राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान राउरकेला (एनआईटी राउरकेला) के शोधकर्ताओं ने प्रतिबंधित क्षेत्रों में अनधिकृत प्रवेश का पता लगाने के लिए एक उन्नत सुरक्षा तकनीक विकसित कर पेटेंट हासिल किया है। यह प्रणाली “इंट्रा-बिल्डिंग सुरक्षा के लिए थर्मल इमेजिंग और गेट रिकग्निशन का उपयोग कर अनधिकृत व्यक्ति का पता लगाने” शीर्षक से पेटेंट की गई है, जिसका पेटेंट नंबर 580748 और आवेदन संख्या 202331058606 है। इस नवाचार को इलेक्ट्रॉनिक्स एवं संचार अभियांत्रिकी विभाग की टीम ने विकसित किया है।

यह पूरी तरह से स्वचालित और गैर-हस्तक्षेपकारी प्रणाली व्यक्ति की चलने की शैली यानी “गेट” के आधार पर उनकी पहचान करती है। जब कोई व्यक्ति किसी भवन या कॉम्प्लेक्स के प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश करता है, तो यह तकनीक उसके चाल-ढाल के पैटर्न को पहले से मौजूद अधिकृत डेटा से मिलाती है। यदि मेल नहीं खाता, तो उसे संदिग्ध मानकर सुरक्षा अलर्ट जारी किया जाता है।
थर्मल इमेजिंग से रात में भी मजबूत निगरानी
इस तकनीक की खासियत इसका थर्मल इमेजिंग आधारित संचालन है, जो कम रोशनी और रात के समय भी प्रभावी तरीके से काम करता है। पारंपरिक सीसीटीवी सिस्टम जहां मैनुअल निगरानी और प्रकाश पर निर्भर होते हैं, वहीं यह प्रणाली इन्फ्रारेड सिग्नल्स के माध्यम से मानव आकृति और गतिविधि को बैकग्राउंड से अलग पहचानने में सक्षम है।

करीब 1.90 लाख रुपये की लागत से विकसित इस सिस्टम में मल्टी-कैमरा सेटअप का उपयोग किया गया है, जो प्रवेश द्वार से लेकर विभिन्न चेकपॉइंट्स तक व्यक्ति की गतिविधियों को ट्रैक करता है। यह प्रणाली एक केंद्रीय सर्वर से जुड़ी होती है, जहां डेटा प्रोसेसिंग, लॉगिंग और डेटाबेस मैनेजमेंट किया जाता है।
सुरक्षा, अनुसंधान और रक्षा क्षेत्रों में उपयोगी
यह तकनीक शैक्षणिक संस्थानों, कॉर्पोरेट परिसरों, रक्षा प्रतिष्ठानों और अन्य उच्च सुरक्षा वाले क्षेत्रों के लिए बेहद उपयोगी मानी जा रही है, जहां सटीक और विश्वसनीय पहचान जरूरी होती है। इसके अलावा, औद्योगिक और रिसर्च एवं डेवलपमेंट (R&D) सुविधाओं में भी इसका उपयोग किया जा सकता है।

शोधकर्ताओं के अनुसार, यह प्रणाली न केवल मैनुअल निगरानी पर निर्भरता कम करती है, बल्कि संदिग्ध गतिविधियों की तेज और सटीक पहचान भी सुनिश्चित करती है। इसके माध्यम से सुरक्षा व्यवस्था को अधिक स्वचालित, कुशल और त्रुटिरहित बनाया जा सकता है।
भविष्य की संभावनाएं और आगे की योजना
इस परियोजना को वैज्ञानिक एवं इंजीनियरिंग अनुसंधान बोर्ड (SERB) के सहयोग से विकसित किया गया है। शोध टीम अब इस तकनीक को व्यावसायिक और वास्तविक परिस्थितियों में लागू करने के लिए उद्योग जगत के साथ साझेदारी की संभावनाएं तलाश रही है।
