रायपुर। नवा रायपुर स्थित मंत्रालय में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब सचिव के नाम पर डिजिटल हस्ताक्षर (digital signature fraud) का दुरुपयोग कर फर्जी नियुक्ति पत्र जारी करने का बड़ा मामला सामने आया। पुलिस (police) ने इस हाई-प्रोफाइल ठगी (fraud case) में एक शिक्षक और एक क्लर्क को गिरफ्तार किया है।
व्हाट्सएप पर वायरल आदेश से खुला फर्जीवाड़ा
मामले का खुलासा सामान्य प्रशासन विभाग के अधिकारी राजपाल बघेल की शिकायत पर हुआ। 5 मार्च 2026 के नाम से जारी एक संदिग्ध आदेश सोशल मीडिया, खासकर व्हाट्सएप पर तेजी से वायरल हो रहा था। इसमें परिवहन, राजस्व, वन, पंचायत और स्कूल शिक्षा विभाग में नियुक्ति का दावा किया गया था। जांच में यह आदेश पूरी तरह फर्जी पाया गया, जिसमें सचिव और उप सचिव के डिजिटल हस्ताक्षर का दुरुपयोग किया गया था।
तकनीकी जांच से आरोपियों तक पहुंची पुलिस
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर विशेष टीम बनाई गई। टीम ने मोबाइल नंबर, डिजिटल डिवाइस और सोशल मीडिया ट्रेल का विश्लेषण किया। जांच के दौरान आरोपी का लोकेशन राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ में मिला, जहां से मुख्य आरोपी राजेश शर्मा उर्फ राजू (सरकारी शिक्षक) को गिरफ्तार किया गया।
कर्ज में डूबे आरोपियों ने रची साजिश
पूछताछ में सामने आया कि आर्थिक तंगी और कर्ज के चलते आरोपी ने अपने साथी मनोज कुमार श्रीवास्तव (निजी स्कूल क्लर्क) के साथ मिलकर कंप्यूटर पर फर्जी नियुक्ति आदेश तैयार किया। इसके जरिए लोगों को सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर रकम वसूली जा रही थी।
34 लोगों से डेढ़ करोड़ से अधिक की ठगी
जांच में खुलासा हुआ कि आरोपियों ने भिलाई की एक महिला से 1.90 लाख रुपये वसूले थे। मामला उजागर होने के बाद रकम वापस कर दी गई, लेकिन अब तक 34 पीड़ितों से करीब डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की जा चुकी थी।
आईटी एक्ट सहित कई धाराओं में केस दर्ज
पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके पास से कंप्यूटर सेट और प्रिंटर जब्त किया है। थाना राखी में अपराध क्रमांक 76/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं और आईटी एक्ट (IT Act) की धारा 66D के तहत मामला दर्ज कर आगे की जांच जारी है।
पुलिस ने आमजन से अपील की है कि किसी भी सरकारी नौकरी (government job) के नाम पर पैसे मांगने वाले व्यक्तियों से सतर्क रहें और ऐसे मामलों की तुरंत सूचना दें।


