गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही (GPM): जिले के पेण्ड्रा जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत घघरा में विकास कार्यों के नाम पर सरकारी खजाने को चूना लगाने का एक बड़ा मामला गरमाता नजर आ रहा है। यहाँ खालेपारा में सांसद निधि से स्वीकृत शेड निर्माण में व्यापक भ्रष्टाचार और अधिकारियों की ठेकेदार के साथ सांठगांठ के गंभीर आरोप लग रहे हैं।
क्या है पूरा मामला…?
माननीय सांसद श्रीमती ज्योत्स्ना चरणदास महंत की सांसद निधि (MP LADS) से ग्राम पंचायत घघरा के खालेपारा में शेड निर्माण के लिए ₹5.00 लाख की राशि स्वीकृत की गई थी। निर्माण कार्य पूरा होने का दावा तो किया जा रहा है, लेकिन मौके पर लगा शिलालेख (Plaque) खुद भ्रष्टाचार की कहानी बयां कर रहा है।
भ्रष्टाचार के बड़े संकेत :-
भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी सांसद निधि? ग्राम पंचायत घघरा में 5 लाख के शेड निर्माण पर उठे सवाल, इंजीनियर गिरवर साहू की भूमिका संदिग्ध!
•अधूरा शिलालेख-: शिलालेख पर “कार्य प्रारंभ दिनांक” और “कार्य पूर्ण दिनांक” के कॉलम को जानबूझकर खाली रखा गया है। यह पारदर्शिता पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।
•इंजीनियर की कार्यप्रणाली पर सवाल-: ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि जनपद पंचायत के इंजीनियर गिरवर साहू ने ठेकेदार से कथित तौर पर हाथ मिला लिया है। बिना गुणवत्ता की जांच किए और बिना मापदंडों को पूरा किए कार्य को हरी झंडी दी जा रही है।
•लाखों की हेराफेरी-: ₹5 लाख की भारी-भरकम राशि के बावजूद धरातल पर काम की गुणवत्ता बेहद निम्न बताई जा रही है। आरोप है कि इंजीनियर और ठेकेदार की “जुगलबंदी” के चलते शासन की राशि का बंदरबांट कर लिया गया है।
ग्रामीणों में आक्रोश :-
स्थानीय लोगों का कहना है कि सांसद निधि की राशि जनता की सुविधा के लिए होती है, न कि भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ने के लिए। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और जिला पंचायत सीईओ से मांग की है इस पूरे निर्माण कार्य की तकनीकी जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए।
इंजीनियर गिरवर साहू के कार्यकाल में हुए अन्य कार्यों की भी फाइलें खोली जाएं।
भ्रष्टाचार सिद्ध होने पर संबंधित ठेकेदार और दोषी इंजीनियर पर FIR दर्ज की जाए।
”भ्रष्टाचार का यह खेल अब और नहीं चलेगा। जब शिलालेख पर तारीख ही गायब हैं, तो काम की ईमानदारी का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।


