्मीयता कम होती दिखाई देती है। दीपावली हमें इसी आत्मीयता को फिर से जीवित करने का अवसर देती है।

इस पर्व पर हमें उन लोगों को भी याद करना चाहिए, जो दूसरों के घरों को सजाने, बाजारों को रोशन करने और हमारी खुशियों को संभव बनाने में अपनी मेहनत लगाते हैं। मिट्टी के दीपक बनाने वाले कुम्हार, छोटे दुकानदार, हस्तशिल्पी और श्रमिक भी हमारी दीपावली के महत्वपूर्ण सहभागी हैं। उनके श्रम का सम्मान करना और उनके उत्पादों को प्रोत्साहित करना त्योहार की खुशियों को व्यापक बनाने का एक सार्थक प्रयास है।

नारी शक्ति और परिवार की सांस्कृतिक विरासत

भारतीय परिवारों में त्योहारों की परंपरा को जीवित रखने में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। घर की सजावट से लेकर पूजा की तैयारियों तक, पारिवारिक रिश्तों को जोड़ने से लेकर बच्चों को संस्कार देने तक, महिलाएं पीढ़ियों के बीच संस्कृति की एक मजबूत कड़ी बनती हैं।

लेकिन आज की नारी केवल परंपराओं का निर्वहन करने वाली नहीं, बल्कि शिक्षा, शोध, साहित्य, प्रशासन और सामाजिक नेतृत्व के क्षेत्र में अपनी स्वतंत्र पहचान स्थापित करने वाली शक्ति भी है। आवश्यकता इस बात की है कि हम बेटियों को समान अवसर, सम्मान और अपनी प्रतिभा को अभिव्यक्त करने का स्वतंत्र वातावरण दें।

मेरे लिए दीपावली का एक महत्वपूर्ण संदेश यही है कि जिस घर में बेटियों के सपनों को सम्मान मिलता है, वहां प्रगति और खुशहाली के दीप सदैव प्रज्वलित रहते हैं।

नई पीढ़ी को केवल त्योहार नहीं, उसके पीछे छिपे संस्कार भी समझाएं

आज की पीढ़ी तकनीक और डिजिटल माध्यमों से जुड़ी हुई है। यह समय की आवश्यकता भी है, लेकिन इसके साथ अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहना भी उतना ही जरूरी है।

हमें अपने बच्चों को दीपावली की पौराणिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि बतानी चाहिए। उन्हें भगवान श्रीराम के आदर्शों, मर्यादा, सत्यनिष्ठा और कर्तव्यबोध से परिचित कराना चाहिए। साथ ही यह भी समझाना चाहिए कि भारतीय संस्कृति की वास्तविक शक्ति उसके उदार विचारों, विविधता और मानवीय मूल्यों में निहित है।

भाषा और साहित्य इस सांस्कृतिक विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने के सबसे प्रभावी माध्यम हैं। हिंदी सहित सभी भारतीय भाषाओं का सम्मान और संरक्षण हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।

समृद्धि का अर्थ केवल अपने लिए अर्जित करना नहीं

दीपावली पर मां लक्ष्मी की पूजा के माध्यम से हम सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। लेकिन समृद्धि का व्यापक अर्थ केवल व्यक्तिगत धन-संपत्ति नहीं होना चाहिए। जिस समाज में शिक्षा का अवसर सबको मिले, महिलाओं को सम्मान मिले, जरूरतमंदों को सहयोग मिले और प्रत्येक व्यक्ति को आगे बढ़ने का अवसर मिले, वही समाज वास्तविक अर्थों में समृद्ध कहलाने योग्य है।

इस बार दीपावली पर हम अपने जीवन में कुछ छोटे लेकिन सार्थक संकल्प शामिल करें। किसी जरूरतमंद बच्चे की शिक्षा में सहयोग करें, स्थानीय कारीगरों से खरीदारी करें, बुजुर्गों के साथ समय बिताएं, पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार बनें और अपने आसपास प्रेम एवं सद्भाव का वातावरण निर्मित करें।

मेरा विश्वास है कि त्योहारों की सार्थकता उनके भव्य आयोजन से नहीं, बल्कि उनसे प्रेरित होकर किए गए अच्छे कार्यों से तय होती है।

एक नया संकल्प, एक नई शुरुआत

दीपावली हमें यह अवसर देती है कि हम बीते समय की कमियों से सीखें और आने वाले कल को बेहतर बनाने का प्रयास करें। जीवन में सफलता के साथ संवेदनशीलता, ज्ञान के साथ विनम्रता और प्रतिष्ठा के साथ सामाजिक उत्तरदायित्व भी बना रहना चाहिए।

आइए, इस दीपावली हम संकल्प लें कि अपने परिवार में प्रेम, समाज में समानता, व्यवहार में शालीनता और विचारों में उदारता को स्थान देंगे। किसी के जीवन में निराशा का कारण नहीं, बल्कि आशा का आधार बनने का प्रयास करेंगे।

क्योंकि अंततः दीपावली की सबसे सुंदर रोशनी वह नहीं, जो कुछ समय के लिए हमारे घरों को चमकाती है, बल्कि वह है जो हमारे अच्छे विचारों और कर्मों के माध्यम से लंबे समय तक समाज को प्रकाशित करती है।

आप सभी के जीवन में सुख, स्वास्थ्य, समृद्धि और नई संभावनाओं का संचार हो। आपके परिवार में प्रेम और उल्लास बना रहे तथा प्रत्येक घर खुशियों से जगमगाता रहे।

इन्हीं मंगलकामनाओं के साथ आप सभी को दीपावली के पावन महापर्व की हार्दिक बधाई एवं अनंत शुभकामनाएं।

शुभ दीपावली!

डॉ. मनीषा त्रिपाठी
संयोजक, विश्व हिंदी परिषद
जिला रायगढ़, छत्तीसगढ़

Share This Article