National Institute of Technology Rourkela का स्टॉपब्लीड®: प्रयोगशाला नवाचार से जीवनरक्षक उपचार तक की ऐतिहासिक छलांग

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CDSCO से क्लास ‘C’ मेडिकल डिवाइस की स्वीकृति, सैन्य व आपातकालीन परिस्थितियों में अत्यधिक रक्तस्राव रोकने में कारगर

राउरकेला, 24 फरवरी 2026। शोध को समाजोपयोगी समाधान में बदलने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए National Institute of Technology Rourkela द्वारा विकसित स्टार्टअप मीराक़्यूल्स मेडसॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड को उसकी पेटेंट तकनीक स्टॉपब्लीड® के वाणिज्यिक उत्पादन और नैदानिक उपयोग के लिए नियामकीय स्वीकृति प्राप्त हुई है।

यह स्वीकृति Central Drugs Standard Control Organization (CDSCO) द्वारा क्लास ‘C’ मेडिकल डिवाइस के रूप में दी गई है—जो किसी शैक्षणिक अनुसंधान के वास्तविक जीवन रक्षक चिकित्सा तकनीक में रूपांतरण की दिशा में महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।


ट्रॉमा के खिलाफ नई उम्मीद: सड़क से सैन्य मोर्चे तक उपयोगी

भारत में ट्रॉमा देखभाल आज भी बड़ी चुनौती है। सड़क दुर्घटनाओं और दूरस्थ क्षेत्रों में समय पर रक्तस्राव नियंत्रित न हो पाने से अनेक जानें चली जाती हैं। स्टॉपब्लीड® इस गंभीर अंतर को पाटने की क्षमता रखता है।

यह उत्पाद सड़क दुर्घटनाओं, गोली लगने, विस्फोटक चोटों, औद्योगिक हादसों और गहरे घावों जैसी जीवन-घातक स्थितियों में तीव्र रक्तस्राव को शीघ्र नियंत्रित करने में सहायक है। सैन्य अभियानों के दौरान भी यह प्राथमिक उपचारकर्ताओं के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो सकता है।


नैनो-बायोपॉलिमर तकनीक पर आधारित उन्नत समाधान

स्टॉपब्लीड® पाउडर और पेलेट (छोटे दानों) के रूप में उपलब्ध है। नैनोफाइब्रस एग्रीगेट तकनीक पर आधारित यह उत्पाद रक्त प्लाज़्मा को तेजी से अवशोषित करता है और रक्त कोशिकाओं को उच्च सतह क्षेत्र वाले रेशेदार जाल में फँसा लेता है। इससे शरीर की प्राकृतिक थक्का बनने की प्रक्रिया तेज होती है और घाव पर मजबूत हाइड्रोजेल सील बनती है।

तीन वर्ष की शेल्फ लाइफ (कमरे के तापमान पर) के साथ यह उत्पाद चिकित्सा पेशेवरों और गैर-चिकित्सीय प्राथमिक उपचारकर्ताओं दोनों के लिए उपयोग में आसान है।


पेटेंट से स्टार्टअप तक: शोध की उद्यमशील यात्रा

यह तकनीक मूल रूप से संस्थान के बायोटेक्नोलॉजी और मेडिकल इंजीनियरिंग विभाग में प्रो. देवेंद्र वर्मा और उनके शोध छात्र श्री साबिर हुसैन द्वारा विकसित की गई थी। बाद में इसका प्रौद्योगिकी हस्तांतरण श्री हुसैन के नेतृत्व वाले स्टार्टअप मीराक़्यूल्स मेडसॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड को उत्पादन, वितरण और क्षेत्रीय उपयोग हेतु किया गया।

संस्थान के निदेशक प्रो. के. उमामहेश्वर राव ने इस उपलब्धि पर टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह नवाचार आपातकालीन स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को सशक्त बनाने की क्षमता रखता है।


अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरा उतरा नवाचार

अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों (ISO 10993) और USFDA दिशानिर्देशों के अनुरूप, टीम ने व्यापक प्रयोगशाला एवं पशु परीक्षण किए, जिनमें संतोषजनक परिणाम प्राप्त हुए। बेंगलुरु स्थित Sanjay Gandhi Institute of Trauma and Orthopaedics के सहयोग से प्रथम-मानव (First-in-Human) अध्ययन के माध्यम से इसे वास्तविक नैदानिक वातावरण में भी परखा गया।


“आत्मनिर्भर स्वास्थ्य तकनीक की दिशा में बड़ा कदम”

प्रो. देवेंद्र वर्मा ने कहा,

“स्टॉपब्लीड® को प्रयोगशाला से CDSCO स्वीकृत वास्तविक उपयोग तक पहुँचते देखना अत्यंत संतोषजनक है। यह सैन्य परिस्थितियों और ग्रामीण भारत में आपातकालीन स्थितियों के दौरान जीवन बचाने में सहायक होगा। हमें ऐसे और स्वास्थ्य स्टार्टअप्स की आवश्यकता है, जो आयात निर्भरता कम करें और स्थानीय जरूरतों के अनुरूप समाधान विकसित करें।”

स्टार्टअप के संस्थापक एवं सीईओ श्री साबिर हुसैन ने कहा,

“CDSCO की स्वीकृति हमारे वर्षों के वैज्ञानिक कार्य की पुष्टि है। हमने चयनित क्लिनिकल संस्थानों में सीमित स्तर पर इसकी तैनाती शुरू कर दी है और व्यापक वितरण हेतु रणनीतिक साझेदारियों पर कार्य कर रहे हैं।”


‘मेक इन इंडिया’ दृष्टि को मिलेगा बल

भारत सरकार की “मेक इन इंडिया” पहल के अनुरूप विकसित स्टॉपब्लीड® देश में ट्रॉमा देखभाल और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रबंधन के तरीकों में व्यापक परिवर्तन लाने की क्षमता रखता है।

यह उपलब्धि न केवल एक संस्थान की सफलता है, बल्कि यह संकेत भी है कि भारतीय शैक्षणिक शोध अब प्रयोगशाला की सीमाओं से निकलकर सीधे जीवन बचाने वाले समाधान बन रहा है।

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