लिटाईपाली के अग्नि कुमार सिदार ने तालाब निर्माण में खुद किया श्रम, अब मछली पालन के साथ खेती के लिए मिल रहा सिंचाई का पानी
रायगढ़, 29 सितंबर 2026। कभी रोजगार की तलाश में मनरेगा के तहत किया गया श्रम आज एक ग्रामीण परिवार के लिए स्थायी आजीविका का आधार बन गया है। रायगढ़ जिले के पुसौर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत लिटाईपाली निवासी अग्नि कुमार सिदार के लिए मनरेगा से निर्मित तालाब रोजगार से आगे बढ़कर आय और खेती का महत्वपूर्ण साधन बन गया है।
तालाब निर्माण के दौरान अग्नि कुमार ने स्वयं भी श्रमिक के रूप में काम किया। तालाब तैयार होने के बाद उन्होंने इसका उपयोग मछली पालन के लिए शुरू किया। इसके साथ ही तालाब में जमा पानी का इस्तेमाल खेतों की सिंचाई के लिए भी किया जा रहा है।
मछली पालन से अतिरिक्त आय की उम्मीद
अग्नि कुमार के अनुसार, तालाब में वर्तमान में कतला सहित अन्य प्रजातियों की मछलियां डाली गई हैं। इससे उन्हें आने वाले समय में अतिरिक्त आमदनी की उम्मीद है। मनरेगा के माध्यम से बनी परिसंपत्ति अब उनके लिए रोजगार के साथ आय का नया माध्यम तैयार कर रही है।
तालाब के पानी से खेतों की सिंचाई होने के कारण खेती करना भी पहले की तुलना में सुविधाजनक हुआ है। पानी की उपलब्धता से कृषि कार्यों को सहारा मिला है और तालाब का उपयोग एक से अधिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा है।
तालाब की मेड़ पर भी खेती
अग्नि कुमार ने तालाब की मेड़ को भी उपयोगी बनाया है। मेड़ के आसपास उन्होंने अरहर और गेंदे के फूल लगाए हैं। इस तरह तालाब का उपयोग केवल जल संग्रहण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके आसपास की भूमि का भी आजीविका के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।
अग्नि कुमार का कहना है कि मनरेगा के तहत उन्हें रोजगार के साथ ऐसी परिसंपत्ति मिली है, जिसका लाभ लगातार मिल रहा है। उनके लिए यह तालाब अब मछली पालन, सिंचाई और आजीविका का आधार बन गया है। उन्होंने योजना से मिले लाभ के लिए शासन-प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया।
कौन ले सकता है निजी डबरी निर्माण का लाभ?
विभागीय अधिकारियों के अनुसार, मनरेगा के तहत निजी डबरी निर्माण का लाभ लेने के लिए आवेदक के पास वैध जॉब कार्ड और स्वयं की कृषि भूमि होना आवश्यक है। इच्छुक किसान अपनी ग्राम पंचायत या रोजगार सहायक के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं।
आवेदन के साथ आधार कार्ड, जॉब कार्ड और भूमि से संबंधित आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने होते हैं। योजना के तहत तैयार की जाने वाली ऐसी परिसंपत्तियां ग्रामीण परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराने के साथ-साथ खेती, सिंचाई और अतिरिक्त आय के साधन विकसित करने में मदद करती हैं।
रोजगार से आगे स्थायी परिसंपत्ति का लाभ
लिटाईपाली के अग्नि कुमार सिदार की कहानी यह दर्शाती है कि मनरेगा के तहत किए गए कार्य केवल तत्काल रोजगार उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं हैं। जल संरक्षण से जुड़ी परिसंपत्तियों का उपयोग यदि योजनाबद्ध तरीके से किया जाए, तो उनसे खेती, मछली पालन और अन्य आजीविका गतिविधियों को लंबे समय तक सहारा मिल सकता है।
